Trending

    विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

    यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Aug 08, 2023 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

    Bengal: विधानसभा में UCC के खिलाफ TMC की ओर से लाया जा सकता है प्रस्ताव, CM ममता शुरू से कर रहीं नीति का विरोध

    By Jagran NewsEdited By: Ashisha Singh Rajput
    Updated: Tue, 08 Aug 2023 07:01 PM (IST)

    मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने केंद्र सरकार की कई नीतियों की सार्वजनिक रूप से आलोचना करती रही हैं। उन्होंने एनआरसी-सीएए से लेकर केंद्र सरकार के तीन कृषि ब ...और पढ़ें

    मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने केंद्र सरकार की कई नीतियों की सार्वजनिक रूप से आलोचना करती रही हैं।
    मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने केंद्र सरकार की कई नीतियों की सार्वजनिक रूप से आलोचना करती रही हैं।

    HighLights

    1. 22 अगस्त से बंगाल विधानसभा का मानसून सत्र का दूसरा चरण होगा शुरू
    2. केरल में यूसीसी के खिलाफ प्रस्ताव पारित होते ही यहां भी चर्चा तेज

    कोलकाता, राज्य ब्यूरो। केरल विधानसभा में समान नागरिक संहिता(यूसीसी) के खिलाफ प्रस्ताव पारित होने के बाद अब बंगाल विधानसभा में भी अटकलें शुरू हो गई हैं कि मानसून सत्र के दूसरे चरण में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस द्वारा ऐसा ही प्रस्ताव लाया जा सकता है। 2014 में दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार के सत्ता में आने के बाद से बंगाल सरकार के साथ लगातार टकराव होता रहा है।

    बंगाल विधानसभा में मणिपुर के खिलाफ निंदा प्रस्ताव

    मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने केंद्र सरकार की कई नीतियों की सार्वजनिक रूप से आलोचना करती रही हैं। उन्होंने एनआरसी-सीएए से लेकर केंद्र सरकार के तीन कृषि बिलों के खिलाफ बंगाल विधानसभा में प्रस्ताव पारित किया था। हाल ही में बंगाल विधानसभा में मणिपुर हिंसा पर भी प्रस्ताव पारित किया। 31 जुलाई को सत्तारूढ़ दल बंगाल विधानसभा में मणिपुर के खिलाफ निंदा प्रस्ताव लेकर आया।

    प्रस्ताव के पक्ष में बोलते हुए खुद मुख्यमंत्री ममता ने मोदी सरकार के खिलाफ सुर बुलंद कर दिए थे। इसलिए विधानसभा के भीतर अटकलें हैं कि समान नागरिक संहिता के खिलाफ एक जवाबी प्रस्ताव विधानसभा के मासून सत्र के दूसरे भाग में पेश किया जा सकता है। सत्र का दूसरा चरण  22 अगस्त से शुरू होने वाला है।

    यूसीसी के खिलाफ तृणमूल रही मुखर

    समान नागरिक संहिता पर बंगाल की सत्तारूढ़ तृणमूल पहले ही अपनी स्थिति स्पष्ट कर चुकी है। सार्वजनिक रूप से यह घोषणा की गई है कि यदि यह विधेयक राष्ट्रीय स्तर यानी संसद में पेश किया गया तो वे केंद्र सरकार की नीति का विरोध करेंगे। लोकसभा चुनाव से कुछ महीने पहले जिस तरह से मोदी सरकार ने संसद के दोनों सदनों में दिल्ली अध्यादेश पारित किया, उससे विपक्षी राजनीतिक दलों ने अनुमान लगाया है कि केंद्र आगामी शीतकालीन सत्र में समान नागरिक संहिता पारित किया जा सकता है।

    खबरें और भी

    क्योंकि, कई महीनों से केंद्र सरकार और भाजपा खेमा जनता के बीच समान नागरिक संहिता का मुद्दा उठा रहे हैं। कई लोगों का मानना है कि यह कानून लोकसभा चुनाव से पहले भाजपा के 'वोट ध्रुवीकरण' के औजारों में से एक हो सकता है।

    समान नागरिक संहिता के खिलाफ सीएम ममता

    वहीं, विपक्षी गठबंधन 'आइएनडीआइए' उनके विरोध का सुर बुलंद करेगा। उसी आधार पर केरल की एलडीएफ सरकार अपनी विधानसभा में समान नागरिक संहिता के खिलाफ प्रस्ताव पारित किया है। बंगाल की मुख्यमंत्री 'आइएनडीआइए' के साझेदारों में से एक हैं। उनकी पार्टी घोषित तौर पर समान नागरिक संहिता के खिलाफ है। इसलिए विधानसभा के कुछ अधिकारियों का मानना है कि अगर मानसून सत्र के दूसरे चरण में बंगाल विधानसभा में प्रस्ताव आ जाए तो आश्चर्य की कोई बात नहीं होगी।