कोलकाता मेट्रो की ब्लू लाइन में बड़ा तकनीकी अपग्रेड, अब एल्यूमिनियम थर्ड रेल सिस्टम से दौड़ेंगी तेज मेट्रो
कोलकाता मेट्रो की ब्लू लाइन में 40 साल पुराने स्टील थर्ड रेल सिस्टम को हटाकर अत्याधुनिक एल्यूमीनियम थर्ड रेल सिस्टम स्थापित किया गया है। यह बदलाव ट्रे ...और पढ़ें

HighLights
स्टील थर्ड रेल की जगह एल्यूमीनियम सिस्टम स्थापित।
तेज गति, बिजली बचत, कम कार्बन उत्सर्जन।
भविष्य में 150 सेकंड अंतराल पर मेट्रो सेवा।
राजीव कुमार झा, कोलकाता। कोलकाता मेट्रो ने अपनी ब्लू लाइन के भूमिगत हिस्से में बड़ा तकनीकी बदलाव करते हुए 40 साल पुराने स्टील आधारित थर्ड रेल सिस्टम को पूरी तरह हटाकर इसकी जगह अत्याधुनिक एल्यूमिनियम थर्ड रेल सिस्टम स्थापित कर दिया है।
मेट्रो अधिकारियों का कहना है कि इससे ट्रेनें अधिक तेज गति से चल सकेंगी, बिजली की भी बचत होगी और भविष्य में कम अंतराल पर मेट्रो सेवा संचालित करना आसान होगा। यह बदलाव ब्लू लाइन के नोआपाड़ा से दमदम और बेलगाछिया से महानायक उत्तम कुमार स्टेशन तक के भूमिगत हिस्से में किया गया है।
दरअसल, थर्ड रेल सिस्टम वह व्यवस्था होती है जिसके जरिए मेट्रो ट्रेनों को बिजली मिलती है। सामान्य रेलवे ट्रैक में दो पटरियां होती हैं, लेकिन मेट्रो लाइन के किनारे एक अतिरिक्त बिजली वाली लाइन लगाई जाती है, जिसे थर्ड रेल कहा जाता है। मेट्रो ट्रेन इससे बिजली लेकर चलती है। अब तक कोलकाता मेट्रो में यह स्टील की थी, लेकिन नई तकनीक के तहत इसे एल्यूमिनियम से बदल दिया गया है।
एल्यूमिनियम की विद्युत चालकता स्टील की तुलना में कई गुना अधिक
मेट्रो अधिकारियों के अनुसार, एल्यूमिनियम की विद्युत चालकता स्टील की तुलना में कई गुना अधिक होती है। एल्यूमिनियम की विद्युत चालकता 38 मिलियन सिमेन्स प्रति मीटर है, जबकि स्टील की केवल छह मिलियन सिमेन्स प्रति मीटर। आसान शब्दों में कहें तो नई प्रणाली में बिजली का नुकसान और वोल्टेज ड्राप काफी कम होगा और ट्रेनों को अधिक स्थिर व तेज ऊर्जा आपूर्ति मिलेगी। अधिकारियों के मुताबिक, इस तकनीकी उन्नयन के बाद भविष्य में हर 150 सेकेंड के अंतराल पर मेट्रो ट्रेन चलाने का लक्ष्य हासिल करने में मदद मिलेगी। मेट्रो रेलवे ने बताया कि वर्ष 2012 में रेलवे मंत्रालय ने निर्णय लिया था कि कोलकाता मेट्रो के सभी नए कारिडोर एल्यूमिनियम थर्ड रेल तकनीक पर आधारित होंगे। इसी दिशा में अब पुराने ब्लू लाइन के भूमिगत सेक्शन में भी यह बदलाव पूरा कर लिया गया है। पहले इस्तेमाल हो रहा स्टील थर्ड रेल सिस्टम स्टील अथारिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (सेल) द्वारा निर्मित था और चार दशकों से मेट्रो ट्रेनों को बिजली आपूर्ति कर रहा था।
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50 हजार टन कार्बन उत्सर्जन कम होगा
कोलकाता मेट्रो ने गुरुवार को एक बयान में बताया कि यह नई प्रणाली पर्यावरण के लिहाज से भी फायदेमंद है। एल्यूमिनियम में प्रतिरोध कम होने के कारण गर्मी कम पैदा होगी, जिससे सुरंगों में एयर कंडीशनिंग सिस्टम पर दबाव घटेगा और ऊर्जा की बचत होगी। अनुमान है कि इस परियोजना से इसके पूरे जीवनकाल में करीब 50 हजार टन कार्बन उत्सर्जन कम होगा। मेट्रो रेलवे ने कहा कि यह अपग्रेडेशन कोलकाता मेट्रो के व्यापक आधुनिकीकरण अभियान का हिस्सा है, जिसके तहत उन्नत सिग्नलिंग प्रणाली, अधिक ट्रेन सेवा और बेहतर यात्री सुविधा पर काम किया जा रहा है।