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ईद से पहले कलकत्ता HC का बड़ा फैसला: प्रतिबंध हटाने की याचिका खारिज, कहा- पशुओं की कुर्बानी जरूरी नहीं

Published: Thu, 21 May 2026 09:05 PM (IST)Updated: Thu, 21 May 2026 09:10 PM (IST)

कलकत्ता हाई कोर्ट ने ईद पर पशुओं की कुर्बानी पर प्रतिबंधों को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी।

कलकत्ता हाई कोर्ट

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संक्षेप में पढ़ें

राज्य ब्यूरो, कोलकाता। कलकत्ता हाई कोर्ट ने ईद पर पशुओं की कुर्बानी पर बंगाल सरकार की ओर से लगाए गए प्रतिबंधों को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी।

न्यायमूर्ति सुजय पाल व पार्थसारथी सेन की खंडपीठ ने स्पष्ट टिप्पणी करते हुए कहा कि ईद के अवसर पर पशुओं की कुर्बानी इस्लाम का अनिवार्य हिस्सा नहीं है।

ईद पर कुर्बानी को लेकर अनिश्चितता 

मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से दावा किया गया कि राज्य में लागू नियमों के कारण ईद पर कुर्बानी को लेकर अनिश्चितता पैदा हो रही है।

इस पर अदालत ने कहा कि राज्य में पशुधन संबंधी कानून और प्रशासनिक नियम पहले से प्रभावी हैं और उनका पालन करना जरूरी है।

हाई कोर्ट ने क्या कहा?

हाई कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि कानून लागू नहीं होता तो वर्षों से इस संबंध में अधिसूचनाएं जारी करने और मामले दर्ज करने का कोई औचित्य नहीं होता।

अदालत ने साफ किया कि सार्वजनिक व्यवस्था और कानून के दायरे में रहकर ही धार्मिक गतिविधियां की जा सकती हैं।

क्या कहता है पशुधन कानून?

मालूम हो कि राज्य में 1950 के पशुधन कानून के तहत बिना प्रशासनिक अनुमति गोवंश वध पर रोक है। साथ ही 14 वर्ष से कम आयु के पशुओं के वध की अनुमति नहीं है।

मांस काटने और बिक्री के लिए स्थानीय प्रशासन अथवा पशुपालन विभाग से लिखित अनुमति लेना भी अनिवार्य है।

अदालत के फैसले के बाद ईद से पहले राज्य में गोवंश वध को लेकर राजनीतिक और सामाजिक बहस तेज हो गई है।

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