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    कनाडा में सोशल मीडिया पर बैन: संसद में बिल C-34 पेश, बच्चे नहीं चला सकेंगे WhatsApp-Instagram

    Updated: Thu, 11 Jun 2026 07:28 PM (GMT+05:30)

    कनाडा सरकार ने बच्चों की इंटरनेट मीडिया पहुंच सीमित करने के लिए संसद में बिल सी-34 पेश किया है। ...और पढ़ें

    कनाडा में सोशल मीडिया बैन (प्रतीकात्मक फोटो)

    कनाडा में सोशल मीडिया बैन (प्रतीकात्मक फोटो)

    HighLights

    1. कनाडा में 16 वर्ष से कम बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर प्रतिबंध।

    2. सरकार ने ऑनलाइन नुकसान रोकने के लिए बिल C-34 पेश किया।

    3. उल्लंघन पर कंपनियों को भारी जुर्माना देना होगा।

    डिजिटल डेस्क, ओटावा। कनाडा सरकार ने 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों की इंटरनेट मीडिया तक पहुंच सीमित करने के उद्देश्य से संसद में बिल सी-34 पेश किया है।

    प्रस्तावित कानून के तहत इस आयु वर्ग के बच्चों के लिए इंटरनेट मीडिया अकाउंट बनाने पर रोक लगाने का प्रविधान है। हालांकि, वे कंपनियां छूट पा सकेंगी जो बच्चों की सुरक्षा के लिए पर्याप्त और प्रभावी उपाय लागू होने का प्रमाण देंगी।

    सोशल मीडिया पर बैन

    कनाडा के पहचान एवं संस्कृति मंत्री मार्क मिलर ने बुधवार को विधेयक पेश करते हुए इसे ऑनलाइन नुकसान रोकने की दिशा में सरकार का महत्वपूर्ण कदम बताया।

    प्रस्तावित कानून इंटरनेट मीडिया प्लेटफॉर्मों के साथ-साथ एआइ चैटबाट सेवाओं पर भी नई सुरक्षा जिम्मेदारियां लागू करेगा। इसके तहत 'डिजिटल सेफ्टी कमीशन ऑफ कनाडा' का गठन किया जाएगा, जो नए नियमों के अनुपालन की निगरानी करेगा।

    कानून का उल्लंघन करने वाली कंपनियों पर एक करोड़ कनाडाई डॉलर या उनकी वैश्विक आय के तीन प्रतिशत, जो भी अधिक हो, तक का जुर्माना लगाया जा सकेगा।

    सरकार का कहना है कि मौजूदा कानून नुकसान होने के बाद कार्रवाई करते हैं, जबकि नया कानून बच्चों को संभावित ऑनलाइन खतरों से पहले ही बचाने पर केंद्रित होगा।

    कनाडा इस दिशा में कदम बढ़ाने वाला नवीनतम देश होगा। इससे पहले आस्ट्रेलिया 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए इंटरनेट मीडिया पहुंच पर राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिबंध लागू कर चुका है। ब्रिटेन, फ्रांस, ग्रीस, स्पेन और मलेशिया भी बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा के लिए ऐसे उपायों पर विचार कर रहे हैं।

    हालांकि, प्रस्तावित कानून का कुछ राजनीतिक दलों ने विरोध भी किया है। विपक्षी कंजर्वेटिव पार्टी का कहना है कि इसके कुछ प्रविधान अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को प्रभावित कर सकते हैं।

    मंत्री मिलर ने स्वीकार किया कि कानून के पहले संस्करण में जरूरत से ज्यादा हस्तक्षेप वाले प्रविधान थे, जिन्हें अब संशोधित किया गया है।

    (समाचार एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ)

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