शिव-पार्वती के विवाह स्थल त्रियुगीनारायण मंदिर में बढ़ा शादियों का क्रेज, 1 माह में 40 नव युगल ने लिए 7 फेरे
शिव-पार्वती का विवाह स्थल त्रियुगीनारायण मंदिर अब नवयुगलों के लिए एक पसंदीदा वेडिंग डेस्टिनेशन बन गया है। ...और पढ़ें

त्रियुगीनारायण में शादी के बंधन में बंधे नवयुगल।

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संवाद सूत्र, गौरीकुंड (रुद्रप्रयाग)। शिव और पार्वती की विवाह स्थली त्रियुगीनारायण मंदिर जहां नवयुगलों की शादी के बंधन में बंधने की पहली पसंद बनता जा रहा है।
वहीं, देश-विदेश के लोग शादी की सालगिरह यादगार बनाने के लिए भी यहां पहुंच रहे हैं। पिछले एक माह में यहां करीब 40 नवयुगल शुभ मुहूर्त पर शादी के बंधन में बंध चुके हैं।
केदारघाटी के सीमांत क्षेत्र में स्थित त्रियुगीनारायण मंदिर में स्थित शिव-पार्वती का विवाह स्थल वेडिंग डेस्टिनेशन बन रहा हैं।
मान्यता है कि भगवान शिव और माता पार्वती ने इस पवित्र स्थल में अखंड अग्नि को साक्षी मानकर सात फेरे लिए थे।

इस अग्नि को धनंजय अग्नि नाम से पुकारा जाता है। इस विवाह के साक्षी भगवान विष्णु भी बने थे। देश के प्रत्येक राज्य से वर्षभर नवयुगल पहुंच कर यहां पर शुभमुहूर्त पर शादी के बंधन में बंध रहे हैं।
बीते जनवरी से अभी तक यहां पर करीब सौ नवयुगल शादी के बंधन में बंधे हैं। वहीं, केदारनाथ के कपाट खुलने से अभी तक करीब 40 के लगभग शादियां संपन्न हो चुकी हैं।
तीर्थ पुरोहित समिति के सदस्य राजेश भट्ट ने बताया कि नवयुगलों के विवाह बंधन में बंधने के लिए त्रियुगीनारायण मंदिर पहली पसंद बन रहा है।
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