उत्तराखंड समेत देश के सात राज्यों में कम बारिश से चिंता, दो दिन बाद फिर एक्टिव होगा मानसून
उत्तराखंड समेत उत्तर-पश्चिम के सात राज्यों में इस बार मानसून की कम वर्षा चिंता का विषय बनी हुई है, जिससे खरीफ की फसलें प्रभावित हो सकती हैं। ...और पढ़ें

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समय कम है?
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जागरण संवाददाता, काशीपुर। अलनीनो प्रभावित मानसून में इस बार कम वर्षा चिंता का सबब बन सकती है। मानसून में अब तक उत्तराखंड समेत उत्तर पश्चिम के सात प्रदेशों में सामान्य से कम वर्षा देखने को मिली है। जम्मू-कश्मीर व लद्दाख ही दो प्रदेश हैं जहां सामान्य से अधिक वर्षा हुई है।
प्रदेश में सामान्य से छह प्रतिशत कम वर्षा हुई है। आगे मानसून कैसा रहेगा इस पर भी स्थितियां निर्भर करेंगी। प्रदेश में खरीफ फसल मानसूनी वर्षा पर निर्भर करती है। पर्वतीय भूभाग वाले प्रदेश में मडुवा, झंगोरा के साथ ही दलहनी फसलों को मानसून से संजीवनी मिलती है। सोयाबीन, गहत, तिल, उड़द आदि की खेती भी मौसम पर ही निर्भर करती है।
मानसून सक्रिय होने की संभावना
पिछले दो वर्षों में अच्छी मानसूनी वर्षा होने से मडुवा की अच्छी पैदावार हुई थी। पिछले वर्ष प्रदेश के किसानों ने 26 करोड़ रुपये से अधिक का मडुवा बेचा था। मौसम विभाग के अनुसार 27 से 30 जुलाई के बीच मानसून सक्रिय होने की संभावना है। इस अवधि में प्रदेश के अधिकांश स्थानों पर हल्की से मध्यम से लेकर कहीं कहीं भारी वर्षा तक होने का अनुमान है।
राज्य मौसम विज्ञान केंद्र के निदेशक डा. सीएस तोमर ने बताया कि ऐसे में जुलाई अंत तक प्रदेश में वर्षा का स्तर सामान्य के आसपास रह सकता है। कृषि विज्ञानी धनपत कुमार का कहना है कि पूरे मानसून काल में कम वर्षा होने पर खेती पर असर पड़ना स्वाभाविक है।
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प्रदेश के सात जिलों में कम वर्षा
बारिश में इस बार असमानता दिखी है। छह जिलों में सामान्य से कम व सात में अधिक वर्षा देखी गई है। चंपावत, पौड़ी, नैनीताल व रुद्रप्रयाग जिलों में सामान्य से 30 प्रतिशत या उससे अधिक की कमी है। ऐसे में यहां स्थिति अधिक चिंता वाली है।
उत्तरकाशी, पिथौरागढ़, देहरादून में 13 प्रतिशत या उससे कम का अंतर है। ऐसे में यहां अच्छी बारिश मिलने से कुछ बहुत भरपाई की उम्मीद है। दूसरी ओर बागेश्वर में सामान्य से दोगुना से अधिक वर्षा हुई है। अधिक वर्षा या कम समय में ज्यादा बारिश भी कई बार दुश्वारी लेकर आती है।
उत्तर-पश्चिमी प्रदेशों में मानसूनी वर्षा (मिलीमीटर में)
- प्रदेश वास्तविक - सामान्य - कमी/अधिकता (प्रतिशत में)
- उत्तर प्रदेश -234.8 -289.5 - -19
- उत्तराखंड -464.6 -491.7 - -6
- हरियाणा -128.9 -166.3 - -23
- चंडीगढ़ -247.5 -351.9 - -30
- दिल्ली -180.5 -204.3 - -12
- पंजाब -115.2 -174.8 - -34
- हिमाचल -258.6 -285.2 - -9
- जम्मू-कश्मीर -249.2 -205.3 - 21
- लद्दाख -26.3 - 9.9 -166
(नोट : आंकड़े एक जून से 23 जुलाई तक)