नई टिहरी में कौतूहल, सावन में खिला लाल बुरांश, विशेषज्ञों ने बताया जलवायु परिवर्तन का संकेत
नई टिहरी के चंबा-मसूरी मार्ग पर सावन में बुरांश का खिलना लोगों के लिए कौतूहल का विषय बन गया है। विशेषज्ञ इसे स्थानीय मौसम, तापमान या जलवायु परिवर्तन क ...और पढ़ें
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HighLights
चंबा-मसूरी मार्ग पर सावन में खिला बुरांश।
सामान्यतः बुरांश वसंत ऋतु में फरवरी से अप्रैल तक खिलता है।
विशेषज्ञ इसे जलवायु परिवर्तन का महत्वपूर्ण संकेत मानते हैं।
जागरण संवाददाता, नई टिहरी। चंबा-मसूरी मार्ग पर कद्दूखाल क्षेत्र में सावन के महीने में बुरांश का खिलना लोगों के लिए कौतूहल का विषय बन गया है। सामान्यतः बुरांश वसंत ऋतु में खिलता है। विशेषज्ञों के अनुसार यह स्थानीय मौसम, तापमान या अन्य प्राकृतिक कारणों का प्रभाव हो सकता है। वानिकी महाविद्यालय, रानीचौरी के वानिकी प्रोफेसर डॉ. अरविंद बिजल्वाण ने बताया कि बुरांश जिसे वैज्ञानिक भाषा में रोडोडेंड्रोन अरबोरियम कहते हैं का सामान्य पुष्पकाल फरवरी से अप्रैल तक होता है।
जुलाई-अगस्त में बुरांस के कुछ पौधों पर फूल आना सामान्य घटना नहीं है, बल्कि इसके कई वैज्ञानिक कारण हो सकते है, जैसे पर्यावरणीय तनाव (स्ट्रेस), असामान्य तापमान, अनियमित वर्षा, मिट्टी की नमी में बदलाव, दिन की लंबाई और प्रकाश संकेतों में परिवर्तन, स्थानीय सूक्ष्म जलवायु, पौधों की आनुवंशिक विविधता आदि।
यह भी देखा गया है कि पर्यावरणीय तनाव के बाद पुनः वृद्धि, सुप्त पुष्प कलियों का सक्रिय होना और पौध हार्मोनों में परिवर्तन जैसे कारण असमय पुष्पन का कारण बन सकते हैं। यह घटना सामान्य नहीं है, लेकिन यदि असमय पुष्पन की यह घटना लगातार और अधिक पौधों में दिखाई देने लगे तो यह बदलते पर्यावरण और जलवायु के प्रभाव का महत्वपूर्ण संकेत माना जाएगा।