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    ईरान युद्ध से पहले ही चीन ने बना लिया था दुनिया का सबसे बड़ा तेल भंडार, IEA की रिपोर्ट में खुलासा

    Updated: Fri, 24 Apr 2026 07:37 AM (IST)

    ईरान युद्ध से पहले चीन ने 1.4 अरब बैरल कच्चे तेल का विशाल भंडार जमा कर लिया है, जो उसे दुनिया का सबसे बड़ा तेल स्टॉकपाइल बनाता है। यह कदम वैश्विक मांग ...और पढ़ें

    ईरान युद्ध से पहले चीन ने भरा तेल का भंडार बना दुनिया का सबसे बड़ा स्टॉकपाइल (AI द्वारा जनरेटेड फोटो)

    ईरान युद्ध से पहले चीन ने भरा तेल का भंडार बना दुनिया का सबसे बड़ा स्टॉकपाइल (AI द्वारा जनरेटेड फोटो)

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    डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। ईरान युद्ध शुरू होने से पहले ही चीन ने बड़े पैमाने पर कच्चे तेल का भंडारण कर लिया था। अमेरिका के सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 2026 की शुरुआत तक भी चीन लगातार अपने तेल भंडार को बढ़ाता रहा।

    रिपोर्ट में बताया गया है कि चीन ने 2025 के अंत तक करीब 1.4 अरब बैरल तेल जमा कर लिया था, जो दुनिया में सबसे ज्यादा है। इसके मुकाबले इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (IEA) के 32 देशों के पास मिलाकर करीब 1.2 अरब बैरल तेल है। चीन दुनिया का सबसे बड़ा कच्चा तेल आयातक है, इसलिए उसने भविष्य के संकट को देखते हुए पहले से तैयारी कर ली थी। इसे विशेषज्ञों ने एक रणनीतिक और समझदारी भरा कदम बताया है।

    क्यों बढ़ाया चीन ने तेल भंडार?

    • रिपोर्ट के अनुसार, चीन ने तीन मुख्य कारणों से तेल का भंडारण बढ़ाया। पहला, वैश्विक मांग कमजोर होने से तेल की कीमतें कम थीं, जिससे सस्ता तेल खरीदने का मौका मिला।
    • दूसरा, रूस, ईरान और वेनेजुएला जैसे देशों पर प्रतिबंध और सप्लाई में बाधा का खतरा बढ़ रहा था, जिससे भविष्य में तेल की कमी की आशंका थी।
    • तीसरा, चीन ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए कंपनियों को ज्यादा तेल भंडार रखने का निर्देश दिया है, ताकि लंबे समय तक आपूर्ति बनी रहे।

    ईरान युद्ध का असर

    ईरान युद्ध के कारण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तेल आपूर्ति प्रभावित हुई है, जहां से दुनिया का करीब पांचवां हिस्सा तेल गुजरता है। ऐसे में चीन का बड़ा भंडार उसके लिए फायदे का सौदा साबित हो सकता है।

    वहीं अमेरिका ने अपने रणनीतिक भंडार से तेल निकालना शुरू कर दिया है। अप्रैल में करीब 80 लाख बैरल तेल बेचा गया और अब उसके पास करीब 40 करोड़ बैरल के आसपास भंडार बचा है।

    ईरान ने भी साफ कहा है कि जब तक अमेरिका उसके बंदरगाहों पर रोक हटाएगा नहीं, तब तक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को पूरी तरह खोलने की संभावना नहीं है, जिससे वैश्विक तेल बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है।

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