ईरान युद्ध के महीनेभर बाद भी अपने पांच लक्ष्यों से दूर ट्रंप, कई रणनीतिक लक्ष्य अब भी अधूरे
व्हाइट हाउस का दावा है कि अभियान तय समय से आगे चल रहा है, लेकिन जमीनी हालात बताते हैं कि कई रणनीतिक लक्ष्य अब भी अधूरे हैं। ...और पढ़ें

ईरान युद्ध के महीनेभर बाद भी अपने पांच लक्ष्यों से दूर ट्रंप
HighLights
मिसाइल क्षमता और परमाणु कार्यक्रम पर हमलों के बावजूद ईरान अब भी जवाबी कार्रवाई में सक्षम
होर्मुज, क्षेत्रीय सुरक्षा और सहयोगी देशों की रक्षा पर अमेरिकी रणनीति अब भी अस्पष्ट
एपी, वाशिंगटन। ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य अभियान 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' को एक महीना पूरा होने पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिए हैं कि अमेरिका अब इस संघर्ष को धीरे-धीरे समेटने की दिशा में बढ़ सकता है, जबकि उनके घोषित पांच प्रमुख उद्देश्य अभी पूरी तरह हासिल नहीं हो सके हैं।
व्हाइट हाउस का दावा है कि अभियान तय समय से आगे चल रहा है, लेकिन जमीनी हालात बताते हैं कि कई रणनीतिक लक्ष्य अब भी अधूरे हैं।
पहला लक्ष्य: ईरान की मिसाइल क्षमता पूरी तरह नष्ट करना
ट्रंप ने युद्ध के शुरुआती चरण में कहा था कि ईरान की मिसाइल क्षमता को पूरी तरह खत्म कर उसके मिसाइल उद्योग को जड़ से नष्ट करना अमेरिकी प्राथमिकता है।
व्हाइट हाउस के अनुसार ईरान के लगभग 90 प्रतिशत मिसाइल लांचर और बड़ी संख्या में मिसाइलें नष्ट की जा चुकी हैं। ड्रोन निर्माण इकाइयों को भी भारी नुकसान पहुंचा है। इसके बावजूद ईरान अब भी इजरायल की ओर मिसाइल और ड्रोन दाग रहा है, जिससे स्पष्ट है कि उसकी जवाबी क्षमता समाप्त नहीं हुई।
दूसरा लक्ष्य: रक्षा उत्पादन ढांचे को ध्वस्त करना
अमेरिका ने मिसाइल, ड्रोन और हथियार निर्माण से जुड़े कई सैन्य प्रतिष्ठानों पर हमले किए हैं। अमेरिकी सेंट्रल कमांड का दावा है कि हथियार उत्पादन तंत्र को गंभीर क्षति पहुंची है। फिर भी ईरान समर्थित सैन्य गतिविधियां क्षेत्र में जारी हैं और खाड़ी क्षेत्र में हमलों की आशंका बनी हुई है। इससे रक्षा औद्योगिक आधार को पूरी तरह निष्कि्रय करने का लक्ष्य अधूरा माना जा रहा है।
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तीसरा लक्ष्य: नौसेना और वायुसेना को निष्क्रिय करना
अमेरिका और इजरायल ने ईरानी हवाई क्षेत्र में तेजी से बढ़त बनाई और लगभग बिना चुनौती के हवाई अभियान चलाया। अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ के अनुसार 150 से अधिक ईरानी नौसैनिक पोत क्षतिग्रस्त या नष्ट किए गए हैं। मार्च की शुरुआत में अमेरिकी पनडुब्बी द्वारा एक ईरानी युद्धपोत डुबोया गया, लेकिन ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड नौसेना के छोटे पोत अब भी सक्रिय हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरानी मिसाइलों के कारण समुद्री यातायात प्रभावित हो रहा है।
चौथा लक्ष्य: ईरान को परमाणु क्षमता से दूर रखना
ट्रंप पहले कह चुके हैं कि ईरान का परमाणु कार्यक्रम नष्ट कर दिया गया है, लेकिन अब भी परमाणु ढांचे पर हमले जारी हैं। शुक्रवार को भारी जल संयंत्र और येलोकेक उत्पादन केंद्र पर हमले हुए, जिनकी जिम्मेदारी इजरायल ने ली।
सबसे बड़ा प्रश्न लगभग 970 पाउंड संवर्धित यूरेनियम का है, जो पर्वतीय भूमिगत केंद्र में सुरक्षित माना जा रहा है। ट्रंप ने पहली बार कहा है कि अमेरिका किसी समझौते की स्थिति में इस यूरेनियम को अपने नियंत्रण में लेना चाहता है, लेकिन विशेषज्ञ इसे अत्यंत जोखिमपूर्ण मानते हैं।
पांचवां लक्ष्य: पश्चिम एशिया के सहयोगी देशों की सुरक्षा
ट्रंप ने हाल में कहा कि इजरायल, सऊदी अरब, कतर, यूएई, बहरीन और कुवैत जैसे सहयोगी देशों की उच्चतम स्तर पर सुरक्षा सुनिश्चित करना अमेरिकी लक्ष्य है। अमेरिका पहले से क्षेत्र में हजारों सैनिक तैनात किए हुए है, लेकिन ईरान अब भी इन देशों को निशाना बनाने की क्षमता रखता है। होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने की समयसीमा ट्रंप ने 6 अप्रैल तक बढ़ा दी है।
सत्ता परिवर्तन अब भी आधिकारिक लक्ष्य नहीं
ट्रंप लगातार ईरानी जनता से सत्ता परिवर्तन का आह्वान करते रहे हैं, लेकिन शासन परिवर्तन को औपचारिक लक्ष्य घोषित नहीं किया गया है। ट्रंप का कहना है कि ईरानी नेतृत्व काफी हद तक कमजोर हो चुका है, फिर भी अमेरिका अब उसी शासन के कुछ नेताओं से बातचीत की बात कर रहा है, जबकि तेहरान सार्वजनिक रूप से किसी वार्ता से इन्कार कर रहा है।