टिहरी झील में जबलपुर जैसा हादसा होने से टला, आंधी से फ्लोटिंग हट में फंसे 30 पर्यटक सुरक्षित बचाए गए
टिहरी झील में तेज आंधी-तूफान के कारण फ्लोटिंग हट डगमगा गई, जिससे उसमें सवार 30 पर्यटकों में अफरातफरी मच गई। जेटी का नट टूटने से हुए इस हादसे में सभी प ...और पढ़ें
HighLights
टिहरी झील में फ्लोटिंग हट आंधी से डगमगाई
30 पर्यटक सुरक्षित बचाए गए, जेटी का नट टूटा
फ्लोटिंग हट का संचालन रोका, जांच समिति गठित
संवाद सहयोगी, नई टिहरी। मध्य प्रदेश के जबलपुर में बरगी डैम पर क्रूज हादसे के तीन दिन बाद ही उत्तराखंड की टिहरी झील में भी ऐसा ही हादसा सामने आया है।
टिहरी झील में संचालित फ्लोटिंग हट (तैरता आवास) तेज आंधी और तूफान के बीच शनिवार देर शाम अचानक डगमगा गई। इससे उसमें सवार 30 पर्यटकों में अफरातफरी मच गई।
हादसे का कारण हट्स के लिए प्लेटफार्म के रूप में बनाई गई जेटी का जोड़ (नट) टूटना माना जा रहा है। बताया जा रहा कि कठोर प्लास्टिक के बाक्स से बनी इस जेटी का लंबे समय से ठीक से रखरखाव (मेंटेनेंस) नहीं हुआ।

यद्यपि समय पर रेस्क्यू कर सभी पर्यटकों को सुरक्षित स्थान पर ले जाया गया। ऐहतियातन फ्लोटिंग हट के संचालन पर रोक लगा दी गई है। हादसे के कारण और सुरक्षा मानकों की जांच के लिए पांच सदस्यीय कमेटी बनाई गई है।
शासन ने भी ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए पर्यटन विभाग को एसओपी बनाने के निर्देश दिए हैं।
मालदीव की तरह पर्यटकों को आकर्षित करने व पर्यटन विकास को बढ़ावा देने के लिए नई टिहरी से 40 किमी दूर डोबरा-चांठी क्षेत्र में झील में स्ट्रक्चर तैयार किया गया है।
जेटी का इस्तेमाल करके उनके ऊपर झोपड़ी जैसे दिखने वाले 20 छोटे कमरे (फ्लोटिंग हट्स) तैयार किए गए हैं। इन्हें पानी के अंदर भारी-भरकम एंकर डालकर स्थिर किया गया है।

पानी के वेग के बावजूद ये एक जगह पर ही ठहरी रहती हैं। शनिवार देर शाम 7:45 बजे आंधी-तूफान के कारण तेज हवाओं के साथ उठती लहरों ने टिहरी झील में स्थापित फ्लोटिंग हट को प्रभावित कर दिया।
300 फीट लंबी और 15 फीट चौड़ी जेटी नट टूटने से बीचोंबीच दो हिस्सों से बंट गई। इससे उसके ऊपर बनीं हट्स डगमगाने लगी तो इसमें सवार दिल्ली सहित अन्य राज्यों के 30 पर्यटकों में चीख-पुकार मच गई।
पर्यटकों के घिरने पर 10 किमी दूर मौजूद एसडीआरएफ की टीम कोटी कालोनी पहुंची और राहत और बचाव कार्य शुरू किया।
टीम ने अपनी 140 एचपी बोट के जरिये 22 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला, जबकि टाडा यूनियन की बोट की मदद से अन्य को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया गया। पर्यटकों में 14 महिलाएं शामिल हैं। उन्हें लेक व्यू होटल और ईको हट में ठहराया गया।

