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    अमेरिका-ईरान तनाव: क्या है '60 दिन की घड़ी' का मेथड, ट्रंप के सामने चुनौती या अवसर?

    Updated: Mon, 20 Apr 2026 03:54 PM (IST)

    अमेरिका-ईरान तनाव के बीच 'वॉर पावर्स रेजोल्यूशन' (1973) चर्चा में है, जिसे '60 दिन की घड़ी' कहते हैं। यह कानून राष्ट्रपति की सैन्य शक्तियों को सीमित क ...और पढ़ें

    डोनल्ड ट्रंप के सामने बड़ी चुनौती (फोटो-रॉयटर्स)

    डोनल्ड ट्रंप के सामने बड़ी चुनौती (फोटो-रॉयटर्स)

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    संक्षेप में पढ़ें

    डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते टकराव के बीच एक बार फिर अमेरिकी कानून War Powers Resolution (1973) चर्चा में आ गया है। इसे आम तौर पर '60 दिन की घड़ी' कहा जाता है।

    यह कानून राष्ट्रपति की सैन्य शक्तियों पर एक संवैधानिक नियंत्रण के रूप में काम करता है, ताकि बिना कांग्रेस (अमेरिकी संसद) की मंजूरी के लंबे समय तक युद्ध को न चलाया जा सके।

    आखिर क्या है 60 दिन की घड़ी?

    War Powers Resolution के तहत, राष्ट्रपति अगर अमेरिकी सेना को किसी संघर्ष में भेजते हैं, तो 48 घंटे के भीतर कांग्रेस को इसकी जानकारी देना जरूरी होता है। इसके बाद 60 दिनों के अंदर कांग्रेस से औपचारिक मंजूरी लेनी होती है।

    अगर कांग्रेस अनुमति नहीं देती, तो राष्ट्रपति को 30 दिनों के भीतर (कुल 90 दिन की समयसीमा में) सेना को वापस बुलाना होता है। यानी यह कानून सुनिश्चित करता है कि कोई भी राष्ट्रपति अकेले लंबे समय तक युद्ध जारी न रख सके।

    क्यों बना था यह कानून?

    अमेरिका में यह नियम 1973 में वियतनाम युद्ध के बाद लागू किया गया था। उस समय अमेरिकी जनता और सांसदों में यह चिंता बढ़ गई थी कि राष्ट्रपति को युद्ध छेड़ने की बहुत ज्यादा स्वतंत्रता मिल गई है। इसलिए कांग्रेस ने अपनी भूमिका मजबूत करने के लिए यह कानून बनाया।

    डोनल्ड ट्रंप के सामने बड़ी चुनौती

    अगर ईरान के साथ तनाव सैन्य टकराव में बदलता है, तो डोनल्ड ट्रंप पर भी यही नियम लागू होगा। लेकिन रिपोर्ट के मुताबिक, उनके पास कुछ ऐसे रास्ते हैं जिनसे वे इस '60 दिन की घड़ी' के असर को कम करने की कोशिश कर सकते हैं।

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    विशेषज्ञों के मुताबिक, राष्ट्रपति ट्रंप इन चुनौतियों को दरकिनार करने के लिए कई तरीकों का सहारा ले सकते हैं।

    सीमित कार्रवाई का तर्क

    अगर सैन्य ऑपरेशन को पूर्ण युद्ध की बजाय सीमित या रक्षात्मक बताया जाए, तो यह कहा जा सकता है कि War Powers Resolution पूरी तरह लागू नहीं होता।

    कानूनी व्याख्या का इस्तेमाल

    कई बार व्हाइट हाउस यह दलील देता है कि राष्ट्रपति को संविधान के तहत कमांडर-इन-चीफ होने के नाते व्यापक अधिकार हैं, जो इस कानून से ऊपर हो सकते हैं।

    कांग्रेस की निष्क्रियता का फायदा

    अगर कांग्रेस स्पष्ट रूप से कार्रवाई के खिलाफ वोट नहीं करती, तो राष्ट्रपति ऑपरेशन जारी रख सकते हैं।

    आपातकालीन स्थिति का हवाला

    राष्ट्रीय सुरक्षा या अमेरिकी हितों की रक्षा के नाम पर तत्काल कार्रवाई को सही ठहराया जा सकता है।

    अमेरिका में ऐसा पहले कब हुआ है?

    अमेरिका के कई राष्ट्रपतियों ने इस कानून की सीमाओं को अलग-अलग तरीके से बताया है। उदाहरण के तौर पर. लीबिया (2011) में सैन्य कार्रवाई के दौरान ओबामा प्रशासन ने इसे 'सीमित ऑपरेशन' बताया था। इराक और अफगानिस्तान जैसे मामलों में भी राष्ट्रपति और कांग्रेस के बीच अधिकारों को लेकर बहस होती रही है।

    मौजूदा स्थिति क्यों संवेदनशील है?

    ईरान के साथ तनाव सिर्फ क्षेत्रीय नहीं, बल्कि वैश्विक असर वाला मुद्दा है। मध्य पूर्व में किसी भी बड़े सैन्य टकराव से तेल की कीमतों पर असर पड़ सकता है।

    वैश्विक व्यापार और शिपिंग प्रभावित हो सकते हैं। कई देशों की सुरक्षा स्थिति बिगड़ सकती है। ऐसे में '60 दिन की घड़ी' को एक अहम लोकतांत्रिक नियंत्रण के रूप में देखा जा रहा है, जो युद्ध को अनियंत्रित होने से रोक सकता है।

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