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    यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Aug 13, 2024 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

    Doctor Murder Case: महिला डॉक्टर से दुष्कर्म और हत्या मामले की होगी सीबीआई जांच, कलकत्ता HC ने दिया आदेश

    By Agency Edited By: Sonu Gupta
    Updated: Tue, 13 Aug 2024 03:56 PM (IST)

    RG Kar Medical College Case कलकत्ता उच्च न्यायालय ने आरजी कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में महिला डॉक्टर से दुष्कर्म और हत्या मामले की सीबीआई जांच के आद ...और पढ़ें

    लखनऊ में किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) में डॉक्टरों ने किया प्रदर्शन। फोटो-पीटीआई ।
    लखनऊ में किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) में डॉक्टरों ने किया प्रदर्शन। फोटो-पीटीआई ।

    HighLights

    1. महिला डॉक्टर से दुष्कर्म और हत्या मामले की सीबीआई जांच के आदेश
    2. बुधवार सुबह 10 बजे तक सीबीआई को सौंपे जाएं सभी दस्तावेजः कोर्ट

    एएनआई, कोलकाता। आरजी कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में महिला डॉक्टर से दुष्कर्म और हत्या के मामले में लगातार नए-नए खुलासे हो रहे हैं। वहीं, कलकत्ता उच्च न्यायालय ने अब इस मामले की सीबीआई जांच के आदेश दे दिए हैं।

    सीबीआई को सभी दस्तावेज सौंपेगी पुलिस

    कलकत्ता उच्च न्यायालय ने पुलिस को निर्देश दिया कि महिला चिकित्सक की हत्या से संबंधित सभी दस्तावेज बुधवार सुबह 10 बजे तक सीबीआई को सौंपे जाएं। इससे पहले बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सोमवार को मामले की जांच सीबीआई को सौंपने की बात कही थी।

    अस्पताल के सेमिनार हॉल से मिला था महिला डॉक्टर का शव

    मालूम हो कि आरजी कर मेडिकल कॉलेज अस्पताल के सेमिनार हॉल से शुक्रवार सुबह एक जूनियर महिला डॉक्टर का अर्धनग्न शव बरामद किया गया था। शव के बरामद होने से पूरे अस्पताल परिसर में सनसनी फैल गई। मृतका पोस्ट ग्रेजुएट की द्वितीय वर्ष की छात्रा थी और अस्पताल के चेस्ट मेडिसिन डिपार्टमेंट में कार्यरत थी। उसका घर उत्तर 24 परगना जिले के सोदपुर इलाके में है।

    कोर्ट ने सुनी दलीलेंः अधिवक्ता

    वहीं, इस मामले में अधिवक्ता बिलवदल ने कहा कि सीएम ममता ने इस मामले की जांच सीबीआई से कराने की बात कही थी। हालांकि, उन्होंने इसके लिए एक समय निर्धारित किया था कि कुछ समय के बाद ही इसकी जांच केंद्रीय जांच एजेंसी को सौंपी जा सकती है। उन्होंने कहा कि इस मामले की जांच सीबीआई को सौंपने में देरी घातक साबित हो सकती है। उन्होंने इसके पीछे का तर्क दिया कि मामले से संबंधित कई सबूत नष्ट भी किए जा सकते हैं। इसलिए न्यायालय ने पक्षों की दलीलें सुनी हैं।

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