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    अंडे से डर लगता है तो राजनीति में क्यों? महुआ मोइत्रा की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी

    Updated: Fri, 07 Aug 2026 07:38 PM (IST)

    धार्मिक भावनाओं के कथित अपमान मामले में सुप्रीम कोर्ट ने तृणमूल सांसद महुआ मोइत्रा की वर्चुअल पेशी की मांग खारिज कर दी है। ...और पढ़ें

    सुप्रीम कोर्ट ने महुआ मोइत्रा की वर्चुअल पेशी ठुकराई

    सुप्रीम कोर्ट ने महुआ मोइत्रा की वर्चुअल पेशी ठुकराई

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    राज्य ब्यूरो, कोलकाता। धार्मिक भावनाओं के कथित अपमान के मामले में तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा को सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं मिली। अदालत ने थाने में उनकी वर्चुअल पेशी की मांग पर विचार करने से इन्कार कर दिया। इसके बाद महुआ के वकील को याचिका वापस लेने की अनुमति लेनी पड़ी। अब उन्हें 14 अगस्त को नदिया के होगलाबेड़िया थाने में व्यक्तिगत रूप से पेश होना होगा और जांच में सहयोग करना होगा।

    मामले में महुआ को कलकत्ता हाई कोर्ट से अक्टूबर तक गिरफ्तारी से संरक्षण मिला हुआ है। 21 जुलाई को कलकत्ता हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य की पीठ ने उन्हें जांच में सहयोग करने के साथ 14 अगस्त को थाने में सशरीर उपस्थित होने का निर्देश दिया था। इसी आदेश को चुनौती देते हुए महुआ सुप्रीम कोर्ट पहुंची थीं।

    सुप्रीम कोर्ट ने महुआ मोइत्रा की वर्चुअल पेशी ठुकराई

    शुक्रवार को न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति शील नागू की पीठ के समक्ष महुआ के वकील गोपाल शंकरनारायणन ने कहा कि उनकी मुवक्किल को थाने में पेश होने पर कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन यह प्रक्रिया वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए पूरी की जा सकती है। इस पर न्यायमूर्ति दत्ता ने सवाल किया कि क्या केवल इसलिए उन्हें यह सुविधा दी जाए क्योंकि वह सांसद हैं?

    वकील ने इसके बाद महुआ पर पहले हुए हमले का हवाला दिया। उन्होंने बताया कि पिछली बार इलाके में महुआ को निशाना बनाकर अंडे फेंके गए थे और उनके साथ कथित तौर पर दुर्व्यवहार किया गया था। आशंका जताई गई कि थाने में पेशी के दौरान फिर ऐसी स्थिति उत्पन्न हो सकती है।

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    अदालत ने कहा, राजनीति में अंडे से डर क्यों

    इस पर न्यायमूर्ति दत्ता ने स्वतंत्रता सेनानियों का उदाहरण देते हुए मौखिक टिप्पणी की,‘राजनीति में जब उतरी हैं, तो अंडे से डर क्यों? हमारे स्वतंत्रता सेनानियों ने तो सीने पर गोलियां खाई थीं।’ इसके बाद महुआ के वकील ने याचिका वापस लेने की अनुमति मांगी, जिसे अदालत ने मंजूर कर लिया। यानी हाई कोर्ट का आदेश प्रभावी रहेगा और महुआ को 14 अगस्त को थाने में व्यक्तिगत रूप से पेश होना होगा।

    महुआ पर एक जुलाई को नदिया में प्रदर्शन के दौरान अंडे और पत्थर फेंके जाने का आरोप है। उनके बुर्का संबंधी कथित बयान को लेकर विवाद के बाद उनके खिलाफ शिकायत दर्ज हुई थी। इस बीच तृणमूल नेता कुणाल घोष ने सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी पर सवाल उठाते हुए पूछा कि यदि अदालत भी सुरक्षा को लेकर ऐसी टिप्पणी करे तो महुआ सुरक्षा के लिए कहां जाएंगी।