शुभेंदु के अंदाज पर फिदा फिरहाद-ऋतब्रत, सीएम ने बताई TMC छोड़ने की वजह
नवान्न में मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी और विपक्षी नेताओं की बैठक सौहार्दपूर्ण रही, जहां सीएम की मेहमाननवाजी ने सभी को प्रभावित किया। ...और पढ़ें

नवान्न में शुभेंदु अधिकारी ने विपक्षी नेताओं की मेजबानी की
HighLights
नवान्न में शुभेंदु अधिकारी ने विपक्षी नेताओं की मेजबानी की
फिरहाद हकीम ने सीएम की मेहमाननवाजी की सराहना की
शुभेंदु ने तृणमूल छोड़ने के कारण और 'भाइपो राज' बताया
राज्य ब्यूरो, कोलकाता। बंगाल की राजनीति में शुक्रवार को राज्य सचिवालय नवान्न का माहौल राजनीतिक मतभेदों से इतर सौहार्द और पुरानी यादों का गवाह बना।
एसआईआर ट्रिब्यूनल को लेकर चर्चा के लिए विपक्षी नेता ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व में 13 विधायक मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी से मिलने पहुंचे।
करीब डेढ़ घंटे चली बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने विपक्षी नेताओं के साथ खुलकर बातचीत की और उनके लिए शानदार मेहमाननवाजी भी की।
बैठक के बाद पूर्व सहयोगी फिरहाद हकीम समेत विपक्षी विधायक मुख्यमंत्री के आतिथ्य की चर्चा करते नजर आए।
शुभेंदु अधिकारी ने विपक्षी नेताओं की मेजबानी की
नवान्न में विपक्षी नेताओं के लिए फिशरोल, चिकन स्प्रिंग रोल, कलाकंद, मिठाई, कुकीज के साथ चाय और ब्लैक काफी की व्यवस्था की गई थी।
बैठक से लौटने के बाद फिरहाद हकीम ने कहा कि उन्होंने ज्योति बसु, बुद्धदेव भट्टाचार्य और ममता बनर्जी तीन मुख्यमंत्रियों को देखा है, लेकिन ऐसा आतिथ्य पहले कभी नहीं मिला। उन्होंने पुराने दौर के मुख्यमंत्री विधानचंद्र राय की मेहमाननवाजी की चर्चाओं का भी उल्लेख किया।
नवान्न की यह तस्वीर वर्ष 2014 की उस घटना की याद दिलाती है, जब तत्कालीन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से मुलाकात करने पहुंचे वाममोर्चा नेताओं को फिशफ्राई और काफी परोसी गई थी। बंगाल की राजनीति में उस मुलाकात को बाद में ‘फिशफ्राई डिप्लोमेसी’ कहा गया था।
शुभेंदु ने सुनाया तृणमूल छोड़ने का किस्सा
बैठक के दौरान पुराने राजनीतिक सहयोगियों के बीच शुभेंदु अधिकारी ने अपने तृणमूल कांग्रेस छोड़ने के दौर की यादें भी साझा कीं। उन्होंने फिरहाद हकीम की ओर इशारा करते हुए कहा कि उन्होंने तृणमूल क्यों छोड़ी, यह ‘बाबीदा’ (फिरहाद का प्रचलित नाम) लोग जानते हैं।
शुभेंदु ने कथित तौर पर 2011 के 21 जुलाई की एक घटना का उल्लेख करते हुए कहा कि मंच पर भाषण के दौरान उनके हाथ से माइक लेकर किसी और को दे दिया गया था।
उसी समय उन्हें लगा कि अब तृणमूल में रहना संभव नहीं है। उन्होंने ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी का नाम लिए बिना पार्टी में ‘भाइपो राज’ (भतीजा राज) शुरू होने को भी अपने फैसले से जोड़ा।