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    ममता बनर्जी की TMC को मजबूत बनाने की रणनीति, कालीघाट में दीदी लगाएंगी 'जनता दरबार'

    Updated: Tue, 23 Jun 2026 09:31 PM (IST)

    ममता बनर्जी अब कालीघाट स्थित अपने आवास पर 'जनता दरबार' लगाएंगी, वहीं अभिषेक बनर्जी भी पार्टी कार्यालय में कार्यकर्ताओं से संवाद करेंगे। ...और पढ़ें

    ममता बनर्जी लगाएंगी जनता दरबार (फोटो-पीटीआई)

    ममता बनर्जी लगाएंगी जनता दरबार (फोटो-पीटीआई)

    HighLights

    1. ममता बनर्जी कालीघाट आवास पर रोजाना 'जनता दरबार' लगाएंगी।

    2. अभिषेक बनर्जी भी पार्टी कार्यालय में कार्यकर्ताओं से संवाद करेंगे।

    3. तृणमूल ने संगठन को मजबूत करने की नई रणनीति बनाई है।

    राज्य ब्यूरो, कोलकाता। पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी अब रोज कालीघाट स्थित अपने आवास पर दोपहर तीन बजे से शाम सात बजे तक 'जनता दरबार' लगाकर पार्टी नेताओं, कार्यकर्ताओं और आम लोगों से सीधे संवाद करेंगी।

    पार्टी कार्यालय में भी जनता दरबार आयोजित होगा, जहां सांसद व उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी मौजूद रहेंगे। इसके अलावा तृणमूल में लगातार हो रही टूट के बीच ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट ने संगठन को बचाने के लिए नई रणनीति बनाई है।

    पार्टी ने फैसला किया है कि शीर्ष नेतृत्व को छोड़कर बाकी संगठनात्मक समितियों में नेताओं की नियुक्ति जल्दबाजी में नहीं की जाएगी, ताकि उन्हें राजनीतिक निशाना बनने से बचाया जा सके।

    नेताओं को दल छोड़ने के लिए किया जा रहा मजबूर

    साथ ही संगठन को जमीनी स्तर पर फिर से मजबूत करने पर जोर दिया जाएगा। ममता समर्थक खेमे का दावा है कि नेताओं को दो तरीकों से दल छोड़ने के लिए मजबूर किया जा रहा है।

    पहला, डर दिखाकर और दूसरा, धन का प्रलोभन देकर। हालांकि फिलहाल पार्टी ने अदालत या चुनाव आयोग का दरवाजा खटखटाने के बजाय संगठन को मजबूत करने की रणनीति अपनाई है।

    साथ ही यह भी तय किया गया है कि भविष्य में आइपैक जैसी चुनावी रणनीतिकार संस्थाओं पर पूरी तरह निर्भर नहीं रहा जाएगा।

    विधानसभा चुनाव में हार के बाद पार्टी के कई नेताओं ने आइपैक की भूमिका पर सवाल उठाए थे। तृणमूल विधायक कुणाल घोष ने कहा कि ममता बनर्जी केवल निर्धारित समय ही नहीं, बल्कि देर रात तक फोन पर रहकर पार्टी की स्थिति पर नजर रख रही हैं।

    कुणाल घोष ने बागी खेमे पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे न तो अपने क्षेत्रों में जाते हैं और न ही कार्यकर्ताओं के संपर्क में रहते हैं।

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