क्या आपको कोरियन ड्रामा पसंद है? सावधान 'फ्री ट्रायल' से खाली हो जाएगा खाता
इंटरनेट मीडिया पर 'फ्री ट्रायल' के लालच से साइबर ठगी का नया तरीका सामने आया है, जिसमें चीनी/कोरियाई ड्रामा क्लिप दिखाकर अनजान ऐप डाउनलोड करवाए जाते है ...और पढ़ें

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जागरण संवाददाता, रुद्रपुर। फेसबुक और इंस्टाग्राम जैसे इंटरनेट मीडिया प्लेटफार्म पर इन दिनों ''''फ्री-ट्रायल'''' का लालच देकर साइबर ठगी का नया तरीका तेजी से सामने आ रहा है।
चीनी और कोरियाई शार्ट ड्रामा के आकर्षक वीडियो क्लिप दिखाकर लोगों को अनजान मोबाइल एप डाउनलोड करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
जिसके बाद ट्रायल खत्म होते ही खाते से अपने आप धनराशि कटने लगती है। ऐसे में बिना पूरी जानकारी पढ़े किसी भी एप को भुगतान या आटो-पेमेंट की अनुमति देना आर्थिक नुकसान का कारण बन सकता है।
ये है साइबर ठगी का नया तरीका
इंटरनेट मीडिया प्लेटफार्म फेसबुक और इंस्टाग्राम पर इन दिनों चीनी और कोरियाई शार्ट ड्रामा के छोटे-छोटे वीडियो क्लिप लोगों को आकर्षित कर रहे हैं। इन क्लिप्स के जरिए उपयोगकर्ताओं को पूरा वीडियो देखने के लिए एक मोबाइल एप डाउनलोड करने का विकल्प दिया जाता है।
अधिकांश मामलों में शुरुआत में 'फ्री ट्रायल' का आफर दिखाया जाता है, जिससे लोग बिना शर्तें पढ़े एप इंस्टाल कर लेते हैं। एसएसपी एसटीएफ अजय सिंह ने बताया कि एप डाउनलोड करने के दौरान कई बार उपयोगकर्ताओं से आटो-पेमेंट, कार्ड या यूपीआई आधारित सब्सक्रिप्शन की अनुमति ले ली जाती है।
ट्रायल अवधि समाप्त होने के बाद संबंधित राशि स्वतः बैंक खाते या कार्ड से कटने लगती है। कई लोगों को इसकी जानकारी तब मिलती है, जब उनके खाते से भुगतान हो चुका होता है।
एसएसपी एसटीएफ अजय सिंह ने बताया कि केवल मोबाइल से एप हटाने से समस्या खत्म नहीं होती। यदि किसी एप के लिए आटो-डेबिट या सब्सक्रिप्शन सक्रिय हो चुका है, तो उसे संबंधित प्लेटफार्म, गूगल प्ले, एप स्टोर या यूपीआई एप में जाकर अलग से रद्द करना जरूरी होता है। ऐसा न करने पर निर्धारित अवधि के अनुसार खाते से लगातार राशि कटती रह सकती है।
ऐसे करें बचाव
- किसी भी 'फ्री ट्रायल' आफर की शर्तें और नियम ध्यान से पढ़ें।
- अनजान या संदिग्ध एप डाउनलोड करने से बचें।
- बिना आवश्यकता किसी भी एप को आटो-पेमेंट या कार्ड की अनुमति न दें।
- सब्सक्रिप्शन लिया है तो ट्रायल समाप्त होने से पहले उसे संबंधित प्लेटफार्म पर जाकर रद्द करें।
- किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत साइबर हेल्पलाइन या स्थानीय पुलिस को दें।
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