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    आंखों पर पट्टी, घुटनों पर बैठाया... जब ईरान में पकड़े गए थे अमेरिकी सैनिक; तब क्या हुआ था?

    Updated: Sat, 04 Apr 2026 07:00 PM (GMT+05:30)

    ईरान ने हाल ही में एक अमेरिकी F-15E लड़ाकू विमान मार गिराया, जिसमें एक क्रू सदस्य लापता है। ईरान ने लापता पायलट को पकड़ने के लिए इनाम की घोषणा की है, ...और पढ़ें

    ईरान ने पहले भी अमेरिकी सैनिकों को बनाया बंधक। (रॉयटर्स)

    ईरान ने पहले भी अमेरिकी सैनिकों को बनाया बंधक। (रॉयटर्स)

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    डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। 35 से जारी युद्ध में ईरान के अंदर कोई भी अमेरिकी विमान नष्ट नहीं हुआ था, लेकिन शुक्रवार को यह स्थिति बदल गई। ईरान ने एक F-15E को मार गिराया जिसमें एक क्रू को बचा लिया गया, वहीं दूसरे सदस्य को खोजने के लिए अमेरिकी सेना और ईरानी नागरिकों में होड़ मची हुई है।

    शनिवार को ईरान ने एक अमेरिकी F-15E लड़ाकू विमान को मार गिराया, जो 28 फरवरी को युद्ध शुरू होने के बाद ईरानी क्षेत्र के अंदर किसी अमेरिकी सेना विमान के नष्ट होने का पहला पुष्ट मामला है।

    F-15E को दो क्रू एक साथ मिलकर उड़ाते हैं, जिसमें एक पायलट और पिछली सीट पर बैठा एक वैपन सिस्टम ऑफिसर शामिल होता है। अमेरिकी सेना ने चालक दल के दो सदस्यों में से एक का पता लगाकर उसे बचा लिया वहीं दूसरा सदस्य अभी भी लापता है।

    तेहरान ने की इनाम की घोषणा

    अमेरिकी विमान गिराए जाने के कुछ ही घंटों के भीतर, ईरान की मीडिया ने एक सार्वजनिक घोषण प्रसारित की जिसमें कहा गया कि प्रिय सम्मानित नागरिकों, यदि आप दुश्मन पायलट या पायलटों को जीवित पकड़कर पुलिस या सैन्य बलों के हवाले करते हैं तो आपको एक कीमती इनाम और बोनस दिया जाएगा।

    इस घोषणा ने वॉशिंगटन और तेहरान के बीच एक ऐसी होड़ शुरू कर दी, जिसका मकसद लापता क्रू तक सबसे पहले पहुंचना है। ईरान पहले भी ऐसा कर चुका है। यदि ईरान लापता वायुसैनिक को पकड़ लेता है, तो यह पहली बार नहीं होगा जब तेहरान ने अमेरिकी कर्मियों को हिरासत में लिया हो।

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    ईरान ने पहले भी अमेरिकियों को पकड़ा

    आज से लगभग 5 दशक पहले, 4 नबंबर 1979 को, ईरान के अपदस्थ शाह के कैंसर के इलाज के लिए न्यूयॉर्क पहुंचने के बाद, आयातुल्ला समर्थक छात्रों ने तेहरान स्थित अमेरिका दूतावास में घुसकर 66 अमेरिकियों को बंधक बना लिया था, जिसमें राजनयिक, सैन्य अटैच और अमेरिकी मरीन दूतावास गार्ड शामिल थे।

    इनमें से 52 लोगों को 444 दिनों तक बंधक बनाकर रखा गया और आखिरकार 20 जनवरी 1981 को राष्ट्रपति रोनाल्ड रीगन के अपना उद्घाटन भाषण देने देने के कुछ ही घंटों के बाद उन्हें रिहा कर दिया गया।

    2016 में IRGC ने अमेरिकी नौसेना के 10 नाविक पकड़े

    उस घटना के लगभग 40 साल बाद, 12 जनवरी 2016 को, कुवैत से बहरीन की यात्रा कर रही अमेरिकी नौसेना की दो रिवराइन कमांड नावें फारस की खाड़ी में फारसी द्वीप के पास भटककर ईरानी जल क्षेत्र में प्रवेश कर गईं। नाविकों में 9 पुरुष और एक महिला शामिल थी।

    उनको हथियारबंद IRGC के सदस्यों ने बंदूक की नोक पर पकड़ लिया और उनकी आंखों पर पट्टी बांध दी। यह घटना तब हुई जब उनकी नावें फारसी द्वीप से लगभग एक नॉटिकल मील की दूरी के भीतर आ गईं, जहां ईरान का एक बड़ा सैन्य अड्डा है।

    5 घंटे बाद नाविकों को सुरक्षित रिहा किया गया

    अमेरिकी विदेश मंत्री जॉन केरी ने नाविकों को हिरासत में लिए जाने के पांच मिनट के भीतर ही ईरानी विदेश मंत्री मोहम्मद जवाद जरीफ को फोन किया, जिसके बाद दोनों के बीच फोन कॉल्स का सिलसिला शुरू हो गया। 15 घंटे बाद नाविकों को सुरक्षित रिहा कर दिया गया।

    ईरानी सेना ने नाविकों को आदेश दिया कि वे अपने शरीर पर पहने बॉडी आर्मर उतार दें, घुटनों के बल बैठ जाएं और अपने हाथ सिर के पीछे रख लें; इस दौरान उनकी तस्वीरें और वीडियो भी बनाए गए। इसके बाद चालक दल को फारसी द्वीप ले जाया गया, जहां उनसे पूछताछ की गई और उन्हें पूरी रात हिरासत में रखा गया, जिसके बाद अगले दिन उन्हें रिहा कर दिया गया।

    ब्रिटिश कर्मियों को भी हिरासत में लिया

    अमेरिका अकेला ऐसा देश नहीं है जिसके सैन्य कर्मियों को ईरान ने अपनी हिरासत में लिया हो। मार्च 2007 में, ईरानी नौसेना ने फारसी खाड़ी में व्यापारिक जहाजों का नियमित निरीक्षण कर रहे 15 ब्रिटिश नाविकों और मरीन सैनिकों को बंदूक की नोक पर पकड़ लिया था। ब्रिटेन का दावा था कि उस समय उसके कर्मी इराकी जलक्षेत्र में थे, जबकि ईरान का कहना था कि उन्होंने अवैध रूप से ईरानी क्षेत्र में प्रवेश किया था।

    यह कोई अकेली घटना नहीं थी। वर्ष 2004 में, आठ ब्रिटिश सैनिकों को तीन दिनों तक हिरासत में रखा गया था, जब उनकी नावें बहकर ईरानी जलक्षेत्र में चली गई थीं। उन्हें आंखों पर पट्टी बांधकर रखा गया, उनसे पूछताछ की गई और रिहा किए जाने से पहले ईरानी टेलीविजन पर उनसे माफीनामा पढ़वाया गया।

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