'मुझे नहीं पता था वह अपराधी है', कनाडा में भारतीय युवक का दावा; लॉरेंस गैंग से कनेक्शन के आरोपों पर दी सफाई
कनाडा में एक भारतीय युवक जशनदीप सिंह अर्श डल्ला से कथित संबंधों के कारण निर्वासन का सामना कर रहा है। युवक ने दावा किया कि उसे डल्ला के आपराधिक गिरोह स ...और पढ़ें
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कनाडा में भारतीय युवक का दावा (फाइल फोटो)
HighLights
भारतीय युवक जशनदीप सिंह कनाडा से निर्वासन का सामना कर रहा।
अर्श डल्ला से संबंधों पर युवक ने अनभिज्ञता जताई।
कहा, उसे डल्ला के अपराधी होने की जानकारी नहीं थी।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। कनाडा में जबरन वसूली और गोलीबारी से जुड़े मामलों में नाम आने के बाद एक भारतीय युवक ने दावा किया है कि उसे यह जानकारी नहीं थी कि उसका दोस्त अर्शदीप सिंह गिल उर्फ अर्श डल्ला किसी आपराधिक गिरोह से जुड़ा हुआ है।
अर्श डल्ला, प्रतिबंधित खालिस्तान टाइगर फोर्स का वास्तविक प्रमुख माना जाता है और उसका नाम लॉरेंस बिश्नोई गैंग से भी जोड़ा जाता रहा है। भारत में भी वह वांछित अपराधी है। कनाडाई आव्रजन अधिकारी अब उसके दोस्त जशनदीप सिंह को अर्श डल्ला से संबंधों और पिछले साल अगस्त में हुई एक गोलीबारी की घटना के कारण देश से निर्वासित करने की तैयारी कर रहे हैं।
निर्वासन सुनवाई के दौरान जशनदीप सिंह ने खुद को निर्दोष बताते हुए कहा कि वह किसी गैंग का सदस्य नहीं है और उसे यह भी नहीं पता था कि अर्श डल्ला एक अपराधी है। उसने कहा कि उसकी गलती सिर्फ इतनी थी कि उसने कभी यह नहीं पूछा कि डल्ला के पास बंदूक क्यों थी। उसे लगा था कि वह शायद खिलौना बंदूक होगी।
छात्र बनकर गया था कनाडा
पंजाबी दुभाषिये की मदद से सुनवाई में जशनदीप ने बताया कि वह चार साल पहले छात्र के रूप में कनाडा आया था और फिलहाल अपने पोस्ट-ग्रेजुएट वर्क परमिट का इंतजार कर रहा है। उसने बताया कि वह कनाडा में अपनी बहन और जीजा के साथ रहता है। उसके माता-पिता ने बेहतर भविष्य की उम्मीद में उसे विदेश भेजा था, लेकिन अब उसे उनकी आंखों में देखने में शर्म महसूस होती है।
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जशनदीप के अनुसार, अर्श डल्ला उसका कॉलेज का दोस्त था। दोनों ने एक समय अमेजन के एक वेयरहाउस में साथ काम किया था। बाद में डल्ला कैलगरी चला गया, जबकि जशनदीप एडमोंटन में ही रहा।
गोलीबारी वाली घटना का जिक्र
सुनवाई के दौरान जशनदीप ने स्वीकार किया कि वह उस कार में मौजूद था, जिससे अर्श डल्ला उस स्थान पर गया था जहां उसने हवा में कई गोलियां चलाई थीं। उसने बताया कि गोलीबारी से एक दिन पहले डल्ला का फोन आया था। उसने जन्मदिन के कारण एडमोंटन स्थित उसके घर में रुकने की अनुमति मांगी थी। जशनदीप के अनुसार, घर पहुंचने के बाद डल्ला ने अपने बैग से बंदूक निकाली और सभी को दिखाने लगा।
जशनदीप ने कहा कि उसे यह नहीं पता था कि बंदूक लाइसेंसी थी या अवैध। उसने बताया कि उसने मजाक में बंदूक हाथ में लेकर अपने एक दोस्त के सिर पर रख दी थी, जबकि वे फिल्म देख रहे थे। उसका कहना है कि अगर उसे पता होता कि बंदूक कहां से आई है, तो वह डल्ला को अपने घर में नहीं रहने देता।
बिश्नोई गैंग के पत्र का भी जिक्र
अगस्त की घटना के बाद अर्श डल्ला को गिरफ्तार कर लिया गया था। इससे पहले की एक गवाही में यह भी कहा गया था कि जशनदीप ने बाद में बंदूक को हटाने के लिए किसी अन्य दोस्त को दे दिया था।
निर्वासन सुनवाई के दौरान कनाडाई पुलिस ने यह भी जानकारी दी कि पिछले वर्ष लॉरेंस बिश्नोई गैंग की ओर से एक पत्र भेजा गया था, जिसमें दावा किया गया था कि दक्षिण एशियाई मूल के लोगों से वसूली करने के लिए पूरे कनाडा में गोलीबारी करने को तैयार एक हजार से अधिक शूटर मौजूद हैं।
पुलिस के अनुसार, पत्र में गिरोह के आपराधिक नेटवर्क का विस्तार से उल्लेख किया गया था। जांच एजेंसियों का मानना है कि अर्श डल्ला, भारत में जेल में बंद लॉरेंस बिश्नोई से जुड़े एक अंतरराष्ट्रीय आपराधिक नेटवर्क का हिस्सा है। यह नेटवर्क कथित तौर पर कनाडा में रहने वाले भारतीय मूल के अपराधियों का इस्तेमाल कर जबरन वसूली और गोलीबारी जैसी घटनाओं को अंजाम देता है।