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    ‘विधानसभा में बोलने नहीं दिया जा रहा’, कुणाल घोष की याचिका कलकत्ता हाई कोर्ट से खारिज

    Updated: Fri, 07 Aug 2026 07:52 PM (GMT+05:30)

    तृणमूल कांग्रेस विधायक कुणाल घोष को विधानसभा में बोलने से रोकने के आरोप वाली याचिका पर कलकत्ता हाई कोर्ट से राहत नहीं मिली। ...और पढ़ें

    कुणाल घोष की याचिका कलकत्ता हाई कोर्ट ने खारिज की

    कुणाल घोष की याचिका कलकत्ता हाई कोर्ट ने खारिज की

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    राज्य ब्यूरो, कोलकाता। विधानसभा में जानबूझकर बोलने से रोके जाने का आरोप लगाने वाले बेलियाघाटा के ममतापंथी तृणमूल कांग्रेस विधायक कुणाल घोष को कलकत्ता हाई कोर्ट से राहत नहीं मिली।

    शुक्रवार को उनकी याचिका पर सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति कृष्ण राव की अदालत ने टिप्पणी की कि मामले में हस्तक्षेप की गुंजाइश नहीं है और याचिका स्वीकार्य नहीं है।

    कुणाल घोष की याचिका हाई कोर्ट ने खारिज की

    कुणाल ने आरोप लगाया था कि विधानसभा की महत्वपूर्ण चर्चाओं में उन्हें योजनाबद्ध तरीके से बोलने का अवसर नहीं दिया जा रहा है। उनका दावा था कि इससे उनके संवैधानिक अधिकार प्रभावित हो रहे हैं।

    उन्होंने आरोप लगाया था कि विरोध करने पर मार्शल के जरिये उन्हें सदन से बाहर कर दिया जाता है और उनके खिलाफ विशेषाधिकार हनन की कार्रवाई की जाती है।

    याचिका दायर करने से पहले कुणाल ने कहा था कि वह अब सत्तारूढ़ दल के भीतर ‘गले की हड्डी’ बन गए हैं और इसी कारण उन्हें सदन में बोलने से रोका जा रहा है।

    हालांकि सुनवाई के दौरान अदालत ने उनकी दलीलों को स्वीकार नहीं किया। हाई कोर्ट ने कहा कि विधानसभा कक्ष के भीतर विधायक को बोलने से रोकने जैसी शिकायत विधानसभा के समक्ष ही उठाई जानी चाहिए। अदालत ने इस मामले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया।

    विधानसभा के आंतरिक मामले में हस्तक्षेप से इनकार 

    कुणाल घोष स्वयं भी विधानसभा की कार्यवाही को लेकर विवादों में रहे हैं। इससे पहले विपक्ष के मुख्य सचेतक अखरुज्जमां को सदन में बोलने से रोकने का आरोप उन पर लगा था।

    इस मामले में उन्हें एक दिन के लिए विधानसभा से निलंबित किया गया था। ऐसे में हाई कोर्ट का शुक्रवार का फैसला विधानसभा की कार्यवाही और उसके आंतरिक मामलों में न्यायिक हस्तक्षेप की सीमा को लेकर महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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