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    बाजपुर चीनी मिल में स्क्रैप घोटाले की उच्चस्तरीय जांच शुरू, डीएम ने बनाई समिति

    Updated: Wed, 22 Jul 2026 08:54 AM (IST)

    बाजपुर सहकारी चीनी मिल में स्क्रैप उठान में अनियमितताओं के आरोपों पर जिलाधिकारी ने पांच सदस्यीय उच्चस्तरीय जांच समिति गठित की है। जांच पूरी होने तक स् ...और पढ़ें

    जिलाधिकारी नितिन सिंह भदौरिया। फोटो- इंटरनेट मीडिया

     जिलाधिकारी नितिन सिंह भदौरिया। फोटो- इंटरनेट मीडिया

    HighLights

    1. बाजपुर चीनी मिल स्क्रैप अनियमितताओं पर उच्चस्तरीय जांच।

    2. जिलाधिकारी ने पांच सदस्यीय जांच समिति गठित की।

    3. जांच पूरी होने तक स्क्रैप उठान पर रोक।

    संवाद सहयोगी, बाजपुर। बाजपुर सहकारी चीनी मिल में स्क्रैप उठान के दौरान अनियमितता के आरोपों को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी नितिन सिंह भदौरिया ने पांच सदस्यीय उच्चस्तरीय जांच समिति का गठन किया है। समिति पूरे मामले की जांच कर तथ्यात्मक रिपोर्ट और कार्रवाई संबंधी संस्तुति शीघ्र प्रस्तुत करेगी।

    मंगलवार को प्रधान प्रबंधक की ओर से जिलाधिकारी को भेजे गए पत्र में बताया गया कि बाहरी व्यक्तियों ने आरोप लगाया कि चीनी मिल से उठान किए गए स्क्रैप ट्रक का वजन मिल परिसर से बाहर दोबारा कराने पर अंतर पाया गया। इसके बाद मौके पर पहुंचकर संबंधित वाहन को कोतवाली बाजपुर में सुरक्षित खड़ा कराया गया तथा पुलिस की मौजूदगी में आवश्यक कार्रवाई शुरू की गई। मामले में स्क्रैप उठान प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए गए।

    मामले की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी ने अपर जिलाधिकारी (प्रशासन) की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय जांच समिति गठित की है। समिति में मुख्य विकास अधिकारी, उप जिलाधिकारी बाजपुर, सहायक गन्ना आयुक्त तथा अधिशासी अभियंता (सिंचाई खंड, सितारगंज) को सदस्य बनाया गया है। समिति को पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर शीघ्र रिपोर्ट उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।

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    वहीं, प्रधान प्रबंधक एवं उप जिलाधिकारी डॉ. अमृता शर्मा ने स्क्रैप समिति के अध्यक्ष और मुख्य अभियंता को जारी निर्देश में कहा है कि जांच पूरी होने तक चीनी मिल से किसी भी प्रकार के स्क्रैप का उठान तत्काल प्रभाव से रोक दिया जाए। साथ ही किसी भी प्रकार की लापरवाही न बरतने के निर्देश भी दिए गए हैं।

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    गौरतलब है कि हाल के दिनों में चीनी मिल में स्क्रैप नीलामी और मूल्यवान सामग्री के निस्तारण को लेकर कर्मचारियों और किसान संगठनों ने भी आपत्ति जताई थी, जिसके बाद यह मामला लगातार चर्चा में बना हुआ है।