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    ममता के किले में सेंध लगाने वालों को इनाम, शुभेंदु कैबिनेट में मतुआ-दलित और उत्तर बंगाल का दबदबा

    Updated: Mon, 01 Jun 2026 12:41 PM (IST)

    पश्चिम बंगाल में मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की कैबिनेट का विस्तार हुआ, जिसमें 35 नए मंत्रियों ने शपथ ली और कुल संख्या 41 हो गई। इस विस्तार में मतुआ, ...और पढ़ें

    बंगाल में मंत्रिमंडल विस्तार से शुभेंदु अधिकारी ने दिया गहरा संदेश। (फोटो-पीटीआई)

    बंगाल में मंत्रिमंडल विस्तार से शुभेंदु अधिकारी ने दिया गहरा संदेश। (फोटो-पीटीआई)

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    राज्य ब्यूरो, कोलकाता। बंगाल में मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की कैबिनेट का विस्तार हो गया है। आज राजभवन में भाजपा के 35 विधायकों को मंत्री पद की शपथ दिलाई गई। इस मेगा विस्तार के साथ ही शुभेंदु कैबिनेट के सदस्यों की संख्या अब 41 हो गई है।

    इससे पहले 9 मई को शुभेंदु अधिकारी ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी, जिसके साथ अग्निमित्रा पाल, दिलीप घोष, निशिथ प्रमाणिक, अशोक कीर्तनिया और खुदीराम टुडु ने मंत्री पद संभाला था। मंत्रिमंडल विस्तार का बारीक विश्लेषण करें तो साफ पता चलता है कि भाजपा ने उन वर्गों को निराश नहीं किया है जिन्होंने ममता बनर्जी के अभेद्य किले को ढहाने में अपनी पूरी ताकत झोंक दी थी।

    नए मंत्रियों की पूरी लिस्ट

    कैबिनेट मंत्री:

    1. दीपक बर्मन
    2. तापस राय
    3. डा. शंकर घोष
    4. मनोज कुमार उरांव
    5. अर्जुन सिंह
    6. गौरी शंकर घोष
    7. स्वपन दासगुप्ता
    8. जगन्नाथ चट्टोपाध्याय
    9. कल्याण चक्रवर्ती
    10. अजय पोद्दार
    11. शारद्वत मुखर्जी
    12. दूध कुमार मंडल
    13. अनूप कुमार दास

    राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार):

    14. डा. इंद्रनील खां
    15. मालती राभा राय
    16. राजेश महतो

    राज्य मंत्री:

    17. जुएल मुर्मू
    18. हरे कृष्ण बेरा
    19. आनंदमय बर्मन
    20. अशोक डिंडा
    21. नादिया चंद बाउड़ी
    22. विशाल लामा
    23. शांतनु प्रमाणिक
    24. मौमिता विश्वास मिश्रा
    25. उमेश राय
    26. पूर्णिमा चक्रवर्ती
    27. कौशिक चौधरी
    28. भास्कर भट्टाचार्य
    29. दिवाकर घरामी
    30. अमिय किस्कू
    31. कलिता माजी
    32. गार्गी दास घोष
    33. बिराज विश्वास
    34. दीपांकर जाना
    35. सुमना सरकार

    खबरें और भी

    मतुआ और दलित कार्ड

    अशोक कीर्तनिया को पहले ही जगह मिल चुकी थी और आज कलिता माजी, दिवाकर घरामी और नादिया चंद बाउरी जैसे चेहरों को शामिल कर भाजपा ने बंगाल के मतुआ और राजबंशी मतदाताओं को यह संदेश दिया है कि सत्ता में उनकी सीधी भागीदारी है।

    उत्तर बंगाल और चाय बागान

    शंकर घोष,आनंदमय बर्मन, विशाल लामा और मालती राभा राय को शामिल करना यह दिखाता है कि उत्तर बंगाल, जिसने हमेशा भाजपा का साथ दिया, अब राज्य की मुख्य नीति-निर्धारण प्रक्रिया का केंद्र बनेगा।

    जंगलमहल का आदिवासी नेतृत्व

    जुएल मुर्मू और अमिय किस्कू की कैबिनेट में एंट्री झारखंड और ओडिशा से सटे बंगाल के आदिवासी जिलों में भाजपा की पकड़ को और संस्थागत बनाएगी।

    प्रशासनिक और राजनीतिक चुनौतियां

    शुभेंदु अधिकारी की इस कैबिनेट के सामने चुनौतियां कम नहीं हैं। ममता बनर्जी के 15 साल के शासन के बाद प्रशासनिक तंत्र को राजनीति से मुक्त करना उनकी सबसे पहली प्राथमिकता होगी।

    कानून-व्यवस्था का पुनर्गठन

    चुनाव बाद की हिंसा और स्थानीय स्तर पर जबरन वसूली (कट-मनी) के खिलाफ शून्य सहिष्णुता की नीति लागू करना नए गृह मंत्री (जो संभवतः शुभेंदु अपने पास रख सकते हैं) के लिए सबसे बड़ी परीक्षा होगी।

    आर्थिक संकट और खजाना

    राज्य पर कर्ज का भारी बोझ है। ऐसे समय में लोक-लुभावन योजनाओं को जारी रखते हुए औद्योगिक निवेश को आकर्षित करना वित्त मंत्रालय के लिए तलवार की धार पर चलने जैसा होगा।

    कल्याणकारी योजनाओं का सुचारू संचालन

    राज्य भर में महिलाओं के लिए मुफ्त बस सेवा शुरू कर दी गई है और उन्हें 'जीरो बैलेंस' टिकट दिए जा रहे हैं, ऐसी योजनाओं को बिना किसी भ्रष्टाचार के सीधे लाभार्थियों तक पहुंचाना सरकार की विश्वसनीयता तय करेगा।

    मंत्रिमंडल विस्तार से क्या संकेत दिया गया?

    35 मंत्रियों के इस बड़े विस्तार के जरिए मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने तृणमूल कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों को यह स्पष्ट संकेत दे दिया है कि उनकी सरकार केवल एक कामचलाऊ व्यवस्था नहीं, बल्कि पांच साल के पूर्ण और स्थिर कार्यकाल के संकल्प के साथ आई है।

    तापस राय और अर्जुन सिंह जैसे नेताओं की कैबिनेट रैंक यह सुनिश्चित करेगी कि विधानसभा के भीतर विपक्ष के किसी भी आक्रामक रुख का करारा और विधायी जवाब दिया जा सके।

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