Trending

    विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

    ईरान में विरोध प्रदर्शनों के बीच उठी राजशाही की मांग, कौन हैं क्राउन प्रिंस रजा पहलवी?

    Updated: Sat, 10 Jan 2026 06:42 PM (IST)

    ईरान में आर्थिक संकट के कारण सरकार विरोधी प्रदर्शन उग्र हो रहे हैं। खामनेई के प्रयासों के बावजूद, ये प्रदर्शन जारी हैं और व्यापक सरकार विरोधी आंदोलन म ...और पढ़ें

    timer icon

    समय कम है?

    जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

    संक्षेप में पढ़ें

    डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। ईरान में आर्थिक संकट को लेकर सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन दिनों-दिन उग्र होते जा रहे हैं। खामनेई की लाख कोशिशों के बावजूद ईरान में विरोध-प्रदर्शन थमने के नाम नहीं ले रहे हैं। ये विरोध प्रदर्शन अब व्यापक सरकार विरोधी प्रदर्शनों में बदल गए हैं।

    एक तरफ ईरान में सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन तेज हो गए हैं, तो दूसरी तरफ ईरान के आखिरी शाह, मोहम्मद रजा पहलवी के बेटे रजा पेहलवी ने देश में और विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया है। पहलवी अपने देश में सत्ता परिवर्तन और एक लोकतांत्रिक लोकतंत्र की स्थापना चाहते हैं। वहीं कुछ प्रदर्शनकारी राजशाही की वापसी की मांग कर रहे हैं।

    कौन हैं रजा पहलवी?

    रजा पहलवी, ईरान के आखिरी शाह, मोहम्मद रजा पहलवी और महारानी फराह पहलवी के बेटे हैं। उन्होंने ईरान में लोगों से और अधिक विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया है। वह ईरान में सत्ता परिवर्तन और एक धर्मनिरपेक्ष लोकतंत्र की स्थापना चाहते हैं।

    पहलवी कभी ईरान की पश्चिमी समर्थक राजशाही के क्राउन प्रिंस थे, जिसे 1979 में एक बड़े पैमाने पर क्रांति के बाद उखाड़ फेंका गया था। जिसके बाद ईरान में इस्लामिक गणराज्य का उदय हुआ। 1978 में पहलवी ने 17 साल की उम्र में टेक्सास में रीज एयर फोर्स बेस में अमेरिका में सैन्य प्रशिक्षण के लिए ईरान छोड़ा।

    खबरें और भी

    reza pahlavi R (1)

    उनके जाने के कुछ महीनों बाद, जनवरी 1979 में ईरानी क्रांति में शाह और उनके परिवार को देश छोड़ने के लिए मजबूर कर दिया। अपना सैन्य प्रशिक्षण पूरा करने के बाग, पहलवी वापस अपने परिवार के साथ रहने लगे, जो मोरक्को से बहामास और फिर मैक्सिको चले गए थे।

    मोहम्मद रजा पहलवी को क्यों छोड़ना पड़ा ईरान?

    ये बात साल 1979 की है, जब ईरान में मोहम्मद रजा पहलवी का शासन चलता था, लेकिन जनता अचानक सड़कों पर उतर आई और देश में गृहयुद्ध के हालात पैदा हो गए। देश के लोग अयातुल्ला अली खामनेई की वापसी की मांग करने लगे जो उस समय फ्रांस में निर्वासित जीवन बिता रहे थे। इसी साल देश में इस्लामी क्रांति हुई और मोहम्मद रजा पहलवी को परिवार के साथ देश छोड़कर भागना पड़ा।

    पहलवी के शासन के खिलाफ बगावत के बीज को साल 1963 के आर्थिक और सामाजिक सुधारों के बाद से ही पड़ गए थे। सत्तर के दशक में ईरान में महिलाओं की पूरी आजादी थी। कॉलेजों और यूनिवर्सिटी में महिलाएं मिनी स्कर्ट और जींस में सड़कों पर बे-रोकटोक आ जा सकती थीं।

    इसी के खिलाफ ईरान में इस्लामी क्रांति हुई और पहलवी को सत्ता गंवानी पड़ी। और सत्ता अयातुल्ला अली खामनेई की हाथों में आ गई। देश छोड़ने के बाद मोहम्मद रजा पहलवी ज्यादा दिनों तक जीवत नहीं रहे, और साल 1980 में कैंसर से मिस्र में उनका निधन हो गया।

    तेहरान की सड़कों पर लगे 'तानाशाह मुर्दाबाद' के नारे

    पहलवी ने प्रदर्शनकारियों से गुरुवार और शुक्रवार को रात 8 बजे प्रदर्शन करने का आग्रह किया । जैसे ही समय आया, पूरे तेहरान में प्रदर्शनकारियों को नारे लगाते सुना गया, 'तानाशाह मुर्दाबाद' और 'इस्लामी गणराज्य मुर्दाबाद'।

    Iran Protest R (1)

    ईरान से सभी कम्यूनिकेशन बंद होने से पहले हजारों लोग सड़कों पर उतर आए। पहलवी ने कहा कि आज रात ईरानियों ने अपनी आजादी की मांग की, जवाब में ईरान में शासन ने सभी संचार कीा लाइनें काट दीं हैं।

    पहलवी ने ट्रंप को दिया धन्यवाद

    बता दें कि अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने दोहराया कि अगर ईरानी सरकार प्रदर्शनकारियों को निशाना बनाती है, तो वह दखल देंगे। हालांकि ट्रंप ने पहलवी ने मिलने से इनकार कर दिया, जिन्हें उन्होंने एक अच्छा इंसान कहा।

    पहलवी ने ट्रंप को धन्यवाद देते हुए कहा और दावा किया कि गुरुवार रात को लाखों ईरानियों ने विरोध प्रदर्शन किया। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा, "मैं आजाद दुनिया के नेता, राष्ट्रपति ट्रंप को धन्यवाद देना चाहता हूं, जिन्होंने सरकार को जवाबदेह ठहराने के अपने वादे को फिर से दोहराया है।"

    यह भी पढ़ें- ईरान के सुप्रीम लीडर खामेनेई ने चलवाई प्रदर्शनकारियों पर गोलियां, अबतक 217 लोगों की मौत