पश्चिम बंगाल: गंगासागर में स्नान के लिए 47 बांग्लादेशी हिंदुओं ने की घुसपैठ, गुम हुआ बेटा तो खुला राज
पश्चिम बंगाल में गंगासागर स्नान के लिए 47 बांग्लादेशी हिंदुओं ने अवैध रूप से भारत में प्रवेश किया। यह मामला तब सामने आया जब समूह में शामिल एक व्यक्ति ...और पढ़ें

महिला व उसके बेटे को पुलिस के हवाले करते हैम रेडियो, वेस्ट बंगाल रेडियो के सदस्य (फोटो सौजन्य: हैम रेडियो)
HighLights
47 बांग्लादेशी हिंदुओं ने गंगासागर के लिए घुसपैठ की।
बेटे के लापता होने पर घुसपैठ का राज खुला।
पश्चिम बंगाल में अवैध प्रवेश पर सुरक्षा चिंताएं बढ़ीं।
विशाल श्रेष्ठ, गंगासागर। मकर संक्रांति पर पुण्य स्नान करने गंगासागर आने के लिए बांग्लादेशी हिंदुओं के एक बड़े वर्ग को घुसपैठ का सहारा लेना पड़ता है। कारण ये है कि उनमें से अधिकांश के अब तक पासपोर्ट नहीं बन पाए हैं और जिनके पास हैं, उन्हें इस 'उद्देश्य' के लिए वीजा नहीं मिल पाता है।
गंगासागर में चिह्नित हुई एक बांग्लादेशी महिला इसका खुलासा किया है। नयना दास नाम की महिला ने बताया, 'मैं पुण्य स्नान करने अपने तीन साल के बेटे रूद्र व 46 अन्य लोगों के साथ गोपाल नामक एजेंट की मदद से अवैध तरीके से सीमा पार करके यहां आई थी। यहां मेरा बच्चा गुम हो गया था। उसे तलाशने के लिए मजबूरन मुझे अपनी असली पहचान बतानी पड़ गई। मेरे साथ जो लोग आए हैं, उनमें ज्यादातर बुजुर्ग हैं। भारत आने के बाद सब अलग-अलग निकल गए। साथ में होने पर आसानी से पहचान में आ जाने का डर था।'
'हम हमारी आस्था के महापर्व मकर संक्रांति पर यहां पुण्य स्नान करने गलत तरीके से आना नहीं चाहते, लेकिन दूसरा कोई उपाय नहीं है। हमारा न तो पासपोर्ट बनता है और न इसके लिए वीजा मिलता है। बांग्लादेश में वर्तमान में जिस तरह की परिस्थितियां हैं, उसमें तो वीजा मिलना लगभग असंभव है।'
बच्चे का पता लगाने वाली संस्था हैम रेडियो, वेस्ट बंगाल रेडियो क्लब के सचिव अंबरीश नाग बिश्वास ने बताया कि हमें यह बच्चा रोते हुए मिला था। हमने अपने नेटवर्क के जरिये उसकी मां का पता लगाया। बच्चे को मां को सौंपने से पहले उनके बारे में पूरी खोज-खबर की। इसी क्रम में पता चला कि वह महिला बांग्लादेश के दक्षिण हातिया इलाके की रहने वाली है और पुण्य स्नान करने चोरी-छिपे एजेंट की मदद से यहां आई थी।
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सीमा पार कराने के बाद एजेंट ने उसका मोबाइल अपने पास रख लिया था और स्नान के बाद एक निश्चित जगह पर लौट आने को कहा था, जहां से वह उसे वापस बांग्लादेश ले जाने वाला था। महिला व बच्चों को स्थानीय पुलिस के हवाले कर दिया गया है।
पिछले 36 वर्षों से अधिक समय से गंगासागर मेले में लापता होने वालों को तलाश रहे अंबरीश ने कहा कि इस बार यहां बांग्लादेशी हिंदुओं की संख्या न के बराबर है। कारण, हर बार हम जिन लोगों को तलाशते हैं, उनमें बहुत से बांग्लादेशी हिंदू भी होते हैं। कुछ वैध तरीके से आते हैं तो कुछ घुसपैठ करके। इस बार अब तक एक ही मिला है।
गंगासागर में सेवा शिविर लगाने वाली एक संस्था के कार्यकर्ता ने नाम प्रकाशित नहीं करने के अनुरोध पर बताया कि सेवा शिविरों में जो भी तीर्थयात्री ठहरते हैं, उनका नाम व पता रजिस्टर में अवश्य नोट किया जाता है। इनमें बहुत से बांग्लादेशी हिंदू भी होते हैं। जो अवैध तरीके से आए लोग होते हैं, वे फर्जी दस्तावेजों का सहारा लेकर अपनी पहचान छिपाते हैं। पकड़े जाने पर उनके विरुद्ध कार्रवाई हो सकती है।
सुंदरबन से जलमार्ग से अवैध तरीके से आते हैं बहुत से बांग्लादेशी
गंगासागर में बिछड़ों को मिलाने वाली प्रमुख संस्था बजरंग परिषद के सेवा मंत्री प्रेमनाथ दुबे ने कहा कि गंगासागर बांग्लादेश के बेहद करीब है इसलिए हर साल अधिकतर बांग्लादेशी हिंदू सुंदरबन से जलमार्ग से भुटभुटी (मोटर चलित नाव) से अवैध तरीके से यहां आते हैं और पहचान छिपाकर शिविरों में रहते हैं। भले उनका कोई गलत इरादा न हो और वे सिर्फ पुण्य स्नान के लिए आते हों, लेकिन आखिरकार यह अपराध है।
गंगासागर मेले के आयोजन का दायित्व प्राप्त बंगाल सरकार के मंत्री इस बारे में कुछ भी कहने से बच रहे हैं. हालांकि पुण्य स्नान करने गंगासागर आए पुरी के शंकराचार्य निश्चलानंद सरस्वती जी महाराज से इस बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि बांग्लादेश में हिंदुओं पर अत्याचार वहां के मुसलमानों की अदूरदर्शिता है। उन्हें इस बात का ज्ञान नहीं है कि हिंदू सुरक्षित रहेंगे, तभी अन्य धर्म के लोग भी सुरक्षित रह पाएंगे।