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    ट्रंप की मोहलत के बीच इजरायल-अमेरिका का ईरान पर बड़ा हमला, 20 लोगों की मौत; तेहरान भड़का

    Updated: Sat, 28 Mar 2026 06:59 AM (IST)

    ईरानी सरकारी मीडिया के मुताबिक, शुक्रवार को पश्चिमी ईरान के करमानशाह प्रांत पर अमेरिका और इजरायल द्वारा किए गए हमलों में कम से कम 20 लोग मारे गए और दर ...और पढ़ें

    इजरायल-अमेरिका का ईरान पर किया बड़ा हमला, 20 लोगों की मौत (फोटो- रॉयटर)

    इजरायल-अमेरिका का ईरान पर किया बड़ा हमला, 20 लोगों की मौत (फोटो- रॉयटर)

    HighLights

    1. अराक हेवी वाटर कांप्लेक्स और यज्द के येलोकेक संयंत्र को बनाया निशाना

    2. इजरायल ने कहा, हमले और तेज होंगे, रिवोल्यूशनरी गार्ड ने चेताया

    3. अब जवाब अलग होगा- ट्रंप बोले- अब छह अप्रैल तक ईरान के ऊर्जा ढांचे पर नहीं करेंगे हमले 

    4. ट्रंप के बयान पर भड़के आइआरजीसी ने होर्मुज से लौटाए तीन तेल टैंकर, दी चेतावनी 

    5. ईरानी हमले में कुवैत के दो बंदरगाहों और सऊदी अरब में अमेरिकी विमान बेड़े को नुकसान 

    जागरण न्यूज नेटवर्क, नई दिल्ली। इजरायल ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई तेज करते हुए शुक्रवार को उसके दो परमाणु संयंत्रों पर हमले किए। इसके साथ ही पिछले एक सप्ताह से तनाव कम करने के लिए चल रहे कूटनीतिक प्रयासों पर फिर संकट गहराता दिखने लगा है।

    ये हमले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की उस घोषणा के बाद हुए, जिसमें उन्होंने ईरान के ऊर्जा ढांचों पर प्रस्तावित हमलों को अगले 10 दिनों के लिए टालने की बात कही थी।

    पश्चिमी ईरान में अमेरिकी-इजरायली हमलों में 20 लोग मारे गए

    ईरानी सरकारी मीडिया के मुताबिक, शुक्रवार को पश्चिमी ईरान के करमानशाह प्रांत पर अमेरिका और इजरायल द्वारा किए गए हमलों में कम से कम 20 लोग मारे गए और दर्जनों घायल हो गए। प्रांत के एक सुरक्षा अधिकारी ने यह जानकारी दी।

    सरकारी मीडिया आउटलेट तसनीम ने बताया कि हमलों में प्रांत के तीन अलग-अलग स्थानों पर आवासीय क्षेत्रों को निशाना बनाया गया। मृतकों में महिलाएं और बच्चे शामिल थे, जिनमें एक गर्भवती महिला भी थी।

    तसनीम के अनुसार, शुक्रवार सुबह करखानेह गांव में हुए पहले हमले में कम से कम सात लोग मारे गए, जबकि बाद में प्रांतीय राजधानी करमानशाह में हुए दो हमलों में कम से कम 13 लोग हताहत हुए।

    अमेरिका व इजरायल से जुड़े नागरिकों को अपने कार्यस्थल छोड़ने की चेतावनी

    इजरायली सेना ने दावा किया कि कार्रवाई में मिसाइल उत्पादन क्षमता, परमाणु कार्यक्रम से जुड़ा बुनियादी ढांचा और अन्य रणनीतिक ठिकाने निशाने पर रहे। उधर, ईरान ने कहा कि शांति वार्ता के बीच ऐसे हमले स्वीकार नहीं किए जाएंगे और अमेरिका व इजरायल से जुड़े नागरिकों को अपने कार्यस्थल छोड़ने की चेतावनी दी गई है।

    ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड (आइआरजीसी) ने ट्रंप के उस बयान पर भी नाराजगी जताई, जिसमें ईरान से 'उपहार' के रूप में तेल टैंकर दिए जाने की बात कही गई थी। आइआरजीसी ने स्पष्ट किया कि अमेरिका-इजरायल के सहयोगियों के लिए होर्मुज जलमार्ग अब भी बंद है और वहां से निकलने का प्रयास कर रहे तीन जहाज लौटा दिए गए।

    खबरें और भी

    अमेरिकी विमान बेड़े को भारी नुकसान

    ईरान ने दावा किया कि उसके हमले में सऊदी अरब के अल-खर्ज स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डे पर तैनात विमान बेड़े को भारी नुकसान पहुंचा है। क्षेत्रीय तनाव के बीच कच्चा तेल 111 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया।

