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    उत्तराखंड में AI वाली गोशाला, जहां गायों की सेहत पर रहती है 'स्मार्ट नजर'

    Updated: Fri, 17 Jul 2026 09:31 AM (IST)

    बाजपुर की मधुबन गोशाला उत्तराखंड की पहली एआई-आधारित स्मार्ट कम्युनिटी डेयरी बनी है, जहाँ सेंसर से गायों की सेहत पर 'स्मार्ट नजर' रखी जाती है। ...और पढ़ें

    बाजपुर की मधुबन गोशाला बनी उत्तराखंड की पहली एआई आधारित स्मार्ट कम्युनिटी डेयरी। जागरण

    बाजपुर की मधुबन गोशाला बनी उत्तराखंड की पहली एआई आधारित स्मार्ट कम्युनिटी डेयरी। जागरण

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    जागरण संवाददाता, रुद्रपुर । गाय चारा कम खा रही है...जुगाली घट गई है... हीट साइकिल शुरू होने वाली है...या फिर बीमारी का खतरा मंडरा रहा है...। यह जानकारी अब किसी पशु चिकित्सक के पहुंचने का इंतजार नहीं करती। बल्कि एक छोटा-सा सेंसर और मोबाइल पर आने वाला अलर्ट गोपालक को पहले ही सब कुछ बता देता है।

    बाजपुर ब्लाक की ग्राम पंचायत हरसान स्थित मधुबन गोशाला में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ने पशुपालन की परंपरागत तस्वीर बदल दी है। यहां तकनीक सिर्फ मशीन नहीं, बल्कि महिलाओं के लिए आत्मनिर्भरता का नया हथियार बन चुकी है।

    एआई आधारित स्मार्ट कम्युनिटी डेयरी

    उत्तराखंड की पहली एआई आधारित स्मार्ट कम्युनिटी डेयरी आज यह साबित कर रही है कि गांवों की प्रगति अब डिजिटल तकनीक और महिला नेतृत्व के साथ नई ऊंचाइयों को छूने की तैयारी में है। दानू स्वयं सहायता समूह की महिलाओं की ओर से संचालित यह डेयरी आइएफएडी-वित्तपोषित ग्रामोत्थान (रीप) परियोजना के सहयोग से विकसित की गई है।

    इसका उद्देश्य केवल दूध उत्पादन बढ़ाना नहीं, बल्कि वैज्ञानिक पशुपालन को गांवों तक पहुंचाना भी है। सीडीओ दिवेश शाशनी के निर्देशन, परियोजना निदेशक डीआरडीए हिमांशु जोशी और जिला परियोजना प्रबंधक ग्रामोत्थान (रीप) की देखरेख में यह माडल तैयार हुआ है, जिसे अब अन्य क्षेत्रों में भी अपनाने की तैयारी चल रही है।

    एआई ने संभाली पशुओं की डिजिटल पहरेदारी

    मधुबन गोशाला की सबसे बड़ी विशेषता इसका एआई आधारित स्मार्ट कैटल हेल्थ मानिटरिंग सिस्टम है। प्रत्येक गाय और भैंस के गले में लगाया गया स्मार्ट सेंसर दिन-रात उसकी गतिविधियों का विश्लेषण करता है।

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    सेंसर जुगाली, भोजन, चलना-फिरना, आराम, हीट साइकिल और स्वास्थ्य संबंधी बदलावों का डेटा जुटाकर एआई के माध्यम से उसका विश्लेषण करता है। जैसे ही किसी पशु के व्यवहार में असामान्यता दिखाई देती है, मोबाइल एप पर तुरंत अलर्ट पहुंच जाता है। इससे बीमारी का शुरुआती चरण में ही पता चल जाता है और समय पर इलाज संभव हो पाता है।

    बीमारी कम हुई, दूध और मुनाफा दोनों बढ़े

    स्वयं सहायता समूह के सदस्य बताते हैं कि पहले पशुओं के बीमार होने का पता तब चलता था, जब दूध उत्पादन कम हो जाता था। अब बीमारी की आशंका पहले ही सामने आ जाती है। इस तकनीक से पशुओं का स्वास्थ्य बेहतर होता दिख रहा है।

    उपचार पर होने वाला खर्च कम हुआ है। हीट डिटेक्शन अधिक सटीक हुआ। गर्भधारण की सफलता दर बढ़ी। दूध उत्पादन में निरंतरता आई है। बेहतर स्वास्थ्य प्रबंधन के कारण गोशाला को हर महीने लगभग 10 से 12 हजार रुपये की अतिरिक्त बचत होने लगी है।

    45 लीटर दूध से लाखों का कारोबार

    आज मधुबन गोशाला प्रतिदिन लगभग 45 लीटर दूध का उत्पादन कर रही है। इससे हर महीने करीब 45 हजार रुपये की आय हो रही है और वार्षिक कारोबार 5.40 लाख रुपये तक पहुंच चुका है। वर्तमान में समूह को लगभग 10,250 रुपये प्रतिमाह शुद्ध लाभ हो रहा है। बैंक ऋण समाप्त होने के बाद यही लाभ बढ़कर लगभग 23,750 रुपये प्रतिमाह होने का अनुमान है।

    महिलाएं बनीं डिजिटल डेयरी मैनेजर

    इस परियोजना का सबसे बड़ा परिवर्तन महिलाओं की भूमिका में दिखाई देता है। जो महिलाएं पहले केवल पशुओं की देखभाल करती थीं, वे अब मोबाइल एप संचालित कर रही हैं, डिजिटल रिकार्ड तैयार कर रही हैं, एआई से मिलने वाले आंकड़ों का विश्लेषण कर रही हैं और वैज्ञानिक तरीके से डेयरी प्रबंधन कर रही हैं। तकनीक ने न केवल उनकी आय बढ़ाई है, बल्कि आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता और निर्णय लेने की शक्ति भी मजबूत की है।

    हरा चारा बना कम लागत का आधार

    गो पालन में जुटे समूह के सदस्यों ने तीन बीघा भूमि लीज पर लेकर हरे चारे की खेती शुरू की है। इससे पशुओं को बेहतर पोषण मिल रहा है और बाजार से चारा खरीदने पर होने वाला खर्च भी काफी कम हुआ है। उत्पादन लागत घटने से डेयरी का लाभ लगातार बढ़ रहा है।

    अब लक्ष्य सिर्फ दूध नहीं, ब्रांड बनाना है: हेमा बिष्ट

    दानू स्वयं सहायता समूह की अध्यक्ष हेमा विष्ट कहती हैं कि अब डेयरी को अगले स्तर पर ले जाने की तैयारी में है। भविष्य की योजना में पशुओं की संख्या बढ़ाना, एआई प्रणाली का विस्तार करना, घी, दही और पनीर जैसे मूल्यवर्धित उत्पाद तैयार करना तथा बड़े डेयरी नेटवर्क और संगठित बाजारों से जुड़ना शामिल है।

    मधुबन गोशाला की सफलता के पीछे दानू स्वयं सहायता समूह की महिलाओं की मेहनत और सामूहिक नेतृत्व है। समूह से जुड़ी दीपा, विमला देवी, सुचित, माया, ज्योति, देवकी देवी, देवकी और मुन्नी जवरा खातून वर्षों से पशुपालन को आजीविका का माध्यम बनाए हुए हैं।

    मधुबन स्मार्ट कम्युनिटी डेयरी

    • स्थान - ग्राम हरसान, विकासखंड बाजपुर

    • संचालन - दानू स्वयं सहायता समूह
    • परियोजना - आईएफएडी वित्तपोषित रीप
    • कुल लागत - 10 लाख रुपये
    • वित्तीय संरचना - छह लाख परियोजना सहायता, 3 लाख बैंक ऋण, 1 लाख समूह अंशदान
    • वर्तमान पशु - 5 गाय, 1 भैंस
    • एआई सेंसर - प्रति पशु लगभग 6500 रुपये
    • दैनिक दूध उत्पादन - 45 लीटर
    • मासिक आय - लगभग 45,000 रुपये
    • वार्षिक कारोबार - 5.40 लाख रुपये

    मधुबन गोशाला उत्तराखंड में ग्रामीण नवाचार और महिला सशक्तीकरण का उत्कृष्ट उदाहरण है। एआई आधारित स्मार्ट डेयरी माडल से पशुओं के स्वास्थ्य की वैज्ञानिक निगरानी संभव हुई है, जिससे उत्पादन बढ़ा है और पशुपालकों की आय में भी सुधार आया है। हमारा प्रयास है कि इस माडल को जिले के अन्य स्वयं सहायता समूहों तक भी पहुंचाया जाए, ताकि अधिक से अधिक ग्रामीण महिलाएं आधुनिक तकनीक का लाभ लेकर आत्मनिर्भर बन सकें। – दिवेश शाशनी, सीडीओ, ऊधम सिंह नगर

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