नेपाल त्रासदी: 'मैं स्कूल गया तो बच गया, लेकिन मेरी बहनें', 16 साल के समीर की दर्दभरी दास्तां
नेपाल की विनाशकारी बाढ़ ने समीर, आकाश और अंजू जैसे बच्चों की दर्दनाक कहानियां सामने आई हैं, जिन्होंने अपने परिवार के सदस्यों को खो दिया या लापता हो गए।
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आकाश तमांग (14), अंजू तमांग (12) और समीर तमांग (16) (फोटो क्रेडिट- द काठमांडू पोस्ट)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। नेपाल की विनाशकारी बाढ़ ने कई गांवों में तबाही मचाई। इसमें 1003 लोगों की मौत और करीब उतने ही लोग लापता बताए जा रहे हैं। इस खौफनाक हादसों की कई कहानियां अब सामने आ रही है। इसी में से एक कहानी है 16 साल के समीर तमांग की।
'द काठमांडू पोस्ट' की खबर के अनुसार, रसुवा का रहने वाला समीर बाढ़ से ठीक पहले अपने स्कूल पहुंचा था वहीं उसकी दो छोटी बहने घर पर थीं।
जब भोटेकोशी नदी से मलबे के साथ कीचड़ वाला पानी रसुवा में पहुंचा तो नीलाकांठा सेकेंडरी स्कूल में आठवीं का कक्षा छात्र समीर अपनी जान बचाने के लिए पास की एक पहाड़ी पर चढ़ गया। लेकिन उसकी बहनों का अब तक कुछ पता नहीं चल पाया।
समीर ने बताया उस दिन बहन क्यों नहीं गई थी स्कूल?
रसुवा के लहरेपौवा में शिवालय बेसिक स्कूल में बने भीड़-भाड़ वाले अस्थायी शेल्टर में बैठे समीर ने कांपती आवाज में कहा, 'मेरी छोटी बहन के साथ में चोट लगी थी और वह स्कूल नहीं जा सत्का था, इसलिए मेरी बड़ी बहन उसकी देखभाल के लिए घर पर ही रुक गई थी। मुझे समझ नहीं आ रहा कि अब क्या करूं? मेरी बहनें मेरी सबसे अच्छी दोस्त थीं और एक ही पल में बाढ़ उन्हें बहा ले गई।'
बाढ़ ने समीर का घर भी नहीं छोड़ा। उसके पिता, सूर्य, तो बाढ़ से बच निकले, जबकि उसकी मां, छेसांग अभी कुवैत में काम कर रही हैं। 26 अगस्त को आई भयानक बाढ़ के बाद रसुवा और नुवाकोट में राहत शिविरों में शरण लेने वाले सैकड़ों बच्चों में समीर भी शामिल है।
नेपाल तबाही में कितने लोग अभी भी लापता?
शिक्षा मंत्रालय द्वारा जारी शुरुआती आंकड़ों के अनुसार, प्रभावित जिलों में 250 छात्र और शिक्षक लापता हैं। 230 छात्रों में से 213 से संपर्क नहीं हो पा रहा है, जबकि 17 के बह जाने की खबर है। इसके अलावा, लापता 19 शिक्षकों में से 10 बह गए हैं। 23 शिक्षण संस्थानों को भारी नुकसान पहुंचा है, जिनमें नुवाकोट में आठ, रसुवा में सात और बाकी धाडिंग में हैं।
मंत्रालय के सूचना अधिकारी बीर बहादुर धामी ने कहा, 'यह डेटा फ्लड-अफेक्टेड एजुकेशन नाम के व्हाट्सएप ग्रुप, आपदा प्रबंधन टास्क फोर्स और फील्ड अधिकारियों से मिली सीधी जानकारी के जरिए इकट्ठा किया गया था। चूँकि सर्च टीमें अभी भी कीचड़ और मलबा हटा रही हैं, इसलिए घायलों और लापता लोगों की संख्या लगातार अपडेट की जा रही है क्योंकि लोग धीरे-धीरे संपर्क में आ रहे हैं।'
आकाश की दर्द भरी दास्तां
खल्ते के रहने वाले 14 साल के आकाश तमांग के लिए अब बाढ़ की डरावनी यादें बची हैं। उत्तरगया पब्लिक स्कूल जल्दी पहुंचने वाले आकाश ने त्रिशूली नदी की गड़गड़ाहट सुनी। पानी स्कूल परिसर में घुसते ही लोग भागने लगे। आकाश ने कहा, 'हम जंगल की ओर भागे, वरना बच नहीं पाते। बाढ़ ने कुछ सेकंड में स्कूल को निगल लिया। एक बस भी फंस गई थी।'
उस सुबह आकाश ने आठ वर्षीय अश्विन और 11 वर्षीय अनीशा के लिए खाना बनाया और उन्हें नुवाकोट सीमा पार रामचंद्र बेसिक स्कूल भेजा। बाढ़ के बाद दोनों गायब हैं। आंसू पोंछते आकाश बोला, 'मैं बच गया, लेकिन भाई-बहन नहीं। मां दुबई और पिता मलेशिया में काम करते हैं। हम बेत्रावती के किराए के कमरे में रहते थे। नहीं पता नदी उन्हें कहाँ ले गई।'
एक पल में उजड़ गया अंजू का परिवार
कालिका रूरल म्युनिसिपैलिटी के कालिकास्तान स्थित शांति बाजार में अचानक आई बाढ़ ने 12 साल की अंजू तमांग के परिवार को उजाड़ दिया।
बाढ़ में अंजू ने अपनी मां शुभमाया, सबसे बड़े भाई, जीजा, चाची, चाचा और एक साल के चचेरे भाई को खो दिया। पांच साल पहले पिता के निधन के बाद अब अंजू पूरी तरह बेघर हो गई है। फिलहाल वह शिवालाया बेसिक स्कूल में रिश्तेदारों के साथ रह रही है।
