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    सुवेंदु से टुडु तक बंगाल में भाजपा ने एक साथ साधे कई समीकरण, अब 2029 की तैयारी

    Updated: Sat, 09 May 2026 09:29 PM (IST)

    बंगाल में सरकार गठन के साथ ही भाजपा ने 2029 के लोकसभा चुनाव की तैयारी शुरू कर दी है। पार्टी ने मुख्यमंत्री और मंत्रियों के चयन में जाति, क्षेत्र, संगठ ...और पढ़ें

    बंगाल में भाजपा का रणनीतिक मंत्रिमंडल गठन (फोटो- रॉयटर्स)

    बंगाल में भाजपा का रणनीतिक मंत्रिमंडल गठन (फोटो- रॉयटर्स)

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    राज्य ब्यूरो, कोलकाता । बंगाल में सरकार गठित करते ही भाजपा 2029 के लोकसभा चुनाव की तैयारियों में जुट गई है। उसने अपने पहले मंत्रिमंडल के गठन से यह स्पष्ट कर दिया है। सुवेंदु अधिकारी को मुख्यमंत्री और दिलीप घोष, अग्निमित्रा पाल, निशिथ प्रमाणिक, अशोक कीर्तनिया व खुदीराम टुडू को मंत्री बनाकर पार्टी ने जाति, क्षेत्र, संगठन और सामाजिक समीकरणों को एक साथ साधा है।

    जंगलमहल से पूरे बंगाल का चेहरा

    नंदीग्राम के 'भूमिपुत्र' सुवेंदु अधिकारी को मुख्यमंत्री बनाकर भाजपा ने सबसे बड़ा संदेश दिया कि आंदोलन और संगठन चलाने वाला नेता ही सरकार का नेतृत्व करेगा। सुवेंदु की ताकत पूर्व व पश्चिम मेदिनीपुर, झाडग़्राम, पुरुलिया का जंगलमहल इलाका है, जहां हालिया संपन्न विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 38 में से 34 सीटें जीतीं। संदेश साफ है ममता के सबसे बड़े प्रतिद्वंद्वी को मुख्यमंत्री बनाकर तृणमूल कांग्रेस के कोर मतदाताओं व कार्यकर्ताओं में सेंध लगाना।

    पुराने कार्यकर्ताओं व आरएसएस कैडरों को संदेश

    वहीं खडग़पुर सदर से विधायक दिलीप घोष को मंत्री बनाकर भाजपा ने संगठन के पुराने कार्यकर्ताओं को संतुष्ट किया है। 2015 से 2021 तक प्रदेश अध्यक्ष रहते घोष ने ही बंगाल में पार्टी को खड़ा किया था। घोष को मंत्रिमंडल में शामिल करके भाजपा ने आरएसएस के कैडरों को भी संदेश दिया कि संगठन की भूमिका सरकार में बराबर रहेगी।

    महिलाओं को साधने की जुगत

    आसनसोल दक्षिण से दूसरी बार विधायक बनीं अग्निमित्रा पाल बंगाल भाजपा की सबसे मुखर महिला चेहरा हैं। फैशन डिजाइनर से राजनीति में आईं अग्निमित्रा शहरी, पढ़ी-लिखी महिला मतदाताओं को आकर्षित करती हैं। उन्हें मंत्री बनाकर पार्टी ने महिला सशक्तीकरण और शहरी मध्यवर्ग की आवाज बनने का भी संदेश दिया है।

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    उत्तर बंगाल पर पकड़ और मजबूत करने की रणनीति

    दिनहाटा से विधायक निशिथ प्रमाणिक को मंत्री बनाना उत्तर बंगाल पर भाजपा की पकड़ मजबूत करने की रणनीति है। राजबंशी समुदाय से आने वाले निशिथ की उत्तर बंगाल की 30 में से 25 सीटें जिताने में महत्वपूर्ण भूमिका मानी जाती है। केंद्र सरकार में गृह राज्य मंत्री रह चुके निशिथ सीमावर्ती इलाकों में घुसपैठ का मुद्दा उठाते रहे हैं। उनके जरिए भाजपा ने राजबंशी मतदाताओं को संदेश दिया कि उत्तर बंगाल सरकार की प्राथमिकता में रहेगा।

    मतुआओं के मत पर भी नजर

    बनगांव उत्तर से विधायक अशोक कीर्तनिया को मंत्री बनाकर भाजपा ने मतुआ समुदाय को साधा है। मतुआ बंगाल की 17 प्रतिशत आबादी हैं और उत्तर 24 परगना व नदिया जिलों में निर्णायक हैं।
    कीर्तनिया खुद मतुआ समुदाय के धार्मिक आयोजनों में सक्रिय रहते हैं। भाजपा ने उन्हें कैबिनेट में रखकर सीमावर्ती इलाकों और शरणार्थी वोटरों को संदेश दिया कि नागरिकता कानून सिर्फ चुनावी वादा नहीं, नीति का हिस्सा बनेगा।

    आदिवासियों का भरोसा जीतने की जुगत

    रानीबांध के विधायक खुदीराम टुडू को मंत्री बनाकर भाजपा ने आदिवासी समाज को प्रतिनिधित्व दिया है। जंगलमहल में आदिवासी वोटरों की संख्या निर्णायक है। 2021 में यहां भाजपा ने अच्छी बढ़त बनाई थी। 2026 में उसकी स्थिति और मजबूत हुई है। खुदीराम की छवि शांत और जमीनी नेता की है। उनके जरिए भाजपा ने दिखाया कि आदिवासी विकास सरकार की प्राथमिकता में है।

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