ईरान में जंग के बीच 'ऑल इज वेल' या अंदरूनी बगावत? सरकार समर्थक रैलियों के पीछे की कहानी
ईरान में सरकार और फौज के समर्थन में बड़ी रैलियां हो रही हैं। इसे ईरान के शक्ति प्रदर्शन के तौर पर देखा जा रहा है। वहीं ईरान दुनिया को मैसेज दे रहा है ...और पढ़ें
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ईरान की सरकार इन रैलियों के जरिए अमेरिका, इजरायल और क्षेत्रीय देशों को पैगाम देना चाहती है कि देश में सबकुछ ठीक है।
चंदन सिंह राजपूत, नई दिल्ली। ईरान में सरकार और फौज के समर्थन में जंग के हालातों के बीच बड़ी रैलियों का दौर शुरू हो गया है। ईरानी मीडिया की ओर से किए जा रहे इन रैलियां के प्रसारण में ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्ला अली खामेनेई की मौत पर ईरानी अवाम की गुस्से को खास तव्वज्जो दी जा रही है।
रैलियों में युवा से लेकर बढ़ी उम्र के लोग बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहे हैं और मौत के बदले को लेकर आगबबूला हो रहे हैं। महिलाएं भी बड़ी संख्या में सड़कों पर हैं।

ईरान की सरकार रैलियों के जरिए क्या दिखाने की कोशिश कर रही है?
ईरान की सरकार इन रैलियों के जरिए अमेरिका, इजरायल और क्षेत्रीय देशों को पैगाम देना चाहती है कि देश में सबकुछ ठीक है और जनता किसी भी तरह का विद्रोह नहीं रच रही है बल्कि सरकार के पक्ष में है और सहानुभूति रखती है।
विदेश मामलों के जानकार रॉबिंद्र सचदेव ने दैनिक जागरण को बताया कि ये ईरानी सरकार का शक्ति प्रदर्शन है। उन्होंने कहा, "ईरान में हाल ही में सरकार के समर्थन में जो विशाल रैलियां आयोजित की गई हैं, उनके पीछे मुख्य उद्देश्य अपनी लोकप्रियता और शक्ति का प्रदर्शन करना है। इन रैलियों के माध्यम से ईरान सरकार दुनिया को, विशेषकर अमेरिका को यह संदेश देना चाहती है कि भीषण जंग और बाहरी दबाव के बावजूद देश की जनता अपने नेतृत्व के साथ मजबूती से खड़ी है।
रॉबिंद्र कहते हैं, "यह एक तरह की 'मैसेजिंग' है, जिसका लक्ष्य अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यह जताना है कि ईरानी सरकार के पास पॉपुलर सपोर्ट है और वे झुकने वाले नहीं हैं। साथ ही, यह घरेलू स्तर पर राष्ट्रवाद की भावना को उभारकर सत्ता को और अधिक संगठित (Consolidate) करने की एक सोची-समझी रणनीति है।"
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क्या संभावित विद्रोह को दबाना चाहता है ईरान?
ईरान जानता है कि अमेरिका और इजरायल कभी भी ईरान में विद्रोह की चिंगारी लगा सकते हैं, ऐसे में युद्ध के साथ-साथ आंतरिक विद्रोह को दबाना मुश्किल होगा और इससे जंग में ईरान का पलड़ा पहले से और कमजोर हो जाएगा। ईरान की सरकार ने खामेनेई की मौत को जनता के बीच ऐसे प्रोजेक्ट किया है जैसे कि ये ईरान की अस्मिता का सवाल है।
किसी बड़े विद्रोह या तख्तापलट की आशंका को लेकर रॉबिंद्र सचदेव ने कहा, "फिलहाल किसी बड़े तख्तापलट या आंतरिक विद्रोह की संभावना कम दिखाई देती है। इसका मुख्य कारण यह है कि सरकार के सभी महत्वपूर्ण अंग, जिनमें पार्लियामेंट के स्पीकर, रिवोल्यूशनरी गार्ड्स और न्यायपालिका शामिल हैं, पूरी तरह से वर्तमान नेतृत्व के समर्थन में एकजुट हैं। हालांकि जनता के बीच असंतोष है, लेकिन विपक्ष अभी इतना संगठित या शक्तिशाली नहीं है कि वह वर्तमान ढांचे को पूरी तरह बदल सके। इसलिए, फिलहाल सरकार के अंदर से किसी बड़े बदलाव की उम्मीद कम है और सत्ता अपनी पकड़ बनाए रखने में सक्षम दिख रही है।"

ईरान के लिए अब आगे की राह क्या होगी?
ईरान में भले ही पारंपरिक हथियारों की कमी न हो लेकिन अमेरिका और इजरायल की उन्नत हथियारों के सामने लड़ना कोई आसान काम नहीं है। हालांकि अब ईरान ने अमेरिकी को ये मैसेज दे दिया है कि जंग इतनी जल्दी निर्णायक मोड़ नहीं ले सकता है।
लेकिन इस बीच सवाल ये उठता है कि जंग के उथल-पुथल के बीच ईरान अब किस ओर जाएगा? यानी क्या ईरान भी अब यूक्रेन की तरह एक लंबा थका देने वाले क्षेत्रीय युद्ध में फंस जाएगा?
विदेश मामलों के जानकार रॉबिंद्र सचदेव ने कहा, "वर्तमान परिस्थितियों में ईरान का सबसे प्राथमिक उद्देश्य अपना 'सर्वाइवल' (अस्तित्व को बचाना) है। ईरान की राजनीतिक, सैन्य और धार्मिक लीडरशिप के लिए इस समय सबसे बड़ी चुनौती खुद को सुरक्षित रखना और हमलों का जवाब देना है।"
उन्होंने कहा, "भविष्य की दिशा काफी हद तक अमेरिकी रुख पर निर्भर करेगी। यदि अमेरिका 'रिजाइम चेंज' (सत्ता परिवर्तन) या नेतृत्व को निशाना बनाने की रणनीति पर अड़ा रहता है, तो यह संघर्ष महीनों या सालों तक खिंच सकता है। फिलहाल, ईरान वार्ता के बजाय अपने बचाव और जवाबी कार्रवाई पर अधिक केंद्रित दिख रहा है, क्योंकि एक मजबूत और सर्वमान्य नए नेतृत्व का विकल्प अभी स्पष्ट नहीं है।"