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    चारधाम यात्रा: इस धाम में गर्म और ठंडे पानी के कुंडों का संगम, प्रकृति के सुंदर नजारे मोह लेंगे मन

    Updated: Wed, 20 May 2026 12:56 PM (IST)

    कालिंदी पर्वत की तलहटी में स्थित यमुनोत्री धाम गर्म और ठंडे पानी के कुंडों का अद्भुत संगम है, जिसमें सप्तऋषि, सूर्यकुंड और गौरीकुंड का विशेष महात्म्य ...और पढ़ें

    सप्तऋषि कुंड, सूर्यकुंड और गौरी कुंड का है विशेष महात्म्य। जागरण

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    जागरण संवाददाता, उत्तरकाशी। प्रकृति के अप्रतिम नजारों के बीच कालिंदी पर्वत की तलहटी में बसे यमुनोत्री धाम की महिमा निराली है। इस धाम में गर्म और ठंडे पानी के कुंडों का अद्भुत संगम है।

    सूर्यकुंड में मंदिर के निकट चट्टान के गर्भ से जहां गर्म जल आता है। वहीं, गौरी कुंड का जल ज्यादा गर्म नहीं होता, इसी जल में श्रद्धालु स्नान करते हैं। चारधामों में प्रथम यमुनोत्री धाम समुद्रतल से 10804 फीट की ऊंचाई पर स्थित है।श्

    कुंडों का अद्भुत संगम

    यमुनोत्री मंदिर के तीर्थ पुरोहित और सह सचिव गौरव उनियाल बताते है कि पुराणों में यमुनोत्री के साथ असित ऋषि की कथा जुड़ी हुई हैं। कहते हैं कि वृद्धावस्था के कारण ऋषि कुंड में स्नान करने के लिए नहीं जा सके तो उनकी श्रद्धा व भक्ति देख मां यमुना उनकी कुटिया में ही प्रकट हो गईं। कालांतर में यही स्थान यमुनोत्री धाम के रूप में प्रसिद्ध हुआ। इस धाम में गरम और ठंडे पानी के कुंडों का अद्भुत संगम देखने को मिलता है।

    धाम में जल की गरम और नरम धारा के तीन कुंडों सप्तऋषि कुंड, सूर्यकुंड व गौरीकुंड का विशेष महात्म्य है। सप्तऋषि कुंड यमुनाजी के उद्गम ग्लेशियर के जल और गंधक के गर्म जल से भरा रहता है। मान्यता कि इसमें स्नान करने से सकल मनोरथ पूर्ण हो जाते हैं। इसी तरह, सूर्यकुंड में मंदिर के निकट चट्टान के गर्भ से गर्म जल निकलकर आता है।

    धाम में

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    स्थित तीसरे कुंड गौरीकुंड का जल अधिक गर्म नहीं है और इसी जल में अधिकांश श्रद्धालु स्नान करते हैं। कुंड में स्नान करने के बाद श्रद्धालु दिव्य शिला की पूजा-अर्चना करके यमुनाजी के दर्शन करते हैं। इसी का विशेष महत्व भी है। देखा जाए तो यह कुंड यमुनोत्री धाम को कुदरत की अनुपम भेंट है। यमुनोत्री धाम जाने वाला छह किलोमीटर लंबा खड़ी चढ़ाई वाला दुर्गम मार्ग भी खासा रोमांच पैदा करता है। मार्ग की थकान के बाद इन कुंडों में स्नान करने से यात्री की सारी थकान काफूर हो जाती है।

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    सूर्यकुंड के गर्म जल में पके चावल होते हैं मां यमुना का प्रसाद

    सूर्यकुंड का जल इतना गर्म होता है कि इसमें चावल से भरी पोटली डालो तो वह पक जाते हैं। पके हुए चावल को ही श्रद्धालु यहां प्रसाद के रूप में घर ले जाते हैं। यही कुंड में पके चावल यमुनाजी का प्रसाद भी माना जाता है।

    कुंड में स्नान से दूर होती है यात्रा की थकान

    छह किमी पैदल दूरी पर स्थित यमुनोत्री धाम की यात्रा बेहद कठिन मानी जाती है। नौ कैंची व 18 कैंची नुमा रास्तों की खड़ी चढ़ाई के दौरान यात्री थक कर चूर हो जाते हैं, लेकिन जब वह सप्तऋषि व गौरी कुंड के जल में स्नान करते हैं तो उनकी यात्रा की थकान पलभर में काफूर हो जाती है।