    फ्रांस में जी-7 विदेश मंत्रियों की बैठक में नागरिक ठिकानों पर हमले रोकने का प्रस्ताव पारित हुआ, जबकि अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने कहा कि ईरान में सैनिक उतारने की जरूरत नहीं पड़ेगी और युद्ध कुछ हफ्तों में समाप्त हो सकता है।

    ईरान ने मानवीय सहायता के लिए होर्मुज जलमार्ग सीमित रूप से खुला रखने की बात कही है।ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी आइआरएनए के अनुसार, इजरायल ने अराक स्थित शहीद खोन्दाब हेवी वाटर कांप्लेक्स और यज्द प्रांत के अरदकान येलोकेक उत्पादन संयंत्र को निशाना बनाया।

    रेडियोधर्मी प्रदूषण का खतरा भी नहीं

    बता दें कि यलोकेक कच्चे अयस्क से अशुद्धियों को हटाने के बाद प्राप्त यूरेनियम का सांद्र रूप है। वहीं, भारी जल का उपयोग परमाणु रिएक्टरों में मॉडरेटर के रूप में किया जाता है। हमलों में कोई जनहानि नहीं हुई और रेडियोधर्मी प्रदूषण का खतरा भी नहीं है।

    इजरायली सेना के अनुसार संयंत्र में संवर्धन योग्य कच्चे पदार्थ तैयार किए जाते हैं, इसलिए यह हमला ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर बड़ा प्रहार है। रिवोल्यूशनरी गार्ड के एयरोस्पेस फोर्स कमांडर सैयद मजीद मूसवी ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि अब जवाब सिर्फ आंख के बदले आंख नहीं होगा।

    ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि दो सबसे बड़े इस्पात संयंत्रों और संवेदनशील परमाणु केंद्रों सहित प्रमुख ढांचों पर हमलों के बाद दुश्मन को इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ेगी। अराघची ने एक्स पर आरोप लगाया कि इजरायल ने ये हमले अमेरिका के साथ मिलकर किए हैं।

    ट्रंप ने हमलों की बढ़ाई समयसीमा

    पश्चिम एशिया में जारी सैन्य संघर्ष के बीच ट्रंप ने 'एक कदम आगे, दो कदम पीछे' की रणनीति अपनाते हुए ईरान के ऊर्जा ढांचे पर प्रस्तावित हमलों को एक बार फिर टाल दिया। उन्होंने नई समयसीमा के तहत 6 अप्रैल तक ईरानी ऊर्जा ढांचों पर हमला न करने की घोषणा की।

    फॉक्स न्यूज को दिए साक्षात्कार में ट्रंप ने कहा कि तेहरान ने होर्मुज जलमार्ग खोलने समेत समझौते की अन्य शर्तों पर विचार के लिए अमेरिका से सात दिनों की मोहलत मांगी थी, लेकिन मैंने 10 दिन दिए, क्योंकि उन्होंने मुझे जहाज दिए।

    तेहरान अपना जवाब शुक्रवार को भेज सकता है

    ट्रंप का संकेत होर्मुज जलमार्ग से आठ तेल टैंकरों के सुरक्षित गुजरने के उनके दावे की ओर था, जिसे उन्होंने ईरान की ओर से अमेरिका के लिए सद्भावना संकेत बताया।

    उधर, मामले से जुड़े एक सूत्र के अनुसार ट्रंप और व्हाइट हाउस के वरिष्ठ अधिकारियों को मध्यस्थों के जरिए संकेत मिला है कि तेहरान अपना जवाब शुक्रवार को भेज सकता है।

    जी7 में रूबियो का दावा, कुछ हफ्तों में युद्ध खत्म

    न्यूयॉर्क टाइम्स के अनुसार, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने जी7 के अपने समकक्षों को बताया कि ईरान के खिलाफ अमेरिका-इजरायल का सैन्य अभियान कुछ ही हफ्तों में समाप्त होने की उम्मीद है।

    रॉयटर के अनुसार, फ्रांस में जी7 विदेश मंत्रियों की बैठक के दौरान, रुबियो ने सहयोगी देशों से होर्मुज जलमार्ग की सुरक्षा के लिए तुरंत युद्धपोत उपलब्ध कराने का अनुरोध नहीं किया। इसके बजाय उन्होंने उनसे युद्ध के बाद संभावित भूमिका के लिए तैयार रहने को कहा।