मौसम के अलर्ट को नजरअंदाज किया
हादसे के पीछे मौसम विज्ञान विभाग की ओर जारी आरेंज अलर्ट की अनदेखी भी सामने आ रही है। शनिवार शाम 7:30 से 10:30 बजे तक के अलर्ट में आकाशीय बिजली चमकने, तेज वर्षा, आंधी-तूफान और 40-50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवा चलने की चेतावनी दी गई थी। बावजूद इसके किसी ने इसे गंभीरता से नहीं लिया।
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ऐसे बनी है जेटी
जेटी में चारों तरफ खांचे वाले कठोर प्लास्टिक के बाक्स होते हैं। इन्हें नायलोन की रस्सी से बांधा जाता है। साथ ही बाक्स को नट से जोड़ा जाता है, ताकि प्लेटफार्म स्थिर रहे।
हर हट्स में लाइफ जैकेट अनिवार्य
झील के मध्य में बने इन हट्स में लोगों को लाइफ जैकेट पहनाकर लाया-ले जाया जाता है। जब तक वे वहां रुकते हैं, तब तक प्रत्येक सदस्य के लिए उनकी हट्स में यह जैकेट रखनी होती है, ताकि हादसे की स्थिति में इसका इस्तेमाल हो सके। एसडीआरएफ के अनुसार हट्स में सभी पर्यटकों के लिए लाइफ जैकेट मौजूद थी।
सुरक्षा मानकों की अनदेखी में चार कंपनियों की गतिविधि पर 15 दिनों के लिए प्रतिबंध
जबलपुर में हुए क्रूज बोट हादसे के बाद उत्तराखंड में भी राफ्टिंग-बोटिंग के सुरक्षा मानकों को लेकर शासन-प्रशासन समेत संबंधित एजेंसियां सतर्क हो गई हैं।
राफ्टिंग कराने वाली कंपनियों के साथ बोट संचालकों को एसओपी का अनिवार्य रूप से पालन सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए गए हैं। इसी कड़ी में गंगा राफ्टिंग के दौरान सुरक्षा मानकों की अनदेखी करने वाली चार कंपनियों की गतिविधि पर 15 दिनों के लिए प्रतिबंध लगा दिया गया।

फ्लोटिंग हट के बारे में जानिए
- उत्तराखंड पर्यटन विकास परिषद की ओर से वर्ष 2018 में इसका निर्माण किया गया था।
- तीन वर्ष तक इसका संचालन गढ़वाल मंडल विकास निगम ने किया।
- वर्ष 2022 में इसका संचालन ली राय कंपनी को पीपीपी मोड पर दिया गया।
- डेढ़ करोड़ रुपये सालाना टेंडर पर 30 वर्षों के लिए लीज पर सौंपा गया है।
- यात्रियों के ठहरने के लिए कुल 20 कमरे, किचन, स्टोर रूम, जनरेटर रूम आदि बनाए गए हैं। एक कमरे में दो लोगों के ठहरने की व्यवस्था है।
- आफ सीजन में एक कमरे का एक रात का किराया 15 हजार से शुरू होता है और पर्यटन सीजन में यह 35 हजार रुपये तक भी पहुंचता है। बुकिंग आनलाइन होती है।
- सीवर और किचन के पानी का निस्तारण न होने की शिकायत सही पाए जाने पर यह चार साल पहले सील हो चुका है।
चर्चा में रहा फ्लोटिंग मरीना बोट
सात साल पहले टिहरी झील में फ्लोटिंग मरीना बोट (तैरता रेस्तरां) डूब गया था। वर्ष 2018 में 16 मई को तत्कालीन मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत के कार्यकाल में पहली बार उत्तराखंड सरकार की कैबिनेट बैठक भी मरीना बोट पर हुई थी। फ्लोटिंग मरीना में बालीवुड फिल्मों के दृश्य और गीतों की शूटिंग भी हो चुकी है।
जेटी कैसे टूटी यह जांच का विषय है। इसमें किसी प्रकार की लापरवाही पाई गई तो संबंधित कंपनी के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई होगी। हट्स के रखरखाव की जिम्मेदारी भी ली राय कंपनी की ही है। हर वर्ष मई-जून में इसका रखरखाव किया जाता है, लेकिन इस वर्ष लगातार वर्षा के कारण झील के पानी में भारी मात्रा में सिल्ट पहुंच रहा है। इस कारण मेंटेनेंस नहीं हो पाई।
-सोबत सिंह राणा, जिला पर्यटन विकास अधिकारी
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