पहली बार सामने आईं सूर्य की सतह की हाई-रिजॉल्यूशन फोटो, दिखे अनोखे डायनैमिक पैटर्न
वैज्ञानिकों ने हवाई के डेनियल के. इनौये सोलर टेलीस्कोप से सूरज की सतह की अब तक की सबसे हाई-रिजॉल्यूशन तस्वीरें ली हैं। ...और पढ़ें
HighLights
टेलीस्कोप से ली गईं सूरज की हाई-रिजॉल्यूशन तस्वीरें।
सतह पर दिखे अनोखे पंखों जैसे पैटर्न और प्लाज्मा संरचनाएं।
सौर गतिविधियों और अंतरिक्ष मौसम को समझने में मिलेगी मदद।
डिजिटल डेस्क, वाशिंगटन। साइंटिस्ट्स ने सूरज की सतह की अब तक की सबसे हाई-रिजॉल्यूशन तस्वीरें खींची हैं। ये तस्वीरें हवाई के माउई आइलैंड पर मौजूद डेनियल के. इनौये सोलर टेलीस्कोप से ली गईं।
हवाई के माउई द्वीप पर मौजूद नेशनल साइंस फाउंडेशन के डैनियल के. इनौये सोलर टेलीस्कोप की मदद से सूरज की झुलसा देने वाली सतह को देख पाए।

असल में ये तस्वीरें टेलीस्कोप टेस्ट करने के लिए ली गई थीं। लेकिन रिजल्ट देखकर वैज्ञानिक हैरान रह गए। तस्वीरों में सूरज की चमकदार सतह पर अजीब पंखों जैसे पैटर्न और प्लाज्मा की महीन संरचनाएं साफ दिख रही हैं, जो पहले कभी नहीं देखी गई थीं।
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रिसर्च नेचर जर्नल में पब्लिश हुई है। वैज्ञानिक डॉ. फ्रेडरिक वोगर के मुताबिक इससे सौर गतिविधियों और अंतरिक्ष के मौसम को बेहतर समझने में मदद मिलेगी। साथ ही ये राज भी सुलझ सकता है कि सूरज का बाहरी वायुमंडल कोरोना, सतह से लाखों डिग्री ज्यादा गर्म क्यों है।
फ्लुइड्स और गर्म गैसें
वैज्ञानिकों ने सूरज पर जो चीज खोजी है, उसे केल्विन-हेल्महोल्ट्ज इंस्टेबिलिटी (Kelvin-Helmholtz instability) कहा जाता है।
यह घटना तब होती है जब फ्लुइड्स, इस मामले में गर्म गैसें, एक-दूसरे के ऊपर से गुजरती हैं और छोटी-छोटी हलचलें घूमते हुए भंवर का रूप ले लेती हैं। समुद्र में, इससे यह समझने में मदद मिलती है कि कैसे छोटी लहरें विशाल और शक्तिशाली लहरों में बदल जाती हैं।
गतिविधियों की समझ हुई आसान
NSO के डॉ. फ्रेडरिक वोएगर ने बताया कि सूरज की सतह पर इसे खोजने से न सिर्फ स्पेस वेदर के पीछे की गतिविधियों को समझने में मदद मिली, बल्कि यह भी पता चला कि सूरज की सतह इतनी गर्म क्यों है। इससे पता चलता है कि एनर्जी ऊपर की ओर कैसे पहुंचती है।
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उन्होंने कहा, जब ऊपरी परतों में काफी एनर्जी जमा हो जाती है, तो वह फ्लेयर या कोरोनल मास इजेक्शन के रूप में बाहर निकल सकती है।
फिजिक्स के नियम समझने में मिलती है मदद
NSO के डॉ. डेविड बोबोल्ट्ज ने कहा कि स्पेस वेदर से बचाव के अलावा, सूरज अनोखी प्रयोगशाला है क्योंकि यह हमारा सबसे करीबी तारा है। इससे हमें फिजिक्स के बुनियादी नियम समझने में मदद मिलती है।
आइंस्टीन की रिलेटिविटी का पहला सबूत भी सूरज ग्रहण से मिला था।इसलिए सिर्फ ज्ञान के लिए भी हमें सूरज पर ऐसे प्रयोग करते रहना चाहिए।