यूरोप में सदी का सबसे भयंकर सूखा, नदियों में नहीं बचा पानी; फसलें भी तबाह
यूरोप अपने इतिहास के सबसे गंभीर जलवायु संकट और भीषण सूखे से जूझ रहा है, जिससे 60% से अधिक क्षेत्र प्रभावित है। नदियां सूख रही हैं, फसलें नष्ट हो रही ह ...और पढ़ें

यूरोप में 100 साल का सबसे भयंकर सूखा (एआई से बनाई गई तस्वीर)
HighLights
यूरोप में 100 साल का सबसे गंभीर सूखा और जलवायु संकट।
नदियां सूखने से द्वितीय विश्व युद्ध के अवशेष हुए उजागर।
फसलें नष्ट, ऊर्जा संकट और 25,000 से अधिक मौतें।
डिजिटल डेस्क, पेरिस। यूरोप अपने इतिहास के सबसे गंभीर जलवायु संकट और भयानक सूखे से जूझ रहा है। अल-नीनों और लगातार बढ़ती ग्लोबल वार्मिंग के कारण फ्रांस, स्पेन, इटली और ब्रिटेन सहित यूरोप का करीब 60% से ज्यादा हिस्सा भीषण गर्मी और सूखे की चपेट में आ चुका है। स्थिति इतनी विकट हो चुकी है कि इसे पिछले 100 सालों का सबसे बड़ा पर्यावरणीय संकट माना जा रहा है।
नदियों का सूखना और इतिहास के अवशेष बाहर आना
हालात इतने खराब हैं कि यूरोप की मुख्य और जीवनरेखा कही जाने वाली नदियां जैसे, डेन्यूब, राइन और ड्रोम के अलावा कई बड़ी झीलें और तालाब अपने 100 साल के सबसे निचले जलस्तर पर पहुंच गई हैं। नदियों में पानी इतना कम हो गया है कि इसके तल दिखने लगे हैं। हालात ये हैं कि द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान डूबे हुए युद्धपोतों के मलबे अब पानी से बाहर नजर आने लगे हैं।
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कृषि और खाद्य सुरक्षा पर बड़ा खतरा
इतना ही नहीं पानी की भयंकर कमी के कारण खेतों में खड़ी फसलें सूखकर नष्ट हो रही हैं। अकेले फ्रांस में मक्के की पैदावार पिछले 50 सालों के सबसे निचले स्तर पर लुढ़क गई है। इससे आने वाले समय में खाद्य पदार्थों की कीमतों में भारी उछाल और खाद्यान्न संकट का खतरा पैदा हो गया है।
ऊर्जा संकट और विस्थापन
मिली जानकारी के अनुसार नदियों का जलस्तर घटने से पनबिजली का उत्पादन ठप हो गया है, जिससे पूरा यूरोप गंभीर ऊर्जा संकट का सामना कर रहा है। इस भीषण गर्मी और लू के कारण पूरे यूरोप में अब तक 25000 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है।\
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इसके अलावा भयंकर सूखे और जंगलों में लगी आग की वजह से करीब 1.5 लाख हेक्टेयर जमीन जलकर खाक हो चुकी है। हालात से मजबूर होकर लगभग 5 लाख परिवारों को अपने घर-बार छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर पलायन करना पड़ा है।