ट्रंप की सख्त चेतावनी के बीच इस्लामाबाद में दूसरे दौर की बातचीत, ईरान ने रखी 5 शर्तें
अमेरिका और ईरान के बीच तनावपूर्ण माहौल में बातचीत का दूसरा दौर शुरू होने वाला है। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान को कड़ी चेतावनी दी है, जबकि ईरान ने ...और पढ़ें
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ईरान वार्ता के लिए फिर पाकिस्तान जा रहा अमेरिकी दल (फाइल फोटो)
HighLights
ट्रंप ने ईरान को कड़ी चेतावनी दी, बातचीत पर संदेह।
ईरान ने प्रतिबंध हटने तक वार्ता से किया इनकार।
अमेरिकी टीम में भ्रम, ट्रंप पर घरेलू दबाव बढ़ा।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच सोमवार को एक बार फिर अमेरिकी टीम पाकिस्तान जाकर बातचीत करने वाली है। यह बातचीत का दूसरा दौर होगा। इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने ईरान को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर समझौता नहीं हुआ तो वह कड़े कदम उठाएंगे।
हालांकि, ईरान ने अभी तक यह पुष्टि नहीं की है कि उसका प्रतिनिधिमंडल इस बातचीत में शामिल होगा या नहीं। ईरान का कहना है कि जब तक अमेरिका होर्मुज जलडमरूमध्य से अपनी नौसैनिक नाकेबंदी नहीं हटाता और उसकी अन्य मांगों पर सहमति नहीं देता, तब तक वह बातचीत में शामिल नहीं होगा। ईरान ने अमेरिका के सामने कुछ शर्तें रखी हैं, जिनमें प्रतिबंध हटाना, जब्त संपत्तियां वापस करना और युद्ध को स्थायी रूप से खत्म करना शामिल है।
टीम को लेकर अमेरिका में भी भ्रम
इस बीच अमेरिका में भी बातचीत करने वाली टीम को लेकर भ्रम की स्थिति बनी रही। पहले डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि उपराष्ट्रपति जेडी वेंस इस दौरे का हिस्सा नहीं होंगे। लेकिन बाद में व्हाइट हाउस ने स्पष्ट किया कि जेडी वेंस, विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और ट्रंप के दामाद जैरेड कुशनर इस बातचीत में शामिल होंगे।
बातचीत से पहले ट्रंप ने सोशल मीडिया पर ईरान को लेकर आक्रामक बयान दिए। उन्होंने आरोप लगाया कि ईरान ने युद्धविराम का उल्लंघन करते हुए होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों पर हमला किया। ट्रंप ने चेतावनी दी कि अगर समझौता नहीं हुआ तो अमेरिका ईरान के बिजली संयंत्रों और पुलों को निशाना बना सकता है। हालांकि, कई विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की कड़ी भाषा से बातचीत के सफल होने की संभावना कम हो सकती है।
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ईरान का पलटवार
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने अमेरिका पर पलटवार करते हुए कहा कि अमेरिका खुद तय करता है कि किसे निशाना बनाना है और फिर दूसरों को आतंकवादी कहता है। उन्होंने यह भी कहा कि मानवाधिकार और अंतरराष्ट्रीय कानून सिर्फ कुछ देशों के लिए ही लागू होते हैं।
उधर, अमेरिका में भी ट्रंप की इस रणनीति की आलोचना हो रही है। कुछ विश्लेषकों का कहना है कि बिना तैयारी के सिर्फ धमकी देकर ईरान को झुकाने की कोशिश काम नहीं कर रही है।
ट्रंप पर घरेलू दबाव
रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप खुद को आक्रामक दिखाकर ईरान पर दबाव बनाना चाहते हैं, लेकिन इससे उल्टा असर भी पड़ सकता है। अमेरिका में पेट्रोल की कीमतें बढ़ने को लेकर भी नाराजगी बढ़ रही है। साथ ही, कुछ लोग इस बात से भी नाराज हैं कि जेडी वेंस को बार-बार ऐसी बातचीत के लिए भेजा जा रहा है, जो पहले भी असफल रही है।