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    चीन की PLA क्यों नहीं कर सकती Delta Force जैसा मादुरो को पकड़ने वाला ऑपरेशन?

    Updated: Mon, 12 Jan 2026 11:21 PM (IST)

    अमेरिकी डेल्टा फोर्स द्वारा वेनेजुएला में मादुरो को पकड़ने की सटीक कार्रवाई के बाद, चीन में यह बहस छिड़ गई है कि क्या पीएलए ताइवान के खिलाफ ऐसा ही ऑपर ...और पढ़ें

    यूएस की डेल्टा फोर्स का ऑपरेशन।

    यूएस की डेल्टा फोर्स का ऑपरेशन।

    डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। वेनेजुएला ऑपरेशन में अमेरिका की जबरदस्त सटीकता को देखते हुए अब इस बात पर बहस हो रही है कि क्या चीन भी इसी तरह का सर्जिकल स्ट्राइक कर सकता है?

    दरअसल, तीन घंटे से भी कम समय में निकोलस मादुरो को कराकस से निकालकर डेल्टा फोर्स ने अपने कब्जे में कर लिया और इसके बाद से चीन में ऑनलाइन बहस छिड़ गई है कि चीन ताइवान के खिलाफ इसी तरह का ऑपरेशन क्यों नहीं कर सकता?

    एनालिस्ट्स का क्या कहना है?

    • एनालिस्ट्स का कहना है कि यह तुलना लुभावनी तो लगती है लेकिन बहुत गुमराह करने वाली है। SCMP की एक रिपोर्ट के अनुसार, मादुरो ऑपरेशन ने अमेरिका-चीन मिलिट्री मुकाबले में एक बड़ी असमानता को दिखाया है।
    • भले ही चीन ने दो दशकों में अपनी सेना को बहुत तेजी से मॉडर्न बनाया हो। उसके पास स्टेल्थ फाइटर, एडवांस्ड मिसाइलें, मॉडर्न नेवल प्लेटफॉर्म, साइबर और स्पेस फोर्स और हजारों की संख्या में एलीट सैनिक हैं। फिर भी पेंटागन और इंडिपेंडेंट एनालिस्ट इस बात से सहमत हैं कि बीजिंग के पास अभी भी ऐसे बहुत सटीक, राजनीतिक रूप से संवेदनशील ऑपरेशन करने के लिए जरूरी ऑर्गनाइजेशनल स्ट्रक्चर की कमी है, जो बिना किसी गलती के हो सके।
    • अमेरिकी हमला इस बात का एक बेहतरीन उदाहरण था जिसे आधुनिक सेनाएं ऑल-डोमेन ऑपरेशंस कहती हैं: इंटेलिजेंस, साइबर, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर, हवाई ताकत, स्पेशल ऑपरेशंस फोर्सेज और लॉजिस्टिक्स का सही समय पर एक साथ आना।
    • किसी एक चीज ने ऑपरेशन को निर्णायक नहीं बनाया। इंटेलिजेंस ने टारगेट की पहचान की। इलेक्ट्रॉनिक युद्ध ने सुरक्षा प्रणालियों को दबा दिया। एविएशन एसेट्स ने हमलावर फोर्स को अंदर पहुंचाया और बाहर निकाला। कमांड-एंड-कंट्रोल सिस्टम ने हर कदम को सिंक्रोनाइज किया।

    चीन के पास किस चीज की है कमी?

    इसके उलट, चीन के पास अलग-अलग कॉम्पोनेंट तो हैं लेकिन उन्हें एक सिंगल, फुर्तीले सिस्टम में जोड़ने की वैसी क्षमता नहीं है।

    पेंटागन की कांग्रेस को दी गई 2025 की रिपोर्ट में यह साफ-साफ कहा गया है कि पीपल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) के पास 20,000 से 30,000 स्पेशल ऑपरेशंस कर्मी हैं, लेकिन उसके पास सभी SOF गतिविधियों के लिए जिम्मेदार कोई राष्ट्रीय-स्तर का स्पेशल ऑपरेशंस कमांड नहीं है, जिससे एलीट यूनिट्स ट्रांसपोर्ट, लॉजिस्टिक्स और सपोर्ट के लिए पारंपरिक सेनाओं पर निर्भर रहती हैं।

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