द्वितीय विश्व युद्ध के बाद पहली बार जर्मनी में सरकार बना सकती है फार राइट पार्टी, 44% वोट मिले
जर्मनी के सैक्सोनी-एनहाल्ट राज्य में हुए क्षेत्रीय चुनावों में फार राइट पार्टी एएफडी ने 44% से अधिक वोट हासिल कर ऐतिहासिक जीत दर्ज की है।

जर्मनी की फार-राइट पार्टी ऑल्टरनेटिव फॉर जर्मनी के नेतागण(फोटो: रॉयटर्स)

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डिजिटल डेस्क, बर्लिन। जर्मनी के पूर्वी राज्य सैक्सोनी-एनहाल्ट में हुए हालिया क्षेत्रीय चुनावों में फार राइट पार्टी अल्टरनेटिव फॉर जर्मनी(एएफडी) ने 44% से अधिक वोट हासिल कर ऐतिहासिक जीत दर्ज की है। यह परिणाम दूसरे विश्व युद्ध के बाद पहली बार किसी राज्य स्तर पर फार राइट पार्टी पार्टी के सत्ता में आने की संभावना पैदा करता है।
पार्टी के प्रमुख उम्मीदवार उलरिच सिगमंड ने इस जीत को ऐतिहासिक करार दिया है, इसे बर्लिन की संघीय सरकार के लिए एक कड़ा संदेश बताया है। यह परिणाम स्थापित राजनीतिक दलों, विशेषकर चांसलर फ्रेडरिक मर्ज की कंज़र्वेटिव क्रिश्चियन डेमोक्रेटिक यूनियन (सीडीयू) के लिए एक बड़ा झटका है।
पिछले 24 वर्षों से राज्य की सत्ता में रही सीडीयू को 2021 के 37.1% के मुकाबले केवल 17.2% वोट मिले, जो पुनर्मिलन के बाद से राज्य में उनका सबसे खराब प्रदर्शन है।
बहुमत से कुछ ही कदम दूर
शानदार प्रदर्शन के बावजूद, एएफडी स्पष्ट बहुमत हासिल करने से चूकती दिख रही है। 83 सीटों वाली राज्य संसद में एएफडी को 39 सीटें मिलने का अनुमान है, जो सरकार बनाने के लिए जरूरी 42 सीटों से सिर्फ तीन कम है।
अब सवाल यह है कि क्या एएफडी सरकार बना पाएगी, क्योंकि जर्मनी के सभी मुख्यधारा के राजनीतिक दलों ने एएफडी के साथ किसी भी गठबंधन या सहयोग से साफ इनकार किया है, एक ऐसी रणनीति जिसे फायरवॉल कहा जाता है।
सैक्सोनी-एनहाल्ट में एएफडी शाखा को जर्मनी की घरेलू खुफिया एजेंसी द्वारा आधिकारिक तौर पर दक्षिणपंथी चरमपंथी समूह घोषित किया गया है, जो इस गतिरोध को और बढ़ाता है। अगर कोई गठबंधन नहीं बनता है, तो या तो एएफडी की अल्पमत सरकार बनेगी या राज्य में फिर से चुनाव की नौबत आ सकती है।
क्या है एएफडी का चुनावी एजेंडा?
35 वर्षीय उलरिच सिगमंड ने एएफडी के अभियान का नेतृत्व किया और उनके वादे काफी उग्र रहे हैं। सिगमंड ने अपने लक्ष्यों में अवैध प्रवासियों को वापस भेजने और देश की सामाजिक व्यवस्था का लाभ उठाने वाले प्रवासियों के लिए प्रोत्साहन समाप्त करने को शीर्ष प्राथमिकता बताया है।
इसके अलावा, एएफडी स्कूलों में पारंपरिक मूल्यों को बढ़ावा देने, समलैंगिक प्राइड फ्लैग पर प्रतिबंध लगाने और राष्ट्रीय ध्वज फहराना अनिवार्य करने जैसी नीतियां लागू करना चाहती है।
जनसंख्या में आ रही कमी से निपटने के लिए, एएफडी प्रवासी श्रमिकों पर निर्भरता कम करके विदेशों में बसे जर्मनों को वापस लाना चाहती है और स्थानीय परिवारों के लिए बेबी बोनस देने का प्रस्ताव रखती है।
आलोचकों और जर्मन आर्थिक संस्थान का मानना है कि प्रवासियों को बाहर निकालने की यह नीति राज्य की अर्थव्यवस्था, विशेष रूप से स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए विनाशकारी साबित हो सकती है, जो काफी हद तक विदेशी श्रमिकों पर निर्भर है।
