उत्तराखंड के रुद्रपुर में गंभीर जल संकट, 150 हैंडपंप सूखे
उत्तराखंड के रुद्रपुर में गंभीर जल संकट गहरा गया है, जहां 572 में से 150 हैंडपंप सूख गए हैं और भूजल स्तर में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है। ...और पढ़ें


समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
जागरण संवाददाता, रुद्रपुर। जल संरक्षण के प्रयास कागजों में भले तेज हों, लेकिन धरती की कोख की रिपोर्ट कुछ आैर ही कह रही है। रुद्रपुर नगर निगम क्षेत्र में लगे 572 हैंडपंपों में से 150 हैंडपंपों ने पानी देना छोड़ दिया है। इस रिपोर्ट से निगम के अभियंता भी हैरान हैं, वे गिरते वाटर लेवल को इसका कारण मान रहे हैं।
302 हैंडपंप की रिपोर्ट अभी सही है, यह लगातार पानी दे रहे हैं। इन 572 हैंडपंपों में 120 हैंडपंप ऐसे भी हैं जिन्हें हाईवे चौड़ीकरण के कारण हटाया जाना है। इसकी तैयारी हो चुकी है। वहीं 120 हैंडपंप सड़क चौड़ीकरण और अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई में उखाड़ दिए गए हैं। ऐसे में 40 वार्डों में केवल 302 हैंडपंप ही लोगों की प्यास बुझा रहे हैं।
स्थिति सिर्फ आंकड़ों तक सीमित नहीं है। जिन बस्तियों में जल जीवन मिशन की पाइप लाइन नहीं पहुंची या जलापूर्ति नियमित नहीं है, ऐसे में वहां लोगों हैंडपंप ही लोगों के लिए जीवनरेखा हैं। अब इनके सूखने से लोगों को पीने के पानी के लिए भटकना पड़ रहा है। कई इलाकों में महिलाओं और बुजुर्गों को दूर तक पानी भरने जाना पड़ रहा है।
क्या नीचे खिसक रहा है भूजल स्तर?
विशेषज्ञ मानते हैं कि तराई क्षेत्र होने के कारण रुद्रपुर में भूजल स्तर सामान्यतः बेहतर रहता है, लेकिन यदि बड़ी संख्या में हैंडपंप पानी देना बंद कर दें तो इसे सामान्य नहीं माना जा सकता। यह संकेत है कि लगातार भूजल दोहन, बढ़ते कंक्रीटीकरण, वर्षा जल के समुचित संरक्षण की कमी और रिचार्ज व्यवस्था कमजोर होने से जलस्तर प्रभावित हो रहा है।
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सबसे ज्यादा खराब हैंडपंप ट्रांजिट कैंप में
रुद्रपुर के ट्राजिंट कैंप एवं रम्पुरा क्षेत्र में ज्यादा हैंडपंप खराब है। दूसरी ओर, सड़क चौड़ीकरण और अन्य परियोजनाओं में 120 हैंडपंप उखाड़ दिए गए, लेकिन उनके स्थान पर वैकल्पिक हैंडपंप लगाने की कोई ठोस योजना नजर नहीं आती।
जल संरक्षण के दावों की खुल रही पोल
हर साल करोड़ों रुपये जल संरक्षण, अमृत सरोवर, वर्षा जल संचयन और पेयजल योजनाओं पर खर्च किए जाते हैं। इसके बावजूद यदि शहर के एक-चौथाई से अधिक हैंडपंप सूख जाएं तो यह योजनाओं की जमीनी हकीकत पर गंभीर सवाल खड़े करता है। शहर के लोग पूछ रहे हैं कि जब मौजूदा जल स्रोत ही नहीं बचाए जा सके तो भविष्य में बढ़ती आबादी की प्यास कैसे बुझेगी?
साल दर साल गिर रहा जलस्तर
सामान्य जल का औसत भूजल स्तर
- 2021- 17 फीट
- 2022- 18.5 फीट
- 2023- 20 फीट
- 2024- 22.5 फीट
- 2025- 24.5 फीट
पीने योग्य पानी का औसत भूजल स्तर
- 2021 -70 फीट
- 2022 -75 फीट
- 2023 -80 फीट
- 2024 -85 फीट
- 2025 -90 फीट
हमारे क्षेत्र का हैंडपंप पिछने चार साल से खराब पड़ा है। कई बार शिकायत की, लेकिन अभी तक रिबोर नहीं हुआ। पानी के लिए दूर जाना पड़ता है। - बेबी, निवासी, शिवनगर
गर्मी और बारिश दोनों मौसम में पानी की परेशानी बनी रहती है। हैंडपंप बंद होने से लोगों को टैंकर या दूसरे मोहल्लों के हैंडपंपों पर निर्भर रहना पड़ रहा है। - प्रवेश कुमार गंगवार, निवासी, ट्रांजिट कैँप
नगर निगम को खराब पड़े हैंडपंपों का जल्द रिबोर कराना चाहिए और जहां अतिक्रमण के कारण हैंडपंप हटाए गए हैं, वहां नए हैंडपंप लगाने चाहिए, ताकि लोगों को स्वच्छ पेयजल मिल सके। - चेतराम राठौर, निवासी शिवनगरघटते जल स्तर के चलते हैंडपंपों से पानी निकलना बंद हो गया है। जल्द ही हैंडपंपों को रिबोर कराया जाएगा। जिससे की जनता का स्वच्छ जल उपलब्ध हो सके। -भरत सिंह डांगी, अधिशासी अभियंता, सिचाई विभाग