कपड़े सिलने के बहाने आतंकियों से संपर्क करता था हमीम मंडल, STF का खुलासा- हावड़ा में मिली दर्जी की दुकान
पश्चिम बंगाल पुलिस की एसटीएफ को जैश-ए-मोहम्मद के संदिग्ध हमीम मंडल की पिलखाना स्थित दर्जी की दुकान मिली, जिसे साथियों से संपर्क का ठिकाना माना जा रहा ...और पढ़ें

बंगाल एसटीएफ ने संदिग्ध जैश आतंकी को किया गिरफ्तार। (फोटो- पीटीआई।)
HighLights
हमीम मंडल की पिलखाना में दर्जी की दुकान मिली।
यह दुकान साथियों से संपर्क का मुख्य जरिया थी।
जंतर-मंतर पर विरोध रैली में गड़बड़ी की योजना थी।
डिजिटल डेस्क, कोलकाता। पश्चिम बंगाल पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) को रविवार को हमीम मंडल की एक दर्जी की दुकान मिली। मंडल पर जैश-ए-मोहम्मद (JeM) का सदस्य होने का शक है और उसे पश्चिम बंगाल के पूर्वी बर्दवान जिले के बर्दवान शहर की एक पॉश हाउसिंग कॉलोनी से गिरफ्तार किया गया था।
इस मामले की जानकारी रखने वाले सूत्रों ने बताया कि यह दुकान कोलकाता से सटे हावड़ा जिले के पिलखाना इलाके में है, जहां ज्यादातर अल्पसंख्यक आबादी रहती है। इस दुकान पर मुख्य रूप से कपड़ों के टैग बनाने और सिलने जैसे छोटे-मोटे दर्जी के काम होते थे।
अधिकारियों को शक, सिर्फ दिखावे के लिए खोली थी दुकान
हालांकि, सूत्रों का कहना है कि जांच अधिकारियों को शक है कि यह दुकान मंडल और उसके साथियों के बीच संपर्क का एक अहम जरिया हो सकती है, जहां दर्जी का काम सिर्फ दिखावे के लिए किया जाता था।
राज्य पुलिस के एक अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर कहा कि पश्चिम बंगाल में शुरुआती दिनों में मंडल पिलखाना में रहता था और शायद उन्हीं दिनों उसने दर्जी की दुकान खोली थी। हालांकि, पुलिस ने बताया कि वहां दुकान खोलने के बाद वह पहले कोलकाता के उत्तरी बाहरी इलाके में न्यू टाउन चला गया और बाद में बर्दवान शहर चला गया।
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तंग गली में खोली थी दुकान
पता चला है कि दुकान पिलखाना इलाके में आलम मिस्त्री लेन की एक तंग गली में है। जांच अधिकारियों को पता चला है कि पश्चिम बंगाल में शुरुआती दिनों में मंडल वहां एक हाउसिंग कॉम्प्लेक्स में किराए के एक कमरे वाले फ्लैट में रहता था।
इस बीच, हमीम मंडल के पिता मोइनुद्दीन मंडल बेटे के एसटीएफ द्वारा पकड़े जाने के बाद से फरार हैं। वह भी पिलखाना में अपने बेटे के साथ रहते थे। स्थानीय निवासियों ने मीडिया को बताया कि हमीम मंडल बहुत कम बोलने वाला व्यक्ति था और पिलखाना में रहने के दौरान लोगों से बहुत कम बातचीत करता था।
हालांकि, स्थानीय लोगों का कहना है कि फरार पिता कभी-कभी स्थानीय लोगों से बातचीत किया करते थे। साथ ही लोगों को इस बात पर भी शक था कि जो व्यक्ति खुद को हमिम का पिता बता रहा था, वह असल में उसका पिता था भी या नहीं।
सीजेपी के प्रदर्शन से भी निकला कनेक्शन
इस बीच, हामिम और उसकी गिरफ्तार साथी अर्पिता सरकार से पूछताछ के बाद एसटीएफ अधिकारियों ने खुलासा किया है कि वे नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) द्वारा आयोजित हालिया विरोध रैली में गड़बड़ी फैलाने की योजना बना रहे थे।
एसटीएफ के इंस्पेक्टर जनरल गौरव शर्मा ने शनिवार को कहा, "इस मकसद के लिए पुलिस की वर्दी हासिल करने की योजना थी, ताकि वे पुलिसकर्मी बनकर भीड़ में घुल-मिल सकें और अफरातफरी मचा सकें। हालांकि, यह साफ नहीं है कि हामिम या सरकार जंतर-मंतर गए थे या नहीं या फिर वे पुलिस की वर्दी हासिल करने में कामयाब हो पाए थे या नहीं।"