उत्तरकाशी में कांवड़ यात्रा का उत्साह, आठ दिन में पहुंचे 35 हजार से ज्यादा श्रद्धालु
उत्तरकाशी में कांवड़ यात्रा पूरे जोर पर है, जहां पिछले आठ दिनों में 35 हजार से अधिक कांवड़ यात्री पहुंचे हैं। ...और पढ़ें
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गंगोत्री धाम स्थित गंगा घाट पर कांवड़ यात्रियों की भीड़
HighLights
आठ दिन में 35 हजार से अधिक कांवड़ यात्री पहुंचे।
गंगोत्री और गोमुख से पवित्र गंगाजल भर रहे श्रद्धालु।
प्रशासन ने यात्रियों की सुविधा व सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए।
जागरण संवाददाता, उत्तरकाशी। उत्तरकाशी जनपद में कांवड़ यात्रा जोरों पर हैं। प्रतिदिन करीब 100 से अधिक कांवड़ यात्री पवित्र गंगा जल भरने के लिए गंगोत्री से गोमुख तक की यात्रा कर रहे हैं। वहीं, पिछले छह दिनों की बात करें तो यहां 35 हजार से अधिक कांवड़ यात्री पहुंच चुके हैं।
दरअसल, चारधाम यात्रा का प्रथम चरण शुरू के दो तीन माह चलने के बाद सावन माह में यहां कांवड़ यात्रा शुरू होती है। वर्तमान में भी सावन माह में कांवड़ यात्रा अपने चरम पर है, जिसमें बड़ी संख्या में कांवड़ यात्री दुपहिया व चौपहिया वाहनों से गंगोत्री व यमुनोत्री धाम पहुंच रहे हैं।
जनपद आपातकालीन परिचालन केंद्र से मिली जानकारी के अनुसार जनपद में 30 जुलाई से 6 अगस्त तक आठ दिन में 35189 कांवड़ यात्री पहुंचे हैं, इनमें 33783 पुरुष व 1169 महिलाएं तथा 238 बच्चे शामिल रहे। वहीं, गत 6 अगस्त की बात करें तो एक दिन में ही यहां 8719 कांवड़ यात्री पहुंचे।
कांवड़ यात्री न सिर्फ गंगोत्री धाम से जल भर रहे हैं, बल्कि गंगोत्री से गोमुख जाने वाले ट्रेक रूट के जरिए गंगा के उद्गम स्थल से भी जलभर कर ला रहे हैं। गंगोत्री नेशनल पार्क के कनखू बैरियर में तैनात वन दरोगा राजबीर सिंह रावत ने बताया कि प्रतिदिन गोमुख ट्रैक पर 150 ही यात्रियों को पैदल आवाजाही की अनुमति है।
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6 अगस्त को 148 कांवड़ यात्रियों ने गोमुख की यात्रा की। बताया कि यहां पहुंचने वाले यात्रियों की संख्या 140 से 150 के मध्य रह रही है। इधर, डीएम प्रशांत आर्य ने बताया कि कांवड़ यात्रियों की सुविधा व सुरक्षा में कोई कमी न रहे, इसके लिए मार्ग पर यातायात, पेयजल, स्वास्थ्य आदि सभी व्यवस्थाएं चाक-चौबंद रखी गई है।
पुराने पैदलमार्गों से मिनटों में तय कर रहे कई किमी दूरी
गंगोत्री व गोमुख से जल भरकर यात्रा ला रहे कांवड़ यात्री गंगोत्री हाईवे सुक्की टॉप क्षेत्र में चारधाम यात्रा के पुराने पैदल मार्गों का इस्तेमाल कर रहे हैं। हालांकि ये पगडंडी नुमा ये रास्ते खड़ी चढ़ाई व तीव्र ढाल वाले होने के चलते आवागमन की दृष्टि से बेहद कठिन है। लेकिन कांवड़ यात्री इन रास्तों का इस्तेमाल कर घंटों में तय होने वाली कई किमी की दूरी को मिनटों में तय कर रहे हैं। इससे पैदल कांवड़ यात्रियों को समय की भी बचत हो रही है।