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    16 साल बाद जेल से छूटा, नई शुरुआत की उम्मीद में काशीपुर आया तो 'घिरा' कुख्यात गैंगस्टर

    Updated: Thu, 09 Jul 2026 11:35 AM (IST)

    16 साल जेल में बिताने के बाद नई जिंदगी शुरू करने काशीपुर आए कुख्यात गैंगस्टर योगेश भदौड़ा को गिरफ्तार कर लिया गया। ...और पढ़ें

    कुख्यात योगेश भदौड़ा को ले जाती यूपी पुलिस का पुराना फोटा। इंटरनेट

    कुख्यात योगेश भदौड़ा को ले जाती यूपी पुलिस का पुराना फोटा। इंटरनेट

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    अभिषेक रावत, काशीपुर । कहते हैं कि जुर्म का रास्ता चाहे कितना भी लंबा क्यों न हो, उसका अंत कानून के शिकंजे पर ही आकर होता है। उप्र के कुख्यात गैंगस्टर योगेश मलिक उर्फ भदौरिया उर्फ योगेश भदौड़ा की गिरफ्तारी की कहानी भी कुछ ऐसी ही है।

    सालों तक पुलिस के लिए सिरदर्द बना शातिर भदौरिया काशीपुर में अपने परिवार के साथ नई शुरुआत की उम्मीद लेकर आया था। यहां कदम रखते ही उसकी किस्मत ने दगा दे दिया।

    बेटे व बेटी को लेकर काशीपुर आ गई थी पत्नी

    पूछताछ में सामने आया कि योगेश 2010 से 2026 तक 16 साल उत्तर प्रदेश की सिद्धार्थनगर जेल में बंद था। इस अवधि के दौरान वह बाहरी दुनिया और अपराध के नए तौर-तरीकों से कट चुका था। जनवरी 2026 में वह जेल से छूटकर बाहर आया था। जब योगेश जेल में अपनी सजा काट रहा था, तब उप्र पुलिस की सख्ती व पारिवारिक सुरक्षा को देखते हुए उसकी पत्नी अपने बेटे व बेटी को लेकर उत्तराखंड के काशीपुर आ गई थी।

    यहां उन्होंने मानपुर रोड पर जमीन खरीदकर मकान बना लिया था। जनवरी में जेल से छूटने के बाद योगेश पहली बार काशीपुर आया था। वह गुपचुप तरीके से परिवार के साथ रह रहा था और पुलिस की नजरों से दूर रहने की कोशिश में था।

    खुद के ऊपर इनाम से भी था अनजान

    पूरे मामले का सबसे दिलचस्प पहलू पुलिस का वह दावा है, जिसमें कहा गया है कि योगेश भदौरिया को खुद यह अंदाजा नहीं था कि उप्र पुलिस की उस पर एक लाख रुपए का भारी-भरकम इनाम घोषित हो चुका है। उसके अनुसार वह अपने सभी मामले निपटाकर ही जेल से सजा काट कर रिहा हुआ था। पुलिस का कहना है कि पूछताछ में प्रतीत होता है कि लंबे समय तक जेल में रहने के कारण उसे सहारनपुर पुलिस द्वारा घोषित किए इनाम की भनक तक नहीं थी। वह निश्चिंत होकर यहां घूम रहा था।

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    एक मामले में किया था इनामी

    सूत्र बताते हैं कि 2010 के एक मामले में योगेश समेत चार अन्य लोगों पर प्राथमिकी हुई थी। जिसमें से अन्य तीन लोगों ने अपनी फाइल अलग कर ली थी। जिसमें योगेश का ही नाम रह गया था। योगेश की अलग फाइल खुली थी। जेल में बंद होने के कारण सहारनपुर पुलिस ने इस पर इनाम घोषित किया था।

    कौन है कुख्यात योगेश भदौड़ा?

