त्रियुगीनारायण धाम में इस साल अब तक पहुंचे 2.32 लाख श्रद्धालु, बना आस्था और डेस्टिनेशन वेडिंग का नया केंद्र
त्रियुगीनारायण धाम में इस साल 2.32 लाख से अधिक श्रद्धालु दर्शन कर चुके हैं। यह पवित्र स्थल अब डेस्टिनेशन वेडिंग के लिए भी नवयुगलों की पहली पसंद बन गया ...और पढ़ें

डेस्टिनेशन वेडिंग के लिए भी नवयुगलों की पहली पसंद बनकर उभर रहा मंदिर।

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संवाद सूत्र, जागरण, फाटा। शिव पार्वती विवाह स्थली त्रियुगीनारायण मंदिर में इस वर्ष यात्रा सीजन के दौरान श्रद्धालुओं और पर्यटकों की अभूतपूर्व भीड़ देखने को मिल रही है। इस वर्ष अब तक 2.32 लाख से अधिक श्रद्धालु भगवान नारायण के दर्शन कर चुके हैं। वहीं यह पवित्र धाम डेस्टिनेशन वेडिंग के लिए भी देशभर के नवयुगलों की पहली पसंद बनकर उभर रहा है।
भगवान शिव और माता पार्वती के दिव्य विवाह स्थल के रूप में विश्वभर में प्रसिद्ध इस पवित्र धाम में प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। चारधाम यात्रा के साथ-साथ त्रियुगीनारायण धाम भी श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। सावन मास शुरू होने के बाद श्रद्धालुओं की संख्या में और अधिक वृद्धि देखने को मिल रही है। अब तक देश-विदेश से 2,32,738 यात्री त्रियुगीनारायण के दर्शन कर चुके हैं।
नवयुगलों की पहली पसंद
बीते कुछ वर्षों में यह पवित्र धाम डेस्टिनेशन वेडिंग के लिए भी नवयुगलों की पहली पसंद बनकर उभरा है। शुभ मुहूर्तों पर बड़ी संख्या में युगल यहां वैदिक रीति-रिवाजों से विवाह बंधन में बंधने पहुंच रहे हैं। धार्मिक वातावरण, प्राकृतिक सौंदर्य और पौराणिक महत्व के कारण यहां होने वाले विवाह देश-विदेश तक आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं।
तीर्थपुरोहित समिति के सदस्य राजेश भट्ट ने बताया कि त्रियुगीनारायण धाम में धार्मिक आस्था के साथ-साथ प्राकृतिक सौंदर्य और पौराणिक महत्व श्रद्धालुओं को विशेष रूप से आकर्षित कर रहा है। उन्होंने कहा कि प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं, जिससे पूरे क्षेत्र में रौनक बनी हुई है। श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या का सकारात्मक प्रभाव स्थानीय अर्थव्यवस्था पर भी देखने को मिल रहा है। होटल व्यवसायियों, होमस्टे संचालकों, दुकानदारों और स्थानीय व्यापारियों में उत्साह का माहौल है।
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चारधाम यात्रा के साथ त्रियुगीनारायण धाम में लगातार बढ़ रही श्रद्धालुओं की संख्या इस बात का प्रमाण है कि यह पौराणिक स्थल अब केवल धार्मिक आस्था का केंद्र ही नहीं, बल्कि आध्यात्मिक पर्यटन और वैदिक विवाहों का भी एक प्रमुख राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय आकर्षण बन चुका है।