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कई दिनों से अंधेरे में डूबा क्यूबा, सैटेलाइट तस्वीरों में भी दिखा ब्लैकआउट का नजारा

Published: Thu, 26 Mar 2026 11:21 AM (IST)

क्यूबा गंभीर बिजली संकट से जूझ रहा है, जिससे देश का एक बड़ा हिस्सा अंधेरे में डूब गया है। नासा ...और पढ़ें

HighLights

  1. नासा की सैटेलाइट तस्वीरों में क्यूबा अंधेरे में डूबा।

  2. ईंधन की कमी और पुराने प्लांट संकट का कारण।

  3. अमेरिकी प्रतिबंधों ने तेल आपूर्ति बाधित की।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। आज जब पूरी दुनिया एआई (AI) के सपनों और नए ऊर्जा विकल्पों के दम पर चमक रही है, वहीं क्यूबा जैसा देश एक गहरे अंधेरे की ओर फिसल रहा है।

इस महीने क्यूबा ने अपने इतिहास के सबसे भीषण बिजली संकट का सामना किया। हालात इतने खराब हैं कि जमीन पर फैला यह अंधेरा अब अंतरिक्ष से भी साफ नजर आने लगा है। नासा (NASA) की सैटेलाइट तस्वीरों ने इस कड़वी हकीकत को पूरी दुनिया के सामने ला दिया है।

नासा के 'ब्लैक मार्बल' नाइटटाइम सैटेलाइट डेटा की तुलना करने पर पता चलता है कि 22 मार्च 2026 को क्यूबा का एक बड़ा हिस्सा पूरी तरह अंधेरे में डूब गया था, जबकि पिछले साल इसी तारीख को वहां रोशनी जगमगा रही थी। शहरों से लेकर कस्बों तक, हर जगह कृत्रिम रोशनी में भारी गिरावट देखी गई है। इस अचानक आए ब्लैकआउट ने देश के 1 करोड़ से ज्यादा लोगों के जीवन को प्रभावित किया है।

अंतरिक्ष से दिखा पसरा हुआ अंधेरा

नासा का 'ब्लैक मार्बल' सिस्टम खास तौर पर रात के समय होने वाले बदलावों को ट्रैक करने के लिए बनाया गया है। यह तकनीक चांद की रोशनी, बादलों और वायुमंडलीय बाधाओं को हटाकर केवल बिजली की उपलब्धता पर नजर रखती है। क्यूबा के मामले में इन तस्वीरों ने पुष्टि की है कि वहां ग्रिड फेल होने और ईंधन की कमी के कारण अंधेरा फैला हुआ है।

हवाना, सैंटियागो डी क्यूबा और कैमागुए जैसे प्रमुख शहरी केंद्र अपनी सामान्य चमक खो चुके हैं। सैटेलाइट इमेजरी में यह साफ दिख रहा है कि ये शहर अब अपनी बेसलाइन क्षमता से कहीं कम रोशनी पैदा कर रहे हैं। ग्रिड के बार-बार ठप होने से पूरा देश एक बड़े ऊर्जा संकट के जाल में फंस गया है।

क्यों बुझ गई क्यूबा की रोशनी?

अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) के आंकड़े बताते हैं कि क्यूबा अपनी बिजली की जरूरतों के लिए 83.3 प्रतिशत तेल उत्पादों पर निर्भर है। इसके अलावा 12.6 प्रतिशत प्राकृतिक गैस और महज 2.3 प्रतिशत जैव ईंधन का हिस्सा है। इतनी भारी निर्भरता ही क्यूबा की सबसे बड़ी कमजोरी बन गई है।

क्यूबा के पास पुराने हो चुके थर्मोइलेक्ट्रिक प्लांट हैं जिन्हें चलाने के लिए लगातार ईंधन की सप्लाई चाहिए होती है। जब भी तेल की आपूर्ति में थोड़ी भी कमी आती है, बिजली उत्पादन गिर जाता है और ग्रिड पूरी तरह अस्थिर हो जाता है। वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों की कमी ने इस समस्या को और भी गंभीर बना दिया है।

वेनेजुएला का संकट से क्या है कनेक्शन?

कभी वेनेजुएला से आने वाला तेल क्यूबा के लिए जीवनरेखा था, लेकिन वहां के घरेलू संकट ने इस सप्लाई को काफी हद तक कम कर दिया है। इसके साथ ही क्यूबा के पास विदेशी मुद्रा की भारी कमी है, जिससे वह अंतरराष्ट्रीय बाजार से तेल खरीदने की स्थिति में नहीं है। इसके अलावा रही-सही कसर अमेरिकी प्रतिबंधों ने पूरी कर दी है।

29 जनवरी 2026 को व्हाइट हाउस ने एक नया टैरिफ सिस्टम लागू किया है। इसके तहत उन देशों पर अतिरिक्त शुल्क लगाने का प्रावधान है जो क्यूबा को सीधे या परोक्ष रूप से तेल की आपूर्ति करते हैं। इन प्रतिबंधों ने शिपिंग, बीमा और वित्तीय लेनदेन को इतना जटिल बना दिया है कि क्यूबा के लिए तेल और पावर प्लांट के स्पेयर पार्ट्स जुटाना लगभग नामुमकिन हो गया है।

अंधेरे के साथ बुनियादी सुविधाओं का संकट

यह ब्लैकआउट केवल रोशनी जाने तक सीमित नहीं है, इसके परिणाम कहीं ज्यादा भयावह हैं। बिजली न होने से पानी की सप्लाई ठप हो गई है, भोजन को सुरक्षित रखने वाले कोल्ड स्टोरेज फेल हो रहे हैं और अस्पतालों को बैकअप जनरेटरों के भरोसे छोड़ दिया गया है। संचार नेटवर्क भी ग्रिड के साथ-साथ दम तोड़ रहे हैं।

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