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    यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Nov 27, 2023 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

    Israel Hamas War: हमास के साथ जंग और सीजफायर के बीच इजरायल में होगा सत्ता परिवर्तन? नेतन्याहू की बढ़ी टेंशन

    By AgencyEdited By: Nidhi Avinash
    Updated: Mon, 27 Nov 2023 09:50 AM (IST)

    नेतन्याहू (Israel Hamas war ) की छवि लंबे समय से एक सुरक्षाकर्मी ईरान के प्रति सख्त और एक ऐसी सेना द्वारा समर्थित होने की रही है जिसने यह सुनिश्चित कि ...और पढ़ें

    हमास जंग के बीच नेतन्याहू की बढ़ी टेंशन (Image: Reuters)
    हमास जंग के बीच नेतन्याहू की बढ़ी टेंशन (Image: Reuters)

    HighLights

    1. प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की हो रही काफी आलोचना
    2. नेतन्याहू के कैबिनेट मंत्रियों से बनाई गई दूरी
    3. युद्ध में लगभग 14,800 फलिस्तीनी मारे गए

    रॉयटर्स, यरूशलम। Isreal-Hamas War: 7 अक्टूबर को इजरायल में हमास की घुसपैठ को रोकने में हुई विफलता पर प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को काफी अलोचना का सामना करना पड़ रहा है। खूनी संघर्ष के बीच नेतन्याहू ने एक हमास के खिलाफ और दूसरा अपने राजनीतिक अस्तित्व के लिए सुर्खियों से खुद को परहेज में रखा।

    74 वर्षीय नेतन्याहू की छवि लंबे समय से एक सुरक्षाकर्मी, ईरान के प्रति सख्त और एक ऐसी सेना द्वारा समर्थित होने की रही है, जिसने यह सुनिश्चित किया कि यहूदियों को फिर कभी नरसंहार का सामना नहीं करना पड़ेगा। उनके कार्यकाल के दौरान 7 अक्टूबर की हिंसा सबसे घातक घटना साबित हुई है।

    नेतन्याहू के कैबिनेट मंत्रियों से किनारा

    इस बीच इजराइलियों ने नेतन्याहू के कुछ साथी कैबिनेट मंत्रियों से किनारा कर लिया है। उन पर फलिस्तीनी हमास बंदूकधारियों को गाजा से प्रवेश करने से रोकने में विफल रहने, 1,200 लोगों की हत्या करने, 240 से अधिक लोगों का अपहरण करने और देश को युद्ध में झोंकने का आरोप लगाया गया है।

    इस युद्ध से नेतन्याहू को कितना फायदा?

    अलग-अलग घटनाओं में, नेतन्याहू के कम से कम तीन मंत्रियों को सार्वजनिक रूप से दुर्व्यवहार का शिकार होना पड़ा। विशेषज्ञ कहते है कि नेतन्याहू को ऐसे युद्ध से फायदा होने वाला है, जो उनके 3-1/2 साल पुराने भ्रष्टाचार के मुकदमे में और देरी लाएगा।

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    वहीं, 4 दिन के सीजफायर द्वारा बंधकों की वापसी के माध्यम से वह अपनी प्रतिष्ठा बचाने की भी उम्मीद कर सकते हैं। हाल के हफ्तों में किए गए सर्वेक्षणों से पता चला है कि इजरायली युद्ध प्रयासों का नेतृत्व करने के लिए सुरक्षा प्रतिष्ठान पर भरोसा करते हैं, लेकिन नेतन्याहू पर नहीं। 7 अक्टूबर की विफलता के बाद इजरायल को जो भी सफलता मिलेगी उसका श्रेय उन्हें नहीं दिया जाएगा।

    अगर बरकरार रही नेतन्याहू की सत्ता तो..

    गाजा स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि युद्ध में लगभग 14,800 फलिस्तीनी मारे गए हैं और सैकड़ों हजार लोग विस्थापित हुए हैं। इजरायल के सबसे लंबे समय तक सेवा करने वाले प्रधानमंत्री, नेतन्याहू कई राजनीतिक संकटों से बचे हैं और कई बार सत्ता में वापसी की है। अगर उनका गठबंधन बरकरार रहता है तो उन्हें तीन साल तक एक और चुनाव का सामना करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। बता दें कि नेतन्याहू ने हमास के हमले के कुछ दिनों बाद हमास को नष्ट करने और बंधकों को वापस लाने के अभियान के लिए देश को एकजुट करने के लिए इजरायली युद्ध कैबिनेट का गठन किया था।

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