    होर्मुज से किसी भी आवाजाही पर कड़ा जवाब देंगे: आइआरजीसी नौसेना

    न्यूयॉर्क टाइम्स के अनुसार, रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (आइआरजीसी) नौसेना ने ट्रंप के उस दावे को खारिज कर दिया, जिसमें होर्मुज जलडमरूमध्य को नौवहन के लिए खुला बताया गया था। ईरानी सैन्य नेतृत्व ने कहा कि यह रणनीतिक समुद्री मार्ग अब भी बंद है और यहां किसी भी प्रकार की आवाजाही पर कड़ा जवाब दिया जाएगा।

    यह बयान ऐसे समय आया जब ट्रंप ने गुरुवार को दावा किया था कि ईरान ने आठ तेल टैंकरों को गुजरने दिया। आइआरजीसी ने कहा कि इस सामरिक मार्ग पर ईरान का पूरा नियंत्रण है और बिना अनुमति किसी भी सैन्य या वाणिज्यिक गतिविधि को स्वीकार नहीं किया जाएगा।

    ईरान की कार्रवाई में चीन को दोहरा नुकसान

    रिवोल्यूशनरी गार्ड की नौसेना द्वारा होर्मुज जलमार्ग में सख्ती बढ़ाने से चीन को दोहरा नुकसान उठाना पड़ा। ट्रंप के बयान के बाद आइआरजीसी नौसेना ने होर्मुज से निकलने वाले तीन जहाजों को वापस लौटा दिया।

    मुबारक अल कबीर बंदरगाह को गंभीर नुकसान

    जहाज ट्रैकिंग वेबसाइट 'मैरिनट्रैफिक' के अनुसार इनमें चीन के दो जहाज शामिल थे। दूसरी ओर, ईरानी मिसाइल और ड्रोन हमलों में कुवैत के महत्वपूर्ण सुवैख बंदरगाह और मुबारक अल कबीर बंदरगाह को गंभीर नुकसान पहुंचा है। ये दोनों बंदरगाह चीन की मदद से विकसित किए जा रहे थे और 'बेल्ट एंड रोड' परियोजना का हिस्सा हैं।

    एएनआइ के अनुसार, शुक्रवार को ईरान ने इजरायल के साथ-साथ यूएई, सऊदी अरब, जार्डन, कतर और बहरीन स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों की दिशा में मिसाइल और ड्रोन दागे। यूएई ने छह बैलिस्टिक मिसाइल और नौ ड्रोन इंटरसेप्ट करने का दावा किया।

    सऊदी अरब ने रियाद की ओर बढ़ रहीं छह मिसाइलों को रोकने की बात कही, जबकि जार्डन ने दो ड्रोन मार गिराने का दावा किया। इजरायल में एक बम शेल्टर के पास ईरानी मिसाइल गिरने से चार लोग घायल हुए।

    सऊदी अरब स्थित अल खर्ज अमेरिकी सैन्य अड्डे को नुकसान

    रिवोल्यूशनरी गार्ड ने दावा किया कि उसके हमले की 84वीं लहर में सऊदी अरब स्थित अल खर्ज अमेरिकी सैन्य अड्डे को नुकसान पहुंचा है। कहा गया कि हमले में मिसाइल रोधी रक्षा प्रणाली को नष्ट कर दिया गया और वहां तैनात ईंधन भरनेवाले कई सैन्य विमानों को भारी नुकसान हुआ है।

    एपी के अनुसार, इजरायली सेना (आइडीएफ) ने अहवाज और इस्फहान स्थित स्टील संयंत्रों पर भी बम बरसाए। अलग-अलग हमलों में कुल 26 लोग मारे गए।

    लेबनान में 1100 और ईरान में 1900 से अधिक लोगों की मौत

    इजरायली रक्षा मंत्री इजरायल काट्ज ने लेबनान सरकार को भी चेतावनी दी कि यदि हिजबुल्ला के हथियार नहीं छीने गए तो इजरायली सेना लेबनान में घुसकर कार्रवाई करेगी। दक्षिणी बेरूत में हिजबुल्ला ठिकानों पर भीषण हमले किए गए।

    रेड क्रास के अनुसार, अब तक लेबनान में 1100 और ईरान में 1900 से अधिक लोगों की मौत हुई है। अंतरराष्ट्रीय प्रवासन संगठन ने कहा है कि ईरान में अब तक 82,000 नागरिक इमारतें, जिनमें अस्पताल भी शामिल हैं, नष्ट हो चुकी हैं। 1.80 लाख से अधिक लोग बेघर हुए हैं।

    तेहरान ने मानी यूएन की बात

    वहीं, जेनेवा स्थित संयुक्त राष्ट्र में ईरान के राजदूत अली बहरेनी ने कहा कि तेहरान ने मानवीय सहायता और कृषि सामग्री को होर्मुज जलमार्ग से सुरक्षित रूप से गुजरने देने के अनुरोध को स्वीकार कर लिया है।