उत्तराखंड की शाम्भवी ने UPSC Exam में रचा इतिहास, एक वर्ष में ही लगाई 445 से 46वीं रैंक की छलांग
किच्छा की शाम्भवी तिवारी ने एक साल में यूपीएससी में 445वीं से 46वीं रैंक हासिल कर इतिहास रचा है। ...और पढ़ें

किच्छा की शाम्भवी तिवारी ने यूपीएसई परीक्षा में प्राप्त की 46 वीं रैंक।

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संदीप जुनेजा, किच्छा (उधम सिंह नगर)। बसंत गार्डन निवासी शाम्भवी तिवारी ने एक वर्ष में ही ऊंची छलांग लगा यूपीएसई में 445 रैंक से 46वीं रैंक प्राप्त कर इतिहास रचा है।
जीबी पंत विश्वविद्यालय पंतनगर की गोल्ड मेडलिस्ट शाम्भ्वी का विगत वर्ष यूपीएसई में चयन होने के उपरांत आइआरएस आवंटित हुआ था। परंतु 445 वीं रैंक प्राप्त करते समय ही उसने आइएएस बनने की जो अपनी इच्छा व्यक्त की थी।
उसके लिए अधिक इंतजार नहीं करना पड़ा और एक ही वर्ष में यह कीर्तिमान प्राप्त कर उत्तराखंड का नाम रोशन किया। परिणाम आने के बाद शाम को शांभवी ने मंदिर में जाकर एक घंटे पूजा की।
शाम्भवी तिवारी ने इंटर की परीक्षा 2017 में कैंपस स्कूल पंतनगर से पास करने के बाद जीबी पंत विश्वविद्यालय से बीटेक की परीक्षा गोल्ड मेडल के साथ 2021 में पास की थी।
शाम्भवी के पिता सुशील तिवारी गुरुनानक इंटर कालेज में प्रवक्ता व मां निवेदिता अवस्थी राजकीय महाविद्यालय नानकमत्ता में एसोसिएट प्रोफेसर के पद पर कार्यरत है।
वहीं शाम्भवी के नाना डा. आरपी अवस्थी पंतनगर विश्वविद्यालय से प्रोफेसर के पद से सेवानिवृत हैं। अप्रैल 2025 में यूपीएसई परीक्षा के परिणाम घोषित हुए तो शाम्भवी ने 445वीं रैंक प्राप्त किया तो उसे आइआरएस आवंटित हुआ।
परंतु उसने अपनी तैयारी को विराम नहीं दिया और ट्रेनिंग के दौरान अपनी तैयारी जारी रखी और पूरे जोश के साथ परीक्षा दी और शुक्रवार को जब परिणाम घोषित हुए तो शाम्भवी ने चार सौ अंकों की ऊंची छलांग लगाते हुए 46वीं रैंक प्राप्त कर अपनी दृढ़ इच्छा शक्ति को परिणाम में बदलने पर मजबूर करने का संदेश दे दिया।
शाम्भवी ने बताया उसने आईएएस में उत्तराखंड कैडर ही भरा है और व मजबूत व सक्षम उत्तराखंड के लिए अपनी सेवाएं देना चाहती है।
पहले एटेम्प्ट में सीसैट में महज एक अंक से चूकी थीं
शांभवी ने 2021 में ग्रेजुएशन पूरा होते ही तैयारी शुरू कर दी थी। 2023 में पहले प्रयास में प्रीलिम्स के सीसैट पेपर में महज एक अंक से चूक गईं।
लेकिन इस असफलता से सीख लेकर 2024 में मजबूती से वापसी की और एआइआर 445 हासिल किया। हालांकि वह इससे भी संतुष्ट नहीं थीं और अपना प्रयास जारी रखा और नतीजा सामने है।
सेल्फ-स्टडी पर जोर, इंटरनेट मीडिया से बनाए रखी दूरी
शांभवी ने बताया कि उन्होंने दिल्ली या प्रयागराज जाने की बजाय घर पर ही तैयारी की। बिना कोई कोचिंग लिए यूट्यूब और इंटरनेट पर उपलब्ध सामग्री से तैयारी की।
टपर्स नोट्स देखने के साथ अपना बनाती रहीं। करंट अफेयर्स के लिए अखबर और वेबसाइट पढ़ती रहीं।
शांभवी ने कहा की 8-12 घंटे की कंसिस्टेंट पढ़ाई की। फेसबुक, इंस्टाग्राम जैसे इंटरनेट मीडिया से दूरी बनाए रखी, ताकि डिस्ट्रैक्शन न हो।
शांभवी के तैयारी के टिप्स
- प्रीलिम्स : सीसैट की कमजोरी दूर करने के लिए ज्यादा प्रैक्टिस पेपर्स और पिछले वर्षों के प्रश्न हल किए। नेगेटिव मार्किंग से बचने के लिए माक टेस्ट पर फोकस किया।
- मेन्स : आप्शनल सब्जेक्ट एन्थ्रोपोलाजी चुना, क्योंकि सिलेबस छोटा, स्कोरिंग और उनके साइंटिफिक बैकग्राउंड से मैच करता है। GS पेपर्स में स्टैंडर्ड सोर्स और रोजाना 2-3 उत्तर लेखन की प्रैक्टिस करती रही। एस्से में वैल्यू-बेस्ड स्ट्रक्चर अपनाया।
- इंटरव्यू : पहला इंटरव्यू होने के कारण कई माक दिए। 3-4 माक से फीडबैक लेकर सुधार किया। कान्फिडेंस, क्लियर कम्युनिकेशन और बैलेंस्ड व्यू पर जोर दिया।
सेल्फ और फोकस्ड स्टडी करें, कोचिंग की जरूरत नहीं
शांभवी ने कहा, अगर आप देश के किसी भी कोने में रहते हैं, तो लाखों रुपये खर्च करने की जरूरत नहीं। घर बैठे इंटरनेट से पूरी सामग्री इकट्ठा कर पढ़ाई कर सकते हैं।
टेलीग्राम पर टापर्स नोट्स फ्री मिल जाते हैं। उन्होंने पहली बार सीसैट की एक मार्क वाली गलती से सीख ली और कमजोर क्षेत्र पर ज्यादा मेहनत की।
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