मदरसों में वंदे मातरम गाने के आदेश पर बवाल, हुमायूं कबीर ने कहा- धार्मिक मामलों में दखल बर्दाश्त नहीं
बंगाल सरकार द्वारा मदरसों में वंदे मातरम अनिवार्य करने के आदेश पर विवाद छिड़ गया है। हुमायूं कबीर समेत कई मुस्लिम संगठनों ने इसे धार्मिक मामलों में दख ...और पढ़ें

बंगाल में मदरसों में वंदे मातरम अनिवार्य करने पर विवाद (फाइल फोटो)
HighLights
मदरसों में वंदे मातरम अनिवार्य करने के आदेश पर विवाद।
हुमायूं कबीर ने धार्मिक मामलों में दखल का विरोध किया।
मुस्लिम संगठनों ने वंदे मातरम को थोपने पर आपत्ति जताई।
राज्य ब्यूरो, कोलकाता। शुभेंदु अधिकारी की अगुवाई वाली नई भाजपा सरकार द्वारा बंगाल के मदरसों में सुबह की प्रार्थना में वंदे मातरम गाने को अनिवार्य करने को लेकर बुधवार को जारी आदेश पर विवाद शुरू हो गया है। इस फैसले के बाद राजनीतिक और धार्मिक संगठनों की ओर से तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आई है।
आम जनता उन्नयन पार्टी के अध्यक्ष और पिछले साल बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले में बाबरी मस्जिद की नींव रखने वाले हुमायूं कबीर ने इस आदेश का गुरुवार को कड़ा विरोध करते हुए साफ कहा कि मदरसों में वंदे मातरम नहीं गाया जाएगा। उनका कहना है कि सरकार को धार्मिक शिक्षण संस्थानों के मामलों में दखल देने का अधिकार नहीं है।
इस फैसले का कुछ मुस्लिम संगठनों ने भी विरोध किया है। कोलकाता खिलाफत कमेटी के प्रमुख मोहम्मद अशरफ अली कासमी ने कहा कि सरकार को धर्म के आधार पर फैसले नहीं लेने चाहिए। उन्होंने कहा कि मुसलमान देश से प्रेम करते हैं, लेकिन पूजा केवल अल्लाह की करते हैं।
क्यों हैं वंदे मातरम से आपत्ति
उनके अनुसार, वंदे मातरम की कुछ पंक्तियां इस्लामिक मान्यताओं के अनुरूप नहीं हैं। इसलिए इसे मुस्लिम समुदाय पर थोपना उचित नहीं माना जा सकता। उन्होंने राज्य सरकार से इस फैसले को वापस लेने की मांग की है। वहीं, राज्य सरकार का कहना है कि राष्ट्रगीत का उद्देश्य देशभक्ति और राष्ट्रीय एकता की भावना को मजबूत करना है। अब यह मुद्दा बंगाल की राजनीति और धार्मिक संगठनों के बीच बहस का नया केंद्र बनता जा रहा है।
खबरें और भी
मालूम हो कि बंगाल के मदरसा शिक्षा निदेशालय की ओर से बुधवार को जारी आदेश में कहा गया है कि राज्य के सभी मान्यता प्राप्त व सरकारी सहायता और गैर सहायता प्राप्त मदरसों में कक्षाएं शुरू होने से पहले होने वाली प्रार्थना सभा में वंदे मातरम का गायन अनिवार्य होगा।
यह निर्देश अल्पसंख्यक मामले और मदरसा शिक्षा विभाग के अंतर्गत आने वाले सभी संस्थानों पर तत्काल प्रभाव से लागू किया गया है। इससे पहले राज्य सरकार ने सभी सरकारी स्कूलों के लिए भी इसी तरह का आदेश जारी किया था।
जब तक दुनिया है गाय की कुर्बानी होगी : हुमायूं कबीर
दूसरी ओर, बंगाल में खुले में नमाज और पशुओं की कुर्बानी पर रोक के आदेश पर भी हुमायूं कबीर ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि मुस्लिम समुदाय कुर्बानी के मुद्दे पर कोई समझौता नहीं करेगा। उन्होंने स्पष्ट कहा कि जब तक दुनिया है गाय की कुर्बानी होगी। इसे कोई नहीं रोक सकता। उन्होंने जोर दिया कि बंगाल में हर हाल में कुर्बानी होगी। गाय, बकरी, ऊंट सबकी कुर्बानी होगी