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    ईरान युद्ध से करोड़ों जिंदगियों पर मंडराया भूख और बीमारी का साया, हेल्प ग्रुप्स ने जारी की चेतावनी

    Updated: Sun, 05 Apr 2026 09:40 PM (IST)

    पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष ने वैश्विक मानवीय सहायता को गंभीर रूप से बाधित किया है। सहायता समूहों ने चेतावनी दी है कि इससे करोड़ों लोगों तक भोजन और ज ...और पढ़ें

    करोड़ों जिंदगियों पर मंडराया भूख एवं बीमारी का साया। (फाइल)

    करोड़ों जिंदगियों पर मंडराया भूख एवं बीमारी का साया। (फाइल)

    HighLights

    1. पश्चिम एशिया संघर्ष ने मानवीय सहायता आपूर्ति रोकी।

    2. लाखों लोग भोजन, दवाओं के अभाव में फंसे।

    3. वैश्विक भूखमरी, बीमारी बढ़ने का गंभीर खतरा।

    डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में भड़कती युद्ध की लपटों ने न केवल सीमाओं को झुलसाया है, बल्कि पूरी दुनिया में मानवीय सहायता की धमनियों को भी अवरुद्ध कर दिया है। सहायता समूहों ने चेतावनी दी है कि इस संघर्ष के कारण करोड़ों लोगों तक भोजन और जीवनरक्षक दवाइयां पहुंचाना लगभग असंभव होता जा रहा है।

    हिंसा का यह चक्र अगर थमा नहीं, तो मानवता एक ऐसे गहरे संकट में डूब जाएगी, जहां युद्ध से ज्यादा मौतें भूख और इलाज के अभाव में होंगी।

    आपूर्ति श्रृंखला ध्वस्त

    बढ़ती लागत व लंबी दूरी होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे रणनीतिक मार्गों के बंद होने और दुबई, दोहा जैसे हब से संपर्क टूटने के कारण राहत सामग्री के पहुंचने में भारी देरी हो रही है। विश्व खाद्य कार्यक्रम के हजारों टन अनाज बीच रास्ते में फंसे हैं। यूनिसेफ के वैश्विक रसद प्रमुख जीन-सेड्रिक मीस बताते हैं कि ईरान में टीके भेजने के लिए अब तुर्किये के रास्ते सड़क मार्ग का सहारा लेना पड़ रहा है, जिससे लागत 20 प्रतिशत बढ़ गई है और समय भी 10 दिन ज्यादा लग रहा है।

    सूडान में दवाओं की कमी

    'सेव द चिल्ड्रन' के अनुसार, सूडान में दवाओं की कमी से 90 से अधिक स्वास्थ्य केंद्र बंद होने की कगार पर हैं। ढुलाई और बीमा के बढ़ते दामों का सीधा अर्थ है - उसी बजट में अब कम लोगों तक मदद पहुंच पा रही है। गहराता मानवीय संकट और बढ़ती भुखमरी युद्ध का प्रभाव केवल युद्धक्षेत्र तक सीमित नहीं है।

    अफ्रीका और दक्षिण एशिया के छोटे किसानों पर संकट

    खाड़ी देशों से आने वाले उर्वरकों की कमी के कारण पूर्वी अफ्रीका और दक्षिण एशिया के छोटे किसानों पर संकट गहरा गया है। विश्व खाद्य कार्यक्रम ने चेतावनी दी है कि यदि जून तक शांति नहीं हुई, तो दुनिया में 4.5 करोड़ और लोग भीषण भुखमरी का शिकार हो जाएंगे।

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    मानवता को बचाने के लिए नीतिगत निर्णय की आवश्यकता

    'इंटरनेशनल रेस्क्यू कमेटी' की मदीहा रजा कहती हैं, '''युद्ध ने मानवीय अभियानों को उनकी सहनशक्ति की सीमा से बाहर धकेल दिया है।''' जहां एक ओर लेबनान में 10 लाख लोग विस्थापित हैं, वहीं नाइजीरिया और सोमालिया में ईंधन की कीमतों ने एम्बुलेंस और क्लीनिकों के पहिए जाम कर दिए हैं। समय आ गया है कि विश्व शक्तियां सुरक्षा और रक्षा के साथ-साथ गिरती हुई मानवता को बचाने के लिए भी सक्रिय नीतिगत निर्णय लें।

    (समाचार एजेंसी एपी के इनपुट के साथ)

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