ईरान से यूरेनियम निकालने के लिए ट्रंप ने बनाया खास प्लान, लेकिन चुकानी होगी बड़ी कीमत; कैसे देंगे अंजाम?
राष्ट्रपति ट्रंप ईरान से लगभग 400 किलोग्राम संवर्धित यूरेनियम निकालने के लिए जमीनी ऑपरेशन पर विचार कर रहे हैं। इसका उद्देश्य ईरान को परमाणु हथियार बना ...और पढ़ें
HighLights
ट्रंप ईरान से 400 किलो संवर्धित यूरेनियम निकालने पर विचार।
ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोकने के लिए जमीनी ऑपरेशन।
यह अभियान अत्यधिक जोखिम भरा और जटिल साबित हो सकता है।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ईरान में ग्राउंड ऑपरेशन करने पर विचार रहे हैं। इस बात का दावा यूएस की मीडिया ने किया है। इस ऑपरेशन का मकसद लगभग 970 पाउंड (करीब 400 किलोग्राम) एनरिच्ड यूरेनियम को बाहर निकालना है, जिसका इस्तेमाल तेहरान संभावित रूप से परमाणु हथियार बनाने के लिए कर सकता है।
वॉल स्ट्रीट जर्नल ने अमेरिकी नेता के करीबी एक सूत्र के हवाले से बताया कि ट्रंप ने अपने सलाहकारों को इस बात के लिए तेहरान पर दबाव डालने को भी कहा है कि वे युद्ध खत्म करने की शर्त के तौर पर इस सामग्री को सौंपने पर सहमत हों।
'नहीं माना ईरान तो लगाएंगे ताकत'
रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप ने अमेरिका के राजनीतिक सहयोगियों को स्पष्ट संकेत दिया है कि तेहरान परमाणु सामग्री अपने पास नहीं रख सकता और उन्होंने इस बात पर चर्चा की है कि अगर ईरान बातचीत की मेज पर इसे नहीं सौंपता है तो इसे ताकत के जरिए हासिल किया जाएगा।

इृस बीच ट्रंप ने यह भी कहा कि पाकिस्तान के दूतों के जरिए अमेरिका और ईरान के बीच चल रही अप्रत्यक्ष बातचीत में प्रगति हो रही है। उन्होंने कहा, "काफी जल्दी कोई समझौता हो सकता है।" बता दें कि पाकिस्तान, मिस्र और तुर्की ने अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभाई है। हालांकि, अब तक वॉशिंगटन और तेहरान ने युद्ध को समाप्त करने के लिए सीधी बातचीत नहीं की है।
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'वादा पूरा करने के लिए किसी भी हद तक जा सकता हूं'
ट्रंप ने ईरान के खिलाफ युद्ध छेड़ने के लिए अलग-अलग कारण बताए हैं, लेकिन वे इस बात पर हमेशा कायम रहे हैं कि इस सैन्य कार्रवाई में इजरायल का साथ देने का उनका मुख्य मकसद यह सुनिश्चित करना था कि ईरान के पास कभी भी कोई परमाणु हथियार न हो।
साथ ही साथ उन्होंने कहा भी है कि ईरान के हथियार कार्यक्रम को हमेशा के लिए खत्म करने के अपने वादे को पूरा करने के लिए वे किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं।

रविवार रात ट्रंप ने युद्ध को और बढ़ाने की धमकी देते हुए कहा कि ईरान को वही करना होगा जिसकी अमेरिका मांग कर रहा है, वरना उनके पास कोई देश ही नहीं बचेगा। ईरान के यूरेनियम का जिक्र करते हुए ट्रंप ने कहा, "वे हमें सिर्फ न्यूक्लियर धूल ही देंगे।"
ट्रंप के प्लान में रिस्क है
यह एक जोखिम भरा और जटिल प्रोजेक्ट है, जिसके बारे में कई परमाणु विशेषज्ञों का मानना है कि इसे ईरान में अमेरिकी सैनिकों की बड़ी तैनाती के बिना पूरा नहीं किया जा सकता। रिपब्लिकन राष्ट्रपति के लिए यह एक खतरनाक और राजनीतिक रूप से संवेदनशील अभियान है।
वॉल स्ट्रीट जर्नल ने अमेरिका के पूर्व सैन्य अधिकारियों और विशेषज्ञों के हवाले से बताया कि जबरदस्ती यूरेनियम पर कब्जा करने की कोई भी कोशिश जटिल और खतरनाक होगी। इस संभावित ऑपरेशन से ईरान की ओर से जवाबी कार्रवाई होने की संभावना है और इससे युद्ध की अवधि भी 4-6 हफ्ते की उस समय-सीमा से काफी आगे बढ़ सकती है, जिसका जिक्र ट्रंप की टीम ने सार्वजनिक तौर पर किया है।

इसके अलावा, विशेषज्ञों ने कहा कि इस तरह के ऑपरेशन के लिए अमेरिकी सेना की टीमों को ईरानी ठिकानों में प्रवेश करना होगा और ऐसा करते समय उन्हें संभवतः तेहरान की सतह-से-हवा में मार करने वाली मिसाइलों और ड्रोन के हमले का सामना करना पड़ सकता है।
एक बार मौके पर पहुंचने के बाद अमेरिकी सैनिकों को सबसे पहले उस क्षेत्र की सुरक्षा सुनिश्चित करनी होगी, ताकि खुदाई के उपकरणों से लैस इंजीनियर मलबे की छानबीन करके वहां बिछाई गई बारूदी सुरंगों और जाल (booby traps) को निष्क्रिय कर सकें।
परमाणु सामग्री मिल जाने के बाद उसे निकालने के लिए एक विशेष ऑपरेशन टीम की जरूरत होगी। रिपोर्ट के अनुसार, अत्यधिक समृद्ध यूरेनियम संभवतः 40 से 50 विशेष सिलेंडरों में रखा है, जो स्कूबा टैंक जैसे दिखते हैं।
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