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    बांग्लादेश की महिला चिकित्सक ने गंगासागर में 17 साल 'पश्चाताप' के बाद त्यागा देह, बीमार बेटी का खुद कर रही थी इलाज

    Updated: Sun, 18 Jan 2026 11:22 PM (IST)

    बांग्लादेश की 71 वर्षीय चिकित्सक अर्चना गोलदार का गंगासागर में 17 साल के 'प्रायश्चित' के बाद निधन हो गया। बेटी की गलत इलाज से हुई मौत के बाद वह घर छोड ...और पढ़ें

    मृतका अर्चना गोलदार की फाइल फोटो। (फोटो सौजन्य- हैम रेडियो)

    मृतका अर्चना गोलदार की फाइल फोटो। (फोटो सौजन्य- हैम रेडियो)

    HighLights

    1. बांग्लादेशी चिकित्सक अर्चना गोलदार का गंगासागर में निधन।

    2. बेटी की मौत के प्रायश्चित में 17 साल बिताए।

    3. गंगासागर मेले के दौरान काली मंदिर में हुई मृत्यु।

    विशाल श्रेष्ठ, जागरण, गंगासागर। बांग्लादेश की एक महिला चिकित्सक ने गंगासागर में 17 साल 'पश्चाताप' करने के बाद अंतत: यहीं देह त्याग दिया। मृतका का नाम 71 वर्षीय अर्चना गोलदार है। वह बांग्लादेश के खुलना इलाके की रहने वाली थी। 17 साल पहले वह अचानक घर छोड़कर चली गई थी।

    पति लंकेश्वर गोलदार ने उसे बहुत तलाशा, पर कहीं पता नहीं चला। 16 साल बाद अर्चना के गंगासागर में संन्यासिनी की तरह जीवन जीने की बात सामने आई। वह दिनभर मंदिरों में जाकर पूजा-अर्चना करती थी। उसके रहने का कोई ठिकाना नहीं था। जहां जगह मिलती थी, वहीं सिर छिपा लेती थी, कभी मंदिर तो कभी श्मशान में सोती थी।

    कैसे करती थी गुजारा?

    खाने को जो मिल जाता था, उसी से गुजारा करती थी। स्थानीय लोगों ने बताया कि वह फर्राटेदार अंग्रेजी बोलती थी। मेले के दौरान पूजा-अर्चना में थी तल्लीन, पुण्य स्नान भी किया हालिया संपन्न गंगासागर मेले के दौरान अर्चना अधिकांश समय पूजा-अर्चना में तल्लीन रही थी। उसने मकर संक्रांति के दिन पुण्य स्नान भी किया था।

    गत शनिवार प्रात: करीब पांच बजे स्थानीय एक काली मंदिर में पूजा करते वक्त हृदय गति रुकने से उसकी मृत्यु हो गई। स्थानीय लोगों ने गंगासागर में ही उनका दाह संस्कार कर दिया है। गुमशुदा लोगों का पता लगाने वाले संगठन हैम रेडियो, वेस्ट बंगाल रेडियो क्लब के सचिव अंबरीश नाग विश्वास ने बताया-'हमारे रेडियो आपरेटर को ढाई साल पहले गंगासागर के लोगों से अर्चना के बारे में जानकारी मिली थी।

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    अर्चना से बात करने पर उसके बांग्लादेशी होने का आभास मिला था। हमारी टीम के सदस्य दिबस मंडल ने ढाका स्थित अमेचर रेडियो एसोसिएशन आफ बांग्लादेश के सचिव अनूप भौमिक से संपर्क कर अर्चना के बारे में पता लगाया था। उसके पति से संपर्क करने पर पता चला कि अर्चना अपनी बीमार बेटी का खुद इलाज कर रही थी।

    बेटी की मौत के बाद टूटी

    गलत दवा के प्रयोग से बेटी की मौत होने से वह टूट गई थी और एक दिन अचानक घर छोड़कर चली गई थीं। अर्चना बांग्लादेश से गंगासागर कैसे पहुंची थी, इसका पता नहीं चल पाया है, हालांकि पिछले साल पहचान सामने आने के बाद अर्चना ने कहा था कि वह अपनी गलती का अब यहीं रहकर प्रायश्चित करना चाहती है। शेष जीवन ईश्वर की भक्ति में बिताना चाहती है।

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