    पश्चिमी उप्र के मेरठ के रोहटा क्षेत्र के भदौड़ा गांव का रहने वाला योगेश मलिक 90 के दशक के आखिरी सालों व 2000 के शुरुआती दशक में वेस्ट यूपी में 'ऊधम सिंह व योगेश भदौड़ा गैंग' की दुश्मनी के किस्से आम थे। योगेश का नाम उप्र सरकार की उस लिस्ट में शामिल है, जिसमें सूबे के 61 माफियाओं को नामजद किया गया है।

    मेरठ, बागपत व मुजफ्फरनगर के इलाकों में जमीन पर कब्जे, ठेकेदारी व वर्चस्व को लेकर भदौड़ा गैंग ने कई सनसनीखेज हत्याओं को अंजाम दिया था। इसके विरुद्ध हत्या, हत्या के प्रयास, रंगदारी के कुल 46 से अधिक मामले हैं। वेस्ट यूपी में एक समय इसके नाम का खौफ था।

    मां की हत्या के बाद अपराध में रखा कदम

    बात साल 1995 की है। गांव के एक मामूली से विवाद ने योगेश की जिंदगी बदल दी। उस वक्त गांव में योगेश के परिवार का अपने खानदान के ही दूसरे पक्ष के साथ नाली को लेकर विवाद चल रहा था। ये विवाद आगे चलकर झगड़े में तब्दील हो गया।

    मामला इतना बढ़ा की इस विवाद ने खूनी शक्ल अख्तियार कर ली और दूसरे पक्ष के लोगों ने ही योगेश की मां को गोली मारकर मौत के घाट उतार दिया। इसके बाद उसके एक भाई की भी हत्या कर दी गई। योगेश की जिंदगी में ये वारदात एक नया मोड लेकर आई। मां और भाई की हत्या के बाद योगेश बदले की आग में जल रहा था। उसका बाद योगेश ने सबसे पहले महेश प्रधान की गोली मारकर हत्या कर दी। महेश उसकी मां और भाई के कातिल वीरेंद्र का साथी था।

    एक के बाद एक कई कत्ल

    अब एक बात तो साफ हो चुकी थी कि योगेश भदौड़ा और वीरेंद्र के बीच खूनी जंग का आगाज़ हो चुका था। अभी पहले हुए हत्या की आग ठंडी भी नहीं पड़ी थी कि योगेश के विरोधी वीरेंद्र के भाई नरेश की भी गोली मार कर हत्या कर दी गई। महेश प्रधान और नरेश के कत्ल ने आग में घी डालने का काम किया।

    इसके बाद साल 2013 में गांव में कपिल और मोनू नाम के दो लोगों की हत्या कर दी गई। भदौड़ा गांव की पहचान अब खूनी होती जा रही थी। गांव में एक बाद एक सात से अधिक हत्याएं हो चुकी थीं. पूरा गांव दहशत में था पुलिस भी परेशान थी। लिहाजा, पुलिस ने तब इस मामले में कड़ी कार्रवाई की। उसी साल योगेश को पुलिस ने इसी मामले में गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। उस वक्त पुलिस ने उसके गैंग को डी-15 नाम दिया था। जिसका सरगना योगेश खुद ही था।

    गाजियाबाद कोर्ट में ऊधम सिंह पर की थी तबाड़तोड़ फायरिंग

    11 अक्टूबर 2012 को गाजियाबाद जिला अदालत परिसर में कुख्यात गैंगस्टर ऊधम सिंह पर दिनदहाड़े हमला हुआ था। पुलिस के अनुसार यह हमला योगेश भदौड़ा गिरोह ने ही किया था। दरअसल उधम सिंह को एक हत्या के मुकदमे में पेशी के लिए मेरठ जेल से गाजियाबाद कोर्ट लाया गया था। अदालत परिसर में वकीलों के कपड़े पहनकर पहुंचे हमलावरों ने उस पर गोलियां चला दीं। उधम सिंह गोली लगने से घायल हो गया, जबकि फायरिंग में अन्य लोग भी घायल हुए।

    पुलिस के अनुसार हमले की योजना योगेश भदौड़ा ने बनाई थी। पहचान छिपाने के लिए उसने नकली दाढ़ी-मूंछ, चश्मा और टोपी का इस्तेमाल किया था। जवाबी कार्रवाई में पीएसी जवानों ने भी फायरिंग की। दो हमलावर पकड़े गए, जबकि योगेश भदौड़ा मौके से फरार हो गया था। दोनों गिरोहों की दुश्मनी लगभग 18 वर्ष पुरानी थी। रिपोर्टों में कहा गया कि 2006 में उधम सिंह पर भदौड़ा गिरोह के प्रमुख प्रमोद भदौड़ा की हत्या का आरोप था, जिसके बाद संघर्ष और बढ़ गया।

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