बांग्लादेश चुनाव नतीजे : बंगाल से सटे सीमावर्ती इलाकों में जमात-ए-इस्लामी की जीत से सीमा पर सुरक्षा चिंताएं बढ़ी
बांग्लादेश के आम चुनाव में जमात-ए-इस्लामी गठबंधन की भारत-बांग्लादेश सीमा से सटे इलाकों में भारी जीत ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। विशेषज्ञ ...और पढ़ें

भारत-बांग्लादेश बॉर्डर से सटे इलाकों में जमात नेताओं की जीत
HighLights
बांग्लादेश सीमा पर जमात की जीत ने सुरक्षा एजेंसियों को चिंतित किया।
बंगाल से सटे इलाकों में कट्टरपंथी ताकतों का उदय चिंताजनक।
भाजपा ने सीमा पार घुसपैठ और कट्टरपंथ पर चिंता जताई।
राजीव कुमार झा, कोलकाता। बांग्लादेश में हुए आम चुनाव में विशेषकर बंगाल से लगते भारत-बांग्लादेश अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे इलाकों में जमात-ए-इस्लामी गठबंधन की भारी जीत ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंताएं बढ़ा दी हैं।
अब तक घोषित चुनाव नतीजों के मुताबिक, जमात गठबंधन ने विशेषकर अंतरराष्ट्रीय सीमा से लगे अधिकतर निर्वाचन क्षेत्रों में जीत हासिल की है।
आम चुनाव में हार के बावजूद बांग्लादेश के लोकतांत्रिक इतिहास में जमात का यह अब तक का सबसे अच्छा प्रदर्शन माना जा रहा है।
बंगाल से सटे इलाकों में सुरक्षा चिंताएं बढ़ीं
सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि भारत-बांग्लादेश सीमा से सटे इलाकों में इस तरह के चुनावी नतीजे नई दिल्ली और कोलकाता के लिए रणनीतिक व सुरक्षा दृष्टि से चिंताजनक हैं।
सूत्रों के अनुसार, सीमा पर सक्रिय उग्रवादी संगठनों की गतिविधियों को देखते हुए चुनाव परिणाम के बाद केंद्रीय एजेंसियों के साथ राज्य की सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गई है।
दरअसल, बांग्लादेश के सतखीरा और झेनाइदाह जैसे जिले जो बंगाल के उत्तर 24 परगना से सटे हुए हैं, कई वर्षों से जमात के गढ़ रहे हैं।
एक तरफ सीमा के उस पार सीमावर्ती क्षेत्रों में जमात की जीत और दूसरी तरफ, सीमा के इस पार बंगाल में होने वाले विधानसभा चुनाव के मद्देनजर असदुद्दीन ओवैसी की एआइएमआइएम, मुर्शिदाबाद जिले में बाबरी मस्जिद की नींव रखने वाले निलंबित तृणमूल विधायक हुमायूं कबीर द्वारा नवगठित जनता उन्नयन पार्टी और नौशाद सिद्दीकी की अगुवाई वाले ऑल इंडिया सेक्युलर फंड (एआइएसएफ) जैसे दलों की नजर बांग्लादेश की सीमा से सटे मुस्लिम बहुल जिलों पर है।
ये तीनों दल गठबंधन कर चुनाव में उतरने की तैयारी में है। ऐसे में यह स्थिति विशेषकर बंगाल के लिए चिंताजनक स्थिति की ओर इशारा करती है।
सीमा के दोनों ओर कट्टरपंथी ताकतों के उदय से भाजपा चिंतित
इधर, बांग्लादेश के चुनाव परिणाम के बाद राज्य भाजपा के नेताओं ने विशेषकर सीमावर्ती जिलों में जमात की जीत को बंगाल के लिए चिंताजनक स्थिति की ओर इशारा किया है।
पार्टी सीमा के उस पार जमात-ए इस्लामी और इस तरफ एआइएमआइएम के उदय को लेकर चिंतित है। केंद्रीय मंत्री व सीमावर्ती दक्षिण दिनाजपुर जिले के बालुरघाट से भाजपा सांसद सुकांत मजूमदार ने कहा कि बंगाल सीमा के दोनों ओर कट्टरपंथी ताकतों का उदय बेहद चिंताजनक व राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरनाक है।
उन्होंने कहा कि बंगाल के लोगों को इस बारे में जागरूक होने की जरूरत है। उन्होंने साथ ही कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित विभिन्न केंद्रीय एजेंसियों को भी इस राज्य में अपनी गतिविधियां बढ़ाने की जरूरत है, क्योंकि बंगाल की भौगोलिक स्थिति रणनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील है।
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अमित मालवीय ने चुनाव परिणाम को हिंदुओं के लिए चेतावनी बताया
वहीं, भाजपा के आइटी सेल के प्रमुख व बंगाल में पार्टी के सह-प्रभारी अमित मालवीय ने कहा कि बांग्लादेश के चुनाव परिणाम बंगाल के हिंदुओं के लिए एक चेतावनी है, क्योंकि ममता बनर्जी के प्रशासन ने सीमा पार से घुसपैठ को लगातार बढ़ावा दिया है।
मालवीय ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि बंगाल और असम की सीमा से लगे सतखीरा से रंगपुर तक के क्षेत्र में राजनीति बदल गई है।
बांग्लादेश में बीएनपी को बहुमत मिलने के बावजूद, जमात समर्थित कट्टरपंथी ताकतों ने भारत की सीमा से लगे जिलों में भारी जीत हासिल की है। बंगाल के लोगों को इस स्थिति को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
बंगाल और बांग्लादेश की 2,200 किमी लंबी सीमा
मालूम हो कि बांग्लादेश के साथ भारत की 4,096 किलोमीटर लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमाएं लगती है। इसमें आधे से भी अधिक हिस्सा यानी 2,200 किलोमीटर से अधिक की सीमा अकेले बंगाल के साथ लगती है।
बंगाल में अंतरराष्ट्रीय सीमा के बड़े हिस्से में अब तक बाड़ भी नहीं लगाई जा सकी है। गृह मंत्री अमित शाह व भाजपा के अन्य नेता सीमा पर बाड़ लगाने के लिए बंगाल सरकार पर जानबूझकर बीएसएफ को जमीन उपलब्ध नहीं कराने का लगातार आरोप लगाते रहे हैं।