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    ब्रिगेड से बंगाल की सियासत के एक और नए अध्याय की शुरुआत, सुवेंदु ने रचा नया इतिहास

    Updated: Sat, 09 May 2026 09:16 PM (IST)

    ब्रिगेड परेड ग्राउंड में सुवेंदु अधिकारी ने बंगाल के नौवें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली, जिससे राज्य की सियासत में एक नए अध्याय की शुरुआत हुई। ...और पढ़ें

    ब्रिगेड परेड ग्राउंड से बंगाल की राजनीति में नया युग (फोटो- रॉयटर्स)

    ब्रिगेड परेड ग्राउंड से बंगाल की राजनीति में नया युग (फोटो- रॉयटर्स)

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    राज्य ब्यूरो, कोलकाता । ब्रिगेड परेड ग्राउंड से बंगाल की सियासत के एक और नए अध्याय की शुरुआत हुई है। शनिवार को सुवेंदु अधिकारी ने यहीं आयोजित समारोह में बंगाल के नौवें मुख्यमंत्री के रूप में पद की शपथ ली। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह, भाजपा शासित 22 राज्यों के मुख्यमंत्री, केंद्र सरकार के कई मंत्री व राजग के दो दर्जन से अधिक नेता व अन्य वीवीआइपी मौजूद थे।

    15 साल बाद बंगाल में सत्ता परिवर्तन हुआ, वह भी उसी मैदान से, जहां से 2011 में ममता ने शुरुआत की थी।

    दशकों से सत्ता का भविष्य तय करता आया है ब्रिगेड

    बंगाल हो या देश की राजनीति, ब्रिगेड परेड ग्राउंड दशकों से सत्ता का भविष्य तय करता आया है। यहां की मिट्टी पर खड़े होकर नेता सिर्फ भाषण नहीं देते, बल्कि इतिहास लिखते हैं। 70 एकड़ में फैला यह मैदान सिर्फ रैली स्थल नहीं, बल्कि भारत की राजनीति का मंच रहा है। ब्रिगेड से उठे नारे दिल्ली तक गूंजे हैं और यहां से सरकारें बनी व गिरी हैं।

    ब्रिटिश राज के दौरान इसका फौजी परेड के लिए इस्तेमाल होता था। 1940 के दशक में यह क्रांतिकारियों का ठिकाना बना। 1942 के 'भारत छोड़ो आंदोलन' में यहां लाखों की भीड़ जुटी थी। नेताजी सुभाष चंद्र बोस के अनुयायियों ने इसी मैदान से 'दिल्ली चलो' का नारा बुलंद किया था।

    1971 में मुजीबुर-इंदिरा की ऐतिहासिक रैली

    ब्रिगेड का सबसे स्मरणीय दिन छह फरवरी, 1972 है, जब बांग्लादेश की आजादी के बाद मुजीबुर रहमान कोलकाता आए थे और भारत की तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के साथ यहां विशाल रैली को संबोधित किया था। उस दिन ब्रिगेड में 10 लाख से ज्यादा लोग जमा हुए थे।

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    वामो सरकार की ताकत का प्रदर्शन स्थल

    1977 में बंगाल में जब वाममोर्चा (वामो) की सरकार बनी तो ब्रिगेड उसकी ताकत का प्रदर्शन स्थल बन गया। हर साल 28 जुलाई को यहां माकपा की रैली होती थी। ज्योति बसु, बिमान बोस व अनिल विश्वास जैसे दिग्गज माकपा नेता यहां से कार्यकर्ताओं को संदेश देते थे। 1989 में राजीव गांधी ने भी ब्रिगेड से बंगाल में कांग्रेस के पुनरुद्धार की कोशिश की थी। वहीं 1993 में कांग्रेस में रहते ममता बनर्जी ने यहां युवा कांग्रेस की रैली कर अपनी अलग पहचान बनाई थी।

    2000 के बाद सत्ता परिवर्तन का मंच

    2006 में तत्कालीन मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य ने यहां से औद्योगिक निवेश की बात रखी, पर नंदीग्राम-सिंगुर आंदोलन ने माहौल को बदल दिया। 2011 में ममता बनर्जी ने ब्रिगेड से ही 34 वर्षों के वाम शासन को उखाड़ फेंकने का शंखनाद किया था। उसके बाद 2019 में ममता ने यहां से 'युनाइटेड इंडिया रैली' कर विपक्षी एकता का संदेश दिया। 2021 में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी व अमित शाह ने यहां से बंगाल में भाजपा की चुनावी लड़ाई शुरू की थी।

    इसलिए भी खास है ब्रिगेड

    अपनी भौगोलिक स्थिति के कारण। कोलकाता के धर्मतल्ला इलाके के निकट होने के कारण इसका मेट्रो व सड़क से सीधा जुड़ाव है। पूरे बंगाल से कार्यकर्ता यहां आसानी से पहुंच सकते हैं। यह 10 लाख से अधिक की भीड़ संभाल सकता हैं। किसी दूसरे मैदान की इतनी क्षमता नहीं है। इसका अलग प्रभाव है। जो यहां से बोलता है, समझा जाता है कि पूरे बंगाल से बोल रहा है।

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