'ट्रंप की आव्रजन नीतियों से अमेरिकी इनोवेश को नुकसान, भारत को हो रहा फायदा', बोले विशेषज्ञ
ट्रंप प्रशासन की प्रतिबंधात्मक आव्रजन नीतियों से अमेरिका की नवाचार क्षमता कमजोर हो रही है, जबकि भारत जैसे देश अनुसंधान और स्टार्टअप विकास के लिए वैकल् ...और पढ़ें

'ट्रंप की आव्रजन नीतियों से अमेरिकी इनोवेश को नुकसान, भारत को हो रहा फायदा', बोले विशेषज्ञ
HighLights
ट्रंप नीतियों से अमेरिकी नवाचार कमजोर, प्रतिभाएं भारत जा रहीं।
भारत अनुसंधान और स्टार्टअप विकास का नया केंद्र बना।
विशेषज्ञ वाधवा ने भारत में तीव्र प्रगति का अनुभव किया।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सिलिकॉन वैली स्थित आव्रजन विशेषज्ञ विवेक वाधवा के अनुसार, ट्रंप प्रशासन के दौरान लागू की गई अमेरिका की प्रतिबंधात्मक आव्रजन नीतियां वैश्विक प्रतिभाओं को दूसरी जगह धकेलकर अमेरिका की नवाचार को कमजोर कर रही है।
वाधवा ने कहा कि सख्त वीजा नियम, बढ़ते लंबित आवेदन और दीर्घकालिक निवास को लेकर अनिश्चितता के कारण अमेरिका कुशल प्रवासियों के लिए कम आकर्षक होता जा रहा है, जबकि भारत जैसे देश अनुसंधान और स्टार्टअप विकास के लिए वैकल्पिक केंद्रों के रूप में तेजी से उभर रहे हैं।
वाधवा ने कहा, ''हम सर्वश्रेष्ठ और प्रतिभाशाली लोगों को दूर भगा रहे हैं। ये पिछड़ी आव्रजन नीतियां अब बहुत नुकसान पहुंचा रही हैं।'' उन्होंने चेतावनी दी कि अमेरिका विज्ञान और प्रौद्योगिकी में अपनी प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त को लगातार खो रहा है। उन्होंने सिलिकान वैली में आप्रवासियों द्वारा स्थापित स्टार्टअप में दीर्घकालिक गिरावट को इस बदलाव का प्रमाण बताया।
उन्होंने कहा, ''सिलिकॉन वैली में आधे स्टार्टअप की स्थापना हम जैसे लोगों ने की थी। एक दशक में यह संख्या घटकर 40 प्रतिशत रह गई और अब शायद 30 प्रतिशत के आसपास है।'' वाधवा ने सिलिकॉन वैली में एक मेडिकल डायग्नोस्टिक्स कंपनी स्थापित करने के अपने अनुभव का भी जिक्र किया।
उन्होंने बताया कि अमेरिकी तकनीकी जगत में अपने व्यापक नेटवर्क के बावजूद उन्हें फंडिंग और विशेषज्ञ प्रतिभाओं को आकर्षित करने में संघर्ष करना पड़ा। उन्होंने कहा, “मुझे यहां प्रतिभा नहीं मिली। मुझे यहां पैसा भी नहीं मिला।''
निवेशक अमेरिका के बाहर किए जाने वाले शोध-प्रधान कार्यों में निवेश से हिचकिचा रहे थे। अंतत: उन्होंने परियोजना के प्रमुख हिस्सों को भारत स्थानांतरित कर दिया और आईआईटी मद्रास और अखिल भारतीय आयुर्वेद विज्ञान संस्थान जैसे संस्थानों के साथ मिलकर काम किया।
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वाधवा के अनुसार, भारत में टीमों ने तीव्र प्रगति हासिल की। उन्होंने कहा, ''एक साल के भीतर ही उन्होंने ऐसी सफलताएं हासिल कीं, जिनकी अमेरिका में कल्पना भी नहीं की जा सकती थी।'' वधवा ने इसका श्रेय भारत की इंटरडिसिप्लिनरी साइंस में गहरी विशेषज्ञता को दिया। उन्होंने कहा कि अमेरिकी स्टार्टअप इकोसिस्टम में इस तरह की प्रतिभा की कमी है।
(न्यूज एजेंसी आईएएनएस के इनपुट के साथ)
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