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    यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Sep 04, 2024 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

    उत्तरकाशी में वरुणावत पर्वत पर फिर भूस्खलन, लगातार बारिश बन रही आफत; 50 परिवारों ने छोड़ा अपना घर

    Updated: Wed, 04 Sep 2024 06:25 AM (IST)

    उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में मंगलवार रात लगातार तीन घंटे तक हुई वर्षा के बाद वरुणावत पर्वत पर एक बार फिर भूस्खलन होने लगा। 45 मिनट के अंतराल में पह ...और पढ़ें

    उत्तरकाशी में वरुणावत पर्वत पर फिर भूस्खलन, लगातार बारिश बन रही आफत
    उत्तरकाशी में वरुणावत पर्वत पर फिर भूस्खलन, लगातार बारिश बन रही आफत

    HighLights

    1. मंगलवार रात मूसलधार वर्षा के बाद 45 मिनट में पांच बार हुआ भूस्खलन
    2. मस्जिद मोहल्ला, जल संस्थान कालोनी आदि क्षेत्रों में फैली दहशत

     जागरण संवाददाता, उत्तरकाशी। उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में मंगलवार रात लगातार तीन घंटे तक हुई वर्षा के बाद वरुणावत पर्वत पर एक बार फिर भूस्खलन होने लगा। 45 मिनट के अंतराल में पहाड़ी से पांच बार भूस्खलन हुआ। बड़ी मात्रा में पत्थर और मलबा गिरने से मस्जिद मोहल्ला, जल संस्थान कालोनी और गोफियारा क्षेत्र में दहशत फैल गई।

    50 परिवारों ने सुरक्षित स्थानों पर शरण ली

    लगभग 50 परिवार आनन-फानन घरों से भागे और सुरक्षित स्थानों पर शरण ली। घटना की जानकारी मिलते ही जिला आपदा प्रबंधन सक्रिय हो गया। जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी देवेंद्र पटवाल, अपर जिलाधिकारी रजा अब्बास, उप जिलाधिकारी बृजेश कुमार तिवारी तत्काल जिला आपदा परिचालन केंद्र में पहुंचे और हालात का जायजा लिया।

    खतरे की आशंका को देखते हुए भटवाड़ी रोड पर पुलिस ने करीब एक घंटे तक यातायात रोके रखा। क्षेत्र में एक सप्ताह से रुक-रुककर भूस्खलन हो रहा है।

    लोगों को किया जा रहा सचेत

    जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी देवेंद्र पटवाल ने बताया कि भूस्खलन में किसी प्रकार की जन-धन की हानि नहीं हुई है। भूस्खलन के खतरे से आशंकित परिवारों को पूर्व में ही धर्मशाला एवं रिश्तेदारों के यहां भेजा जा चुका है।

    50 परिवारों को भवन खाली करने के लिए नोटिस

    प्रशासन ने भूस्खलन प्रभावित क्षेत्र में खतरे के दृष्टिगत 50 परिवारों को भवन खाली करने के लिए नोटिस दिया है। हालांकि, मंगलवार को केवल नौ परिवारों ने ही भवन खाली करने की जानकारी प्रशासन को दी। प्रशासन ने प्रभावित परिवारों के रहने के लिए दो धर्मशाला में 10-10 कमरों की व्यवस्था भी